बच्चों से बुजुर्गों तक का दर्द दूर कर रहा ‘मेडिसिनेमा’:  अस्पतालों में मरीजों के लिए खास थिएटर, फिल्में दिखाकर तनाव दूर कर रहे; रिकवरी तेज
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बच्चों से बुजुर्गों तक का दर्द दूर कर रहा ‘मेडिसिनेमा’: अस्पतालों में मरीजों के लिए खास थिएटर, फिल्में दिखाकर तनाव दूर कर रहे; रिकवरी तेज

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यह फोटो चेल्सी एंड वेस्टमिंस्टर अस्पताल की है। आमतौर पर जहां मशीनों की बीप, वेंटिलेटर और मशीनों की आवाज गूंजती है। दवाइयों की गंध और चिंताओं का माहौल रहता है, वहीं एक कोना बच्चों और बुजुर्गों की हंसी व तालियों से खनकता है। यह रंग-बिरंगा, 40 सीटों वाला आधुनिक सिनेमा हॉल ‘मेडिसिनेमा’ खास मरीजों के लिए बनाया गया है। यहां गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चे और बड़े कुछ पल के लिए दर्द, तनाव व अस्पताल का माहौल भूलकर फिल्मों की जादुई दुनिया में खो जाते हैं। 11 वर्षीय फेडरिको हर्निया के इलाज के लिए भर्ती था। जैसे ही उसे पता चला कि मेडिसिनेमा में ‘टॉय स्टोरी 5’ दिखाई जा रही है। यह सुनते ही उसके चेहरे पर खुशी झलक उठी। हालांकि, एलर्जी वाले मरीजों की सुरक्षा के कारण थिएटर में स्नैक्स ले जाने की अनुमति नहीं थी, जिससे वह थोड़ा निराश हुआ। हालांकि फिल्म शुरू होते ही फेडरिको दर्द भूल गया और अंत में मुस्कराते हुए बोला, ‘यह मेरी सबसे पसंदीदा फिल्म है!’ थिएटर के संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाले साइमन हिक्सन हर सुबह अस्पताल के वॉर्डों का दौरा करते हैं। वे डॉक्टरों और नर्सों से चर्चा कर यह तय करते हैं कि कौन-से मरीज फिल्म देखने की स्थिति में हैं। इस सिनेमा में सीटें ही नहीं, बल्कि खास बेड भी लगाए जा सकते हैं, ताकि गंभीर रूप से बीमार मरीज लेटे-लेटे फिल्म देख सकें। यहां हर उम्र और स्थिति के लोग आते हैं- ऑटोइम्यून बीमारी से जूझ रहा 4 चार साल का दान्याल, छह महीनों से भर्ती 71 वर्षीय डायना। नर्स निक्की मुलहाल कहती हैं,‘यह थिएटर मरीजों को उनकी पहचान और सामान्य जिंदगी का एहसास दोबारा दिलाता है।’ हिक्सन बताते हैं,‘आग में गंभीर रूप से झुलसने के बाद दंपती को संक्रमण के खतरे के कारण अलग-अलग वार्ड में रखा गया था। वे एक-दूसरे से मिल भी नहीं सकते थे। उनके लिए हमने विशेष स्क्रीनिंग का इंतजाम किया और दोनों के बेड थिएटर में पास-पास लगवाए। वहां उन्होंने साथ फिल्म देखी, यह पल उनके लिए यादगार बन गया। कैंसर पीड़ित महिला ने इच्छा जताई कि वह ‘बोहेमियन रैप्सोडी’ देखना चाहती है। डिस्ट्रीब्यूटर ने तुरंत फिल्म की कॉपी भेजी और महिला ने परिवार के साथ फिल्म देखते हुए ‘वी आर द चैम्पियंस’ गाना गाया। इसके कुछ ही दिनों बाद उनका निधन हो गया। रिलीज होने से पहले ही मिल जाती हैं फिल्में ब्रिटिश फिल्म इंडस्ट्री इस नेक काम का इतना सम्मान करती है कि हाल ही में ‘मेडिसिनेमा’ को बाफ्टा पुरस्कार दिया गया। फिल्म कंपनियां सिनेमाघरों में रिलीज होने से पहले ही फिल्मों की प्रिव्यू कॉपियां इस संस्था को दे देती हैं। अस्पताल के बेड पर सांस्कृतिक हीलिंग की कोशिश ब्रिटेन के अस्पतालों में ऐसे नौ थिएटर चल रहे हैं। यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की प्रोफेसर डेजी फैनकोर्ट कहती हैं,‘आज के दौर में जब दुनियाभर के डॉक्टर और वैज्ञानिक मानसिक और शारीरिक सेहत को सुधारने के लिए लोगों को आर्ट गैलरी, थिएटर और कॉन्सर्ट हॉल जाने की सलाह दे रहे हैं, तब ‘मेडिसिनेमा’ जैसी संस्थाएं यह सुनिश्चित कर रही हैं कि अस्पताल के बिस्तर पर पड़े मरीज भी इस ‘सांस्कृतिक हीलिंग’ से वंचित न रहें। ऐसे अनुभवों से मरीजों की मानसिक स्थिति सुधरती है, इससे उनकी रिकवरी भी तेजी से होती है। अस्पताल के माहौल से मिलने वाला तनाव और अकेलापन भी काफी हद तक दूर होता है।’



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