15 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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दिवाली का त्योहार आते ही बच्चों में उत्साह की लहर दौड़ जाती है। मिठाइयों का स्वाद, नए कपड़ों की चमक और पटाखों की रंगीन रोशनी इस पर्व को उनके लिए और भी खास बना देती है। लेकिन यही उत्साह कई बार लापरवाही में बदल जाता है और बच्चे अनजाने में जोखिम मोल लेते हैं।
हर साल देशभर में सैकड़ों बच्चे पटाखों या दीयों से जलने और चोट लगने की घटनाओं का शिकार होते हैं। ऐसे में माता-पिता के लिए दिवाली की खुशियों के साथ बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना सबसे पहली जिम्मेदारी बन जाती है।
तो चलिए, आज जरूरत की खबर में हम बात करेंगे कि पेरेंट्स अपने बच्चों को दिवाली के दौरान कैसे सुरक्षित रख सकते हैं। साथ ही जानेंगे कि-
- दिवाली पर बच्चों की सुरक्षा क्यों जरूरी है?
- दिवाली पर बच्चों के लिए सेल्फ-केयर टिप्स क्या हैं?
एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर
सवाल- दिवाली पर बच्चों की सुरक्षा क्यों जरूरी है?
जवाब- दरअसल बच्चे दिवाली के उत्साह में खतरे को समझ नहीं पाते हैं। दीये, पटाखे और लाइट्स की सजावट से घटनाएं हो सकती हैं। ऐसे में सही निगरानी और सुरक्षा उपायों से बच्चों को किसी भी तरह की दुर्घटनाओं से बचाया जा सकता है।
सवाल- दिवाली पर बच्चों की सुरक्षा के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
जवाब- फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर डॉ. अमिता श्रृंगी बताती हैं कि दिवाली के पर्व पर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कुछ बातों का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। इन्हें नीचे दिए गए ग्राफिक से समझिए-

आइए, अब ग्राफिक में दिए कुछ पॉइंट्स के बारे में विस्तार से बात करते हैं।
बच्चों को अकेले बाहर न भेजें
दिवाली के दिन गलियों और मोहल्लों में जगह-जगह पटाखे जलाए जाते हैं। ऐसे माहौल में छोटे बच्चे उत्साह में अकेले बाहर निकल सकते हैं, जिससे उन्हें चोट लगने या जलने का खतरा रहता है। इसलिए माता-पिता को चाहिए कि वे बच्चों को अकेले बाहर न भेजें और उनकी हर एक्टिविटी पर नजर रखें। बेहतर होगा कि उन्हें घर के सुरक्षित हिस्से में खेलने दें, ताकि वे त्योहार का मजा भी ले सकें और पूरी तरह सुरक्षित भी रहें।
पटाखों के प्रदूषण से बचाएं
पटाखों से निकलने वाला धुआं हवा को जहरीला बना देता है, जो खासकर बच्चों की सेहत के लिए बेहद खतरनाक होता है। यूनिसेफ की 2021 की रिपोर्ट के अनुसार, वायु प्रदूषण हर साल लाखों बच्चों की सेहत को प्रभावित करता है। इसलिए दिवाली के दौरान बच्चों को धुएं और प्रदूषण से बचाने के लिए उन्हें जितना संभव हो घर के अंदर रखें और बाहर निकलते समय मास्क पहनाएं। साथ ही, खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें ताकि धुआं घर के भीतर न घुसे।
बिजली की झालरों से सावधान रहें
दिवाली पर सजावट के लिए लगाई जाने वाली रंग-बिरंगी झालरें बच्चों को खूब आकर्षित करती हैं, लेकिन इनमें करंट लगने या शॉर्ट-सर्किट का खतरा रहता है। इसलिए इन्हें हमेशा बच्चों की पहुंच से दूर और ऊंचाई पर लगाना चाहिए। साथ ही बिजली के तारों और प्लग पॉइंट्स की जांच करें, जिससे किसी भी तरह की चिंगारी, शॉर्ट-सर्किट या आग लगने के खतरे से बचा जा सके।
तेज आवाज से बचाएं
पटाखों की तेज आवाज बच्चों के नाज़ुक कानों को नुकसान पहुंचा सकती है। ये उनके हार्ट और मेंटल हेल्थ को भी प्रभावित कर सकती है। इसलिए बच्चों को शोरगुल वाले इलाकों से दूर रखना बेहतर है। अगर घर के आसपास लगातार तेज आवाज वाले पटाखे फोड़े जा रहे हों तो बच्चों को इयरमफ्स या कान ढकने के लिए कोई सुरक्षित विकल्प दें।
आतिशबाजी में सतर्कता बरतें
आतिशबाजी का मजा तभी है, जब वह सुरक्षित तरीके से की जाए। पटाखे हमेशा सरकारी लाइसेंस प्राप्त दुकानों से ही खरीदने चाहिए क्योंकि ये कुछ हद तक सुरक्षित होते हैं। बच्चों को बड़े और खतरनाक पटाखों से दूर रखना चाहिए और केवल फुलझड़ियां, अनार और छोटे फाउंटेन जैसे थोड़ा सुरक्षित विकल्प ही देने चाहिए। बच्चे को कभी अकेले पटाखे न जलाने दें।
दीयों से सावधान रखें
दीयों और मोमबत्तियों की रोशनी दिवाली का असली आकर्षण होती है, लेकिन यह बच्चों के लिए खतरा भी बन सकती है। इससे बचने के लिए दीयों को हमेशा सपाट सतह पर रखें। इन्हें पर्दों या अन्य ज्वलनशील चीजों से दूर रखें। बच्चों को दीयों से खेलने, छूने से रोकना जरूरी है। साथ ही प्रवेश द्वार और गलियारों में रखे दीयों को हटाकर किसी सुरक्षित जगह पर रखें।
इमरजेंसी की तैयारी करें
त्योहारों पर जरा सी लापरवाही से हादसे हो सकते हैं। इसलिए घर में हमेशा फर्स्ट एड किट, पानी से भरी बाल्टी और संभव हो तो फायर एक्सटिंग्विशर तैयार रखना चाहिए। बच्चों को भी यह सिखाना जरूरी है कि आपात स्थिति में क्या करना है और तुरंत किसे बुलाना है। उन्हें पुलिस, फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस जैसे इमरजेंसी नंबर याद कराने चाहिए।
खानपान का ध्यान रखें
दिवाली पर मिठाइयां और तली-भुनी चीजें खूब खाने को मिलती हैं, लेकिन इन्हें ज्यादा मात्रा में खाने से उन्हें अपच, पेट दर्द या फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए जरूरी है कि मिठाइयां और खाने की अन्य चीजें विश्वसनीय दुकानों से ही खरीदें और बच्चों को सीमित मात्रा में ही दें।

सवाल- दिवाली सेफ्टी के अलावा बच्चों को सेल्फ-केयर के लिए कौन सी बातें सिखाना जरूरी है?
जवाब- बच्चों को बुनियादी सुरक्षा और सेल्फ-केयर टिप्स सिखाने जरूरी हैं ताकि वे माता-पिता की अनुपस्थिति में भी खुद को सुरक्षित रख सकें। उन्हें खतरों को पहचानना, सही दूरी बनाए रखना और इमरजेंसी में मदद मांगना सिखाना चाहिए। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- क्या दिवाली पर बच्चों के लिए पटाखों के अन्य विकल्प हैं?
जवाब- हां, बच्चों को पटाखों की जगह फुलझड़ी, रंगोली बनाना, दीये सजाना, पेपर लालटेन या लाइटिंग डेकोरेशन जैसी एक्टिविटीज में शामिल किया जा सकता है। इससे उनका उत्साह भी बना रहेगा और खतरा भी कम होगा।
सवाल- दिवाली की छुट्टियों में बच्चों का समय कैसे मैनेज करें?
जवाब- त्योहार के बीच बच्चों का पूरा दिन सिर्फ खेलने या पटाखों में न जाए। उनके लिए मजेदार क्राफ्ट एक्टिविटी, परिवार संग पूजा-पाठ में शामिल होना और घर की सजावट में हाथ बंटाने जैसी चीजें तय करें। इससे वे त्योहार का आनंद भी लेंगे और नई बातें सीखेंगे।
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फायर ऑफिसर रामराजा यादव बताते हैं कि पटाखे हमेशा खुले मैदान में और वयस्कों की निगरानी में जलाएं। लंबे ढीले कपड़े न पहनें क्योंकि वे जल्दी से आग पकड़ते हैं। माचिस या लाइटर की जगह लंबी अगरबत्ती यूज करें। इसके अलावा कुछ और बातों का भी ध्यान रखें। पूरी खबर पढ़िए…








