नई दिल्ली14 मिनट पहले
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दुनिया के पांच में से तीन कर्मचारी स्वस्थ वर्क-लाइफ बैलेंस बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। – प्रतीकात्मक फोटो
दोपहर को आने वाली नींद को अक्सर आलस समझ लिया जाता है। लेकिन वैज्ञानिक कहते हैं कि दिन में थोड़ी देर की झपकी से दिमाग फ्रेश करने में मदद मिलती है। ‘द ब्रेन एट रेस्ट’ पुस्तक के लेखक न्यूरोसाइंटिस्ट जोसेफ जेबेली कहते हैं कि काम के अत्यधिक दबाव की वजह से होने वाली बीमारियों से दुनियाभर में हर साल करीब 7.5 लाख लोगों की मौत होती है।
दुनिया के पांच में से तीन कर्मचारी स्वस्थ वर्क-लाइफ बैलेंस बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में 30 मिनट की झपकी या ब्रेक लेना रचनात्मकता को बढ़ा सकता है और काम से जुड़े बर्नआउट को दूर करने में मदद कर सकता है। इसे दिमाग का एक रीसेट मैकेनिज्म कह सकते हैं जो हमें बेहतर सोचने और सीखने के लिए तैयार करता है। जोसेफ जेबेली ने अपनी पुस्तक में लिखा है, 30 मिनट की झपकी के अलावा मस्तिष्क को वास्तव में आराम देने के कई अन्य तरीके हैं। इसमें खाली बैठकर मन को भटकने देना, दिवास्वप्न देखना या प्रकृति में, हरे-भरे स्थानों में समय बिताना शामिल हो सकता है।
दिमाग की नई चीजें सीखने की ताकत बढ़ जाती है
अमेरिका की नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित हालिया रिसर्च के मुताबिक झपकी के बाद दिमाग की नई चीजें सीखने की क्षमता बढ़ जाती है। दिनभर हम जो भी सीखते, देखते और सोचते हैं, उससे दिमाग के न्यूरल कनेक्शन लगातार मजबूत होते जाते हैं। लेकिन एक सीमा के बाद यह सिस्टम सैचुरेट हो जाता है, यानी नई जानकारी लेने की क्षमता घटने लगती है। नींद, खासकर छोटी झपकी अनावश्यक न्यूरल कनेक्शन को कमजोर करती है और जरूरी कनेक्शन को मजबूत करके दिमाग में नई जानकारी के लिए खाली जगह बनाती है।
लेकिन, बार-बार नींद आने को नजरअंदाज न करें
लंच के बाद नींद आना स्वाभाविक है। भोजन के बाद, शरीर पाचन में सहायता के लिए पेट और आंतों में अधिक रक्त भेजता है। मस्तिष्क तक थोड़ा कम रक्त पहुंचने से सुस्ती आ सकती है। लेकिन बार-बार नींद आना इस बात का संकेत हो सकता है कि ब्लड शुगर बहुत अधिक घट-बढ़ रही है। ऐसे में आपको डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।









