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भारत में लगातार बढ़ता तापमान सिर्फ गर्मी का एहसास नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचती गर्मी में शरीर तेजी से पानी खोता है, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
नई मेडिकल स्टडीज में पाया गया है कि गर्मी और पानी की कमी से हीट स्ट्रोक, किडनी की समस्या और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो सकती हैं। ऐसे में जरूरी है कि डिहाइड्रेशन के लक्षण, जोखिम और बचाव के तरीकों को समझें। कम पानी पीने से किडनी पर दबाव बढ़ता है डायबिटीज – शरीर में पानी कम होने से खून में शुगर का लेवल बढ़ सकता है। इससे हाइपरग्लाइसीमिया यानी हाई शुगर का खतरा बढ़ता है। यूटीआई – अगर आप पर्याप्त पानी नहीं पीते, तो बैक्टीरिया शरीर से बाहर नहीं निकल पाते और यूरिन इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। लो ब्लड प्रेशर – पानी की कमी से खून में वॉल्यूम कम हो जाता है। इससे चक्कर, कमजोरी और बेहोशी की स्थिति हो सकती है। किडनी पर असर – कम पानी पीने से यूरिन गाढ़ा हो जाता है। इससे किडनी पर दबाव बढ़ता है व किडनी स्टोन का खतरा रहता है। त्वचा की समस्या – पानी की कमी से आने वाली ड्रायनेस से पसीना कम होता है। इससे त्वचा साफ होने में दिक्कत होती है। माइग्रेन – अगर आपको माइग्रेन है, तो डिहाइड्रेशन न्यूरोलॉजिकल ट्रिगर के रूप में काम कर के माइग्रेन अटैक को बढ़ा सकता है। शुरुआती लक्षण, जिन्हें नज़रअंदाज़ न करें डिहाइड्रेशन में बार-बार प्यास लगना, मुंह सूखना, गहरे रंग का या कम मात्रा में पेशाब आना, ज्यादा थकान, कमजोरी महसूस होना, चक्कर आना, सिरदर्द या सिर भारी लगना शामिल है। इसके हाई रिस्क ग्रुप्स में बच्चे, बुजुर्ग, तेज धूप में काम करने वाले लोग और ध्यान लगाने में परेशानी या भ्रम भी इसके संकेत हो सकते हैं। सही सुरक्षा के लिए कुछ आसान आदतें अपनाएं सही सुरक्षा के लिए दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहें और नारियल पानी, छाछ और नींबू पानी, ओआरएस जैसे ड्रिंक लें। तेज धूप से बचें, ढीले सूती कपड़े पहनें और तरबूज, खीरा जैसे पानी वाले फल खाएं, ताकि शरीर हाइड्रेटेड रहे।
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