जरूरत की खबर- ChatGPT की सलाह ने पहुंचाया अस्पताल:  AI से कभी न लें हेल्थ एडवाइज, इन तरीकों से पाएं सही हेल्थ इंफॉर्मेशन
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जरूरत की खबर- ChatGPT की सलाह ने पहुंचाया अस्पताल: AI से कभी न लें हेल्थ एडवाइज, इन तरीकों से पाएं सही हेल्थ इंफॉर्मेशन

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15 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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आजकल इंटरनेट और AI टूल्स जैसे ChatGPT हर सवाल का जवाब देने का दावा करते हैं। लेकिन क्या ये स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह के लिए भरोसेमंद हैं? इसका जवाब है नहीं, बिल्कुल नहीं। हाल ही में अमेरिका में एक 60 साल के शख्स की कहानी ने सबको चौंका दिया। उन्होंने ChatGPT से नमक के विकल्प पूछे और उसकी सलाह पर सोडियम ब्रोमाइड इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। नतीजा ये हुआ कि उन्हें ब्रोमाइड पॉइजनिंग हो गई, जो एक रेयर और खतरनाक कंडीशन है। अस्पताल में भर्ती होने के बाद उन्हें मतिभ्रम, पैरानॉइया (दूसरों पर अकारण संदेह) और मानसिक परेशानियां हुईं।

यह घटना ‘एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन क्लिनिकल केसेस’ में पब्लिश हुई है। असल में इस शख्स ने नमक के नुकसान के बारे में पढ़ा और ChatGPT से पूछा कि क्या कोई विकल्प है। AI ने शायद इंडस्ट्रियल या दूसरे संदर्भ में ब्रोमाइड का जिक्र किया होगा, लेकिन शख्स ने इसे नमक की जगह इस्तेमाल करने का फैसला कर लिया। तीन महीने तक रोजाना ब्रोमाइड लेने से उनके ब्लड में ब्रोमाइड लेवल 1700 mg/L पहुंच गया, जो सामान्य से कई सौ गुना ज्यादा था। डॉक्टरों ने IV फ्लूइड्स और इलेक्ट्रोलाइट्स से उनका इलाज किया और तीन हफ्तों में वे ठीक हो पाए। लेकिन यह मामला चेतावनी की तरह है कि AI से हेल्थ एडवाइज लेना जानलेवा हो सकता है।

आज ‘जरूरत की खबर‘ में हम इस कहानी से सीखेंगे कि AI जैसे ChatGPT से स्वास्थ्य सलाह कभी न लें। साथ ही जानेंगे कि-

  • स्वास्थ्य जानकारी पर कहां भरोसा न करें?
  • भरोसेमंद स्वास्थ्य जानकारी के तरीके क्या हैं?
  • हेल्थ मिसइनफॉर्मेशन कैसे पहचानें?

एक्सपर्ट: डॉ. अजय नायर, सीनियर कंसल्टेंट, नारायणा मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल, जयपुर

सवाल: ChatGPT से हेल्थ एडवाइज क्यों नहीं लेनी चाहिए?

जवाब: ChatGPT जैसे AI टूल्स सामान्य जानकारी देते हैं, लेकिन वे डॉक्टर नहीं हैं। वे पुराने डेटा पर ट्रेन होते हैं और पर्सनल हेल्थ कंडीशन नहीं समझते हैं। ऊपर वाली कहानी में शख्स ने AI की सलाह को गलत समझा और ब्रोमाइड इस्तेमाल किया, जो क्लोराइड की जगह नहीं ले सकता। AI में मेडिकल ट्रेनिंग नहीं होती है। इसलिए वे गलत या अधूरी सलाह दे सकते हैं।

सवाल: हेल्थ मिसइनफॉर्मेशन क्या है और यह क्यों फैलती है?

जवाब: हेल्थ मिसइनफॉर्मेशन गलत या भ्रामक जानकारी है, जैसे कोई बिना सबूत के दावा करे कि कोई जड़ी-बूटी कैंसर ठीक कर देगी। यह सोशल मीडिया, वीडियो या ब्लॉग्स से फैलती है क्योंकि लोग भावनाओं पर खेलते हैं- डर, उम्मीद या झटपट इलाज का वादा। कमी रेगुलेशन की है, कोई भी कुछ भी पोस्ट कर सकता है। इको चैंबर्स में लोग सिर्फ अपनी मान्यताओं वाली पोस्ट्स देखते हैं, जिससे गलत जानकारी बढ़ती है। साइंस को समझना जटिल होता है, इसलिए लोग आसान लगने वाली गलत टिप्स पर भरोसा कर लेते हैं।

सवाल: किन सोर्सेस पर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पर भरोसा नहीं करना चाहिए?

जवाब: कई सोर्स ऐसे हो सकते हैं, जहां से गलत जानकारी मिल सकती है। जैसे-

सोशल मीडिया: फेसबुक, इंस्टाग्राम या टिकटॉक पर वायरल पोस्ट्स अक्सर बिना किसी सबूत के लिखे गए होते हैं। इनके ऊपर भरोसा न करें।

पर्सनल ब्लॉग्स या अनजान वेबसाइट्स: अगर लेखक कोई एक्सपर्ट नहीं है, तो भरोसा न करें। इस बात का भी ख्याल रखें कि हर किसी की हेल्थ कंडीशन अलग होती है तो उसके लिए अलग ट्रीटमेंट की जरूरत होती है।

एप्स या AI चैटबॉट्स: ChatGPT, GrokAI जैसे चैटबॉट्स सेव किए गए डेटा के आधार पर सामान्य जानकारी देते हैं, ये व्यक्तिगत हेल्थ एडवाइज नहीं देते हैं।

प्रोडक्ट सेलिंग साइट्स: जो कंपनियां कोई दवा या सप्लीमेंट बेच रही हैं, वे इनके फायदे बढ़ा-चढ़ाकर बताती हैं।

टेस्टिमोनियल्स: किसी की पर्सनल स्टोरी मददगार हो सकती है, लेकिन सबके लिए लागू नहीं होती है।

सवाल: स्वास्थ्य मिसइनफॉर्मेशन कैसे पहचानें?

जवाब: कुछ संकेत हैं- अगर कोई ‘मिरेकल क्योर’ या झटपट इलाज का वादा करे, जैसे ‘यह जड़ी-बूटी सब बीमारियां ठीक कर देगी’। लेखक की क्रेडेंशियल्स चेक करें- क्या वे डॉक्टर या रिसर्चर हैं? सबूत देखें- क्या रेफरेंस हैं पीयर-रिव्यूड स्टडीज के है। डर या इमोशनल भाषा वाले कंटेंट से सावधान रहें। अगर कोई जानकारी एकतरफा है। उसमें कोई साइड इफेक्ट या रिस्क नहीं बताया गया है तो शक करें। हमेशा जानकारी को कई सोर्सेस से क्रॉस चेक करें।

सवाल: भरोसेमंद स्वास्थ्य जानकारी जुटाने के तरीके क्या हैं?

जवाब: सही जानकारी के लिए ऑथेंटिक सोर्सेस चुनें। जैसे-

  • गवर्नमेंट वेबसाइट्स: भारत में आयुष मंत्रालय, WHO या CDC की साइट्स।
  • मेडिकल ऑर्गनाइजेशंस: अपोलो, मेयो क्लिनिक या इंडियन मेडिकल एसोसिएशन।
  • पीयर-रिव्यूड जर्नल्स: जैसे लैंसेट या एनल्स ऑफ इंटरनल मेडिसिन।
  • डॉक्टर से बात करें: हमेशा पर्सनल एडवाइज के लिए डॉक्टर से मिलें।
  • मेडलाइन प्लस या NIH जैसी साइट्स: वे अपडेटेड और रिसर्च बेस्ड होती हैं।

डॉ. अजय नायर कहते हैं, वेबसाइट का URL चेक करें- .gov या .edu वाली ज्यादा भरोसेमंद होती हैं। इस बात का ख्याल जरूर रखिए कि ये पर्सनलाइज्ड हेल्थ एडवाइज नहीं है।

सवाल: वेबसाइट की विश्वसनीयता कैसे चेक करें?

जवाब: देखें कि ‘अबाउट अस’ सेक्शन कौन चला रहा है।

  • इसका उद्देश्य क्या है?
  • लेखक कौन है- एक्सपर्ट या नहीं?
  • जानकारी कब अपडेट हुई?
  • प्राइवेसी पॉलिसी चेक करें- आपका डेटा सेफ है?
  • अगर विज्ञापन हैं, तो क्या वे जानकारी से अलग हैं?

कुकीज के बारे में पढ़ें। अगर साइट प्रोडक्ट बेच रही है, तो सावधान रहें। कॉन्टैक्ट की जानकारी होनी चाहिए- ईमेल या फोन।

सवाल: सोशल मीडिया या एप्स से स्वास्थ्य जानकारी लेते समय क्या सावधानियां बरतें?

जवाब: सोशल मीडिया पर पोस्ट फ्रेंड से हो तो भी चेक करें- ओरिजिनल सोर्स क्या है? फैक्ट-चेकिंग साइट्स जैसे स्नोप्स इस्तेमाल करें। एप्स डाउनलोड करने से पहले देखें- कौन बनाया है, रिव्यूज क्या हैं? अगर एप पर्सनल डेटा मांगती है, तो सोचें- जरूरी है? हमेशा डॉक्टर से कन्फर्म करें। पब्लिक वाई-फाई पर संवेदनशील जानकारी न शेयर करें।

सवाल: अगर स्वास्थ्य जानकारी गलत निकली तो क्या करें?

जवाब: अगर कोई सलाह से नुकसान हुआ, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें। मिसइनफॉर्मेशन रिपोर्ट करें- सोशल मीडिया पर फ्लैग करें या WHO जैसी एजेंसी को बताएं। खुद को दोष न दें, बल्कि सीख लें। परिवार और दोस्तों को जागरूक करें। भारत में साइबर फ्रॉड के लिए हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें अगर कोई स्कैम हो।

सवाल: बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य संबंधी जानकारी कैसे सेफ रखें?

जवाब: बुजुर्ग अक्सर ऑनलाइन स्कैम का शिकार होते हैं। उन्हें सिखाएं- अनजान लिंक्स न खोलें, स्ट्रॉन्ग पासवर्ड यूज करें, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन ऑन रखें। हेल्थ बुक या न्यूज पढ़ते समय सोर्स चेक करें। डॉक्टर से रेगुलर चेकअप करवाएं। अगर कोई स्कैम लगे तो पुलिस की साइबर सेल में रिपोर्ट करें।

सवाल: हेल्थ एडवाइज लेने का सबसे अच्छा तरीका क्या है?

जवाब: सबसे अच्छा है डॉक्टर या हेल्थकेयर प्रोफेशनल से मिलना। वे आपकी उम्र, हिस्ट्री और स्थिति देखकर सलाह देते हैं। ऑनलाइन जानकारी सिर्फ शुरुआत के लिए इस्तेमाल करें, फैसले के लिए नहीं। किताबें पढ़ें लेकिन अपडेटेड और रिव्यूड किताबें पढ़ें। हेल्थ एप्स यूज करें लेकिन ट्रस्टेड ऑर्गनाइजेशंस वाले ऐप यूज करें। याद रखें, कोई भी जानकारी डॉक्टर की जगह नहीं ले सकती है।

हमें सीखना चाहिए कि हमारी हेल्थ कोई खेल नहीं है। AI या इंटरनेट सलाह से पहले सोचें, चेक करें और डॉक्टर से पूछें। सही जानकारी से ही स्वस्थ जीवन संभव है। अगर परिवार में कोई गलत टिप्स फॉलो कर रहा है तो उन्हें तुरंत रोकें।

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