जीवन के उत्तरार्ध में स्वतंत्र और सम्मानजनक जीवन की तलाश:  80% लोग खुद चुन रहे रिटायरमेंट होम, मिल रहीं 5 सितारा होटल जैसी सुविधाएं
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जीवन के उत्तरार्ध में स्वतंत्र और सम्मानजनक जीवन की तलाश: 80% लोग खुद चुन रहे रिटायरमेंट होम, मिल रहीं 5 सितारा होटल जैसी सुविधाएं

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गुरुग्राम की एक सीनियर लिविंग कम्युनिटी (रिटायरमेंट होम) में प्रवेश करते ही किसी रिसॉर्ट जैसा महसूस होता है। हरियाली से भरा सुव्यवस्थित गार्डन, साफ-सुथरे रास्तों पर टहलते वरिष्ठ नागरिक, हल्की धूप और सुकून भरा वातावरण, यहां उम्र नहीं, जीवनशैली दिखती है। अंदर एक बड़े हॉल में कुछ बुजुर्ग जुम्बा कर रहे हैं, तो कुछ पुराने गीतों की महफिल में खोए हैं। कोई कैराओके पर गा रहा है, तो कोई पेंटिंग में अपनी रचनात्मकता उकेर रहा है। डाइनिंग हॉल में पांच सितारा होटल जैसी सुविधाएं हैं, जहां संतुलित और पौष्टिक भोजन न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स की सलाह से तैयार होता है।
एक वरिष्ठ नागरिक बताते हैं, ‘बेटा अमेरिका में है, बेटी लंदन में। लेकिन यहां हम अकेले नहीं हैं, अपने जैसे लोगों के बीच हैं, यही सबसे बड़ी खुशी है।’ एसोसिएशन ऑफ सीनियर लिविंग और पीडब्ल्यू की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हर दिन करीब 19,500 लोग 60 वर्ष की आयु में प्रवेश कर रहे हैं। बड़ी आबादी अकेले या बच्चों पर निर्भर रहने के बजाय ऐसे समुदाय चुन रही है जहां उन्हें सुरक्षा, मेडिकल सपोर्ट, वेलनेस और सामाजिक जुड़ाव एक साथ उपलब्ध हों। इन लग्जरी स्पेस में न्यूट्रिशनिस्ट द्वारा सुझाए पौष्टिक मेनू वाले रेस्तरां, फिटनेस सेंटर, हेल्थकेयर, स्विमिंग पूल, रिक्रिएशन सेंटर पर्सनल केयर जैसी सुविधाएं मिलती हैं। कारण – छोटे परिवार, बच्चे बाहर रहने से बदलाव वेदांता सीनियर लिविंग की डायरेक्टर श्रेया आनंद कहती हैं, ‘भारत में सीनियर लिविंग ‘वृद्धाश्रम’ की छवि से निकलकर एक आधुनिक, लाइफस्टाइल-ड्रिवन सेक्टर बन चुका है। करीब 80% लोग खुद के लिए रिटायरमेंट होम चुनते हैं, जो इस धारणा को चुनौती देता है कि परिवार बुजुर्गों को इन समुदायों में भेजते हैं। 40–45 वर्ष की उम्र के लोग भी सीनियर लिविंग में रुचि ले रहे हैं। परिवार छोटे हो रहे हैं, बच्चे विदेश या दूसरे शहरों में रह रहे हैं, जीवन प्रत्याशा बढ़ रही है, ऐसे में सम्मान व आराम के साथ जीने के लिए लोग लग्जरी सीनियर लिविंग स्पेस चुन रहे हैं। आर्थिक रूप से सुरक्षित पीढ़ी अच्छा अनुभव भी चाहती है वेल्थ मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म पोलारिस फिनमार्ट के को-फाउंडर संदीप शुक्ला के मुताबिक, ‘सीनियर होती जेन एक्स आर्थिक रूप से सुरक्षित और संपन्न है। ये अपनी उपलब्धियों और आकांक्षाओं के अनुरूप बढ़िया रिटायरमेंट लाइफस्टाइल चाहते हैं। लग्जरी सीनियर लिविंग में वे 60 हजार से 1.5 लाख रुपए प्रति माह खर्च कर रहे हैं। संगठित प्रोजेक्ट्स में 90% तक ऑक्यूपेंसी देखी जा रही है कुछ सरकारें भी लग्जरी सीनियर स्पेस बना रही हैं। मध्यप्रदेश में सरकारी पेड सीनियर लिविंग में 40-50 हजार रु./माह में आवास, भोजन, हेल्थकेयर जैसी सुविधाएं मिलतीं हैं। मार्केट भी तैयार – डेवलपर्स की बढ़ी दिलचस्पी, रियल एस्टेट में एक विशेष एसेट क्लास बन रही हीरानंदानी कम्युनिटीज के चेयरमैन डॉ. निरंजन हीरानंदानी कहते हैं, ‘भारत में अब तक बुजुर्गों की देखभाल मुख्य रूप से परिवारों द्वारा की जाती रही है। लेकिन शहरीकरण और न्यूक्लियर फैमिली में वृद्धि़ से, अब बुजुर्ग सामुदायिक जुड़ाव के लिए प्रोफेशनली मैनेज्ड कम्युनिटीज की ओर बढ़ रहे हैं। इस उभरते ट्रेंड को पहचानते हुए, डेवलपर्स रियल एस्टेट के भीतर एक विशेष एसेट क्लास, ‘सीनियर लिविंग बना रहे हैं। इसमें हॉस्पिटैलिटी, हेल्थकेयर और रेसीडेंशियल डेवलपमेंट का संयोजन है।’ 2050 में 20% आबादी बुजुर्गों की एसोसिएशन ऑफ सीनियर लिविंग इंडिया (असली) के चेयरमैन राजागोपाल जी कहते हैं, ‘एक अनुमान के अनुसार 2050 तक देश में 34.6 करोड़ बुजुर्ग होंगे, जो कुल आबादी का 20% से अधिक है। असली की रिपोर्ट के मुताबिक देशभर में 20,000 से सीनियर लिविंग आवासीय इकाइयां मौजूद हैं। इस क्षेत्र में दक्षिण भारत की मजबूत पकड़ है, जो कुल बाजार का लगभग 60% हिस्सा रखता है।’ चुनौतियां भी कम नहीं – सीनियर लिविंग का यह मॉडल मुख्य रूप से संपन्न वर्ग तक सीमित है। अधिक लोगों तक ऐसे विकल्प पहुंचाने के लिए सरकारी पहल, सब्सिडी, इंश्योरेंस और बेहतर रिटायरमेंट प्लानिंग की जरूरत है।



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