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जिम से किचन तक पहुंचा प्रोटीन, सप्लीमेंट 230% बढ़े: दूध, दही, पनीर, स्नैक्स, ब्रेड, पेय पदार्थ अब प्रोटीन के नाम पर बेच रहीं कंपनियां

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मुंबई1 घंटे पहले

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एनआईक्यू के अनुसार 37% भारतीय अगले 12 महीनों में डाइट में प्लांट-बेस्ड प्रोटीन बढ़ाना चाहते हैं। - प्रतीकात्मक फोटो - Dainik Bhaskar

एनआईक्यू के अनुसार 37% भारतीय अगले 12 महीनों में डाइट में प्लांट-बेस्ड प्रोटीन बढ़ाना चाहते हैं। – प्रतीकात्मक फोटो

देश में प्रोटीन अब सिर्फ जिम और फिटनेस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रोजमर्रा की ग्रॉसरी का हिस्सा बन रहा है। मार्केट रिसर्च फर्म रेडसीर के मुताबिक, 80% जेन जी (युवा पीढ़ी) प्रोटीन को जरूरी मानती है। 2024 से 2025 के बीच क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर प्रोटीन सप्लीमेंट के विकल्प 230% बढ़े।

वहीं, कंज्यूमर इंटेलिजेंस फर्म एनआईक्यू (पुराना नाम नीलसनआईक्यू) के अनुसार 37% भारतीय अगले 12 महीनों में डाइट में प्लांट-बेस्ड प्रोटीन बढ़ाना चाहते हैं। दूध, दही, पनीर, स्नैक्स और बेवरेज में प्रोटीन अब प्रमुख मार्केटिंग दावे के रूप में उभर रहा है।

आम पैकेट से दोगुना महंगा बिक रहा हाई-प्रोटीन का ठप्पा लगा खाना बाजार पर पूरी तरह हावी है। कंपनियां दूध, दही, पनीर, स्नैक्स, ब्रेड, सीरियल्स और पेय पदार्थों को प्रोटीन के नाम पर ही बेच रही हैं। अब मामला सिर्फ सेहत की जरूरत का नहीं, बल्कि ग्राहकों के लिए जेब ढीली करने की मजबूरी बन गया है। नियमित एक्सरसाइज करने वाले जेन जी में से 40% लोग प्रोटीन के वैकल्पिक स्रोतों को पसंद करते हैं।

बाजार में सामान्य और हाई-प्रोटीन उत्पादों की कीमतों में बहुत बड़ा अंतर है। दोनों की न्यूट्रिशन वैल्यू, सामग्री, सर्विंग साइज और कुल प्रोटीन मात्रा एक उत्पाद से दूसरे उत्पाद में काफी अलग होती है। किसी भी उत्पाद पर लगा हाई-प्रोटीन का लेबल बेहतर गुणवत्ता की पक्की गारंटी नहीं देता है। क्विक-कॉमर्स के कारण विशेषज्ञ न्यूट्रिशन दुकानों के बजाय अब राशन और स्नैक्स के साथ ही ये उत्पाद घर पहुंच रहे हैं। अब लोग ग्रीक योगर्ट और प्रोटीन बार जैसी चीजें स्वाद के लिए नहीं, बल्कि सेहत और ताकत के लिए खरीद रहे हैं। व्हे या जानवरों से मिलने वाले प्रोटीन के अलावा अब प्लांट-बेस्ड प्रोटीन की मांग तेजी से बढ़ रही है। पारंपरिक दालों और फलियों को कंपनियां नए पैक्ड फॉर्मेट में पेश कर रही हैं।

ध्यान रखना जरूरी, थाली में पहले से मौजूद हैं प्रोटीन के पारंपरिक, बेहतर स्रोत

भारतीय आहार में दालें, दूध, दही, पनीर, अंडे, मछली, मीट, सोया, नट्स और बीज हमेशा से प्रमुख स्रोत के रूप में शामिल रहे हैं। आईसीएमआर-एनआईएन डाइटरी गाइडलाइन्स 2024 के अनुसार एक स्वस्थ व्यक्ति के लिए प्रति किलो वजन पर 0.83 ग्राम प्रोटीन रोजाना लेना जरूरी माना गया है। यह संस्था हमेशा संतुलित और विविध आहार पर जोर देती है और आम जनता के लिए प्रोटीन सप्लीमेंट्स को बिल्कुल आवश्यक नहीं मानती है।



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