11 घंटे पहले
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बारिश का मौसम रसोई की कुछ चीजों के लिए मुसीबत बन जाता है। खासकर आटा और गेहूं जैसी बुनियादी चीजें इस मौसम में नमी के कारण जल्दी खराब होने लगती हैं। थोड़ी सी भी लापरवाही से इनमें घुन या कीड़े लग सकते हैं, जिससे न सिर्फ स्वाद बिगड़ता है, बल्कि पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। ऐसे में जरूरी है कि आप बरसात में आटा और गेहूं को सुरक्षित रखने के आसान और असरदार तरीके को अपनाएं।
तो चलिए, जरूरत की खबर में बात करेंगे कि आटा और गेहूं को कीड़ों और सीलन से कैसे बचाएं। साथ ही जानेंगे कि-
- आटा कब खाने लायक नहीं रह जाता है?
- इन्हें महीनों तक सुरक्षित कैसे स्टोर कर सकते हैं?
एक्सपर्ट: डॉ. हरि प्रसाद यादव, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, मेदांता हॉस्पिटल, इंदौर
सवाल- मानसून में आटे और गेहूं में कीड़े लगने का खतरा क्यों बढ़ जाता है?
जवाब- मानसून में हवा में नमी बहुत होती है। ये नमी आटे और गेहूं में जाकर सीलन पैदा कर देती है। यही सीलन कीड़े जैसे घुन या बीटल के पनपने की वजह बनती है। अगर आटा या गेहूं सही कंटेनर में न रखा जाए तो यह और जल्दी खराब हो सकता है।
सवाल- खराब आटे से बनी रोटी खाने से क्या नुकसान हो सकता है?
जवाब- खराब आटे में फंगस या कीड़ों के छोटे अंश हो सकते हैं। इससे रोटी खाने के बाद पेट दर्द, गैस, फूड पॉइजनिंग या पाचन की परेशानी हो सकती है। अगर आटे से अजीब सी बदबू आए या उसका रंग बदल गया हो तो उसे नहीं खाना चाहिए।
सवाल- खराब आटे की पहचान कैसे कर सकते हैं?
जवाब- खराब आटे से हल्की बासी या सड़ी हुई गंध आने लगती है। उसका रंग थोड़ा भूरा या मटमैला हो सकता है। साथ ही नम या चिपचिपा लगता है। अगर आटे को छानने पर उसमें घुन या छोटे कीड़े दिखें तो वह आटा नहीं खाना चाहिए। ऐसा आटा सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
सवाल- मानसून में आटे को कैसे खराब होने से बचाएं?
जवाब- इस मौसम में एक बार में ज्यादा आटा नहीं पिसवाना चाहिए। जितना जल्दी इस्तेमाल हो सके उतना ही रखें। इसके अलावा आटे को हमेशा एयरटाइट डिब्बे में रखें, ताकि उसमें नमी न जाए। डिब्बे में नीम की सूखी पत्तियां या तेजपत्ता डालना भी फायदेमंद होता है, इससे कीड़े नहीं लगते हैं। हमेशा ध्यान रखें कि आटा निकालते समय हाथ या चम्मच बिल्कुल सूखा और साफ होना चाहिए।

सवाल- अगर गेहूं लेकर पिसवाते हैं तो बारिश के मौसम में गेहूं को कैसे स्टोर करना चाहिए?
जवाब- मानसून में गेहूं जल्दी सीलन पकड़ लेता है, इसलिए उसे स्टोर करते वक्त थोड़ी सावधानी जरूरी है। जब भी गेहूं लाएं पहले उसे 2–3 दिन धूप में अच्छी तरह फैला कर सुखा लें ताकि अंदर की नमी निकल जाए। इसके बाद उसे किसी सूखे और साफ ड्रम या डिब्बे में भरें। कोशिश करें कि डिब्बा एयरटाइट हो ताकि हवा और नमी अंदर न जा सके। डिब्बे में कुछ सूखी नीम की पत्तियां या तेजपत्ता भी डाल सकते हैं, इससे गेहूं में कीड़े नहीं लगते हैं। इसके अलावा गेहूं का डिब्बा जमीन पर सीधे न रखें, उसे लकड़ी के पटिए या स्टूल पर रखें ताकि नीचे से सीलन न लगे।
सवाल- अगर गेहूं में कीड़े लग जाएं तो क्या करें?
जवाब- बरसात में अगर गेहूं में कीड़े नजर आएं तो सीधा फेंकने की जरूरत नहीं है। कुछ आसान तरीके अपनाकर आप इसे दोबारा इस्तेमाल लायक बना सकते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- गेहूं खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखें ताकि वह जल्दी खराब न हो?
जवाब- गेहूं खरीदते वक्त ध्यान रखें कि दाने पूरी तरह सूखे हों और उनमें कोई बदबू न हो। दाने साफ-सुथरे और एक जैसे दिखने चाहिए। अगर गेहूं में नमी हो, झिल्ली जैसी परत दिखे या दाने सिकुड़े हुए हों, तो ऐसा गेहूं जल्दी खराब हो सकता है। अच्छी क्वालिटी का सूखा और चमकदार गेहूं लंबे समय तक खराब नहीं होता है।

सवाल- आटे और गेहूं के डिब्बे कितने समय बाद साफ करने चाहिए?
जवाब- आटा और गेहूं रखने वाले डिब्बों को हर 15–20 दिन में एक बार जरूर खाली करें। फिर उन्हें अच्छे से धोकर धूप में पूरी तरह सुखा लें। जब डिब्बा पूरी तरह सूख जाए, तभी उसमें नया आटा या गेहूं भरें। ऐसा करने से डिब्बे में सीलन, फफूंदी या कीड़े लगने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है और सामान ज्यादा दिन तक सुरक्षित रहता है।
सवाल- क्या प्लास्टिक के डिब्बे में आटा-गेहूं स्टोर करना सुरक्षित है?
जवाब- अगर प्लास्टिक का डिब्बा फूड-ग्रेड और एयरटाइट है, तो इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन लंबे समय के लिए स्टील या कांच के कंटेनर बेहतर माने जाते हैं, क्योंकि ये न तो गंध पकड़ते हैं और न ही नमी छोड़ते हैं। ……………………. ये खबर भी पढ़िए…
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