डॉ. राम चरण का कॉलम:  एक मैनेजर और एक अच्छे लीडर में क्या अंतर होता है?
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7 घंटे पहले

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डॉ. राम चरण विश्व विख्यात लेखक और कई शीर्ष कम्पनियों के सलाहकार - Dainik Bhaskar

डॉ. राम चरण विश्व विख्यात लेखक और कई शीर्ष कम्पनियों के सलाहकार

हर मैनेजर बहुत अच्छा लीडर भी बनना चाहता है। लेकिन इन दोनों में अंतर है। आप जानते हैं- क्या? आज की दुनिया में इसका जवाब बहुत सरल है। एक बहुत अच्छा लीडर बदलावों को पहले ही देख लेता है और उन पर विवेकपूर्ण ढंग से काम करता है। मैनेजर प्रतिक्रिया देता है; लीडर पूर्वानुमान लगा लेता है।

हम एआई और अभूतपूर्व गति के युग में जी रहे हैं। हर दिन नए घटनाक्रम सामने आते हैं। घोषणाएं होती हैं। सोशल मीडिया तरह-तरह के विचारों से भर जाता है। शोर बना रहता है। लेकिन आने वाले कल के विनर्स वे नहीं होंगे, जो इस शोर पर प्रतिक्रिया देते हैं। वे वो होंगे, जो एक्शंस को देखते हैं, तथ्यों को जोड़ते हैं और उनके आधार पर एक स्पष्ट विचार-प्रक्रिया निर्मित करते हैं।

अधिकांश लोग बदलावों को सुर्खियों, भाषणों और सोशल मीडिया रिएक्शंस के जरिये समझते हैं। यह एक भूल है। घोषणाएं भ्रामक हो सकती हैं। ओपिनियन भटका सकते हैं। प्रतिक्रियाएं तो अकसर भावनात्मक ही होती हैं। लेकिन एक्शंस यानी ठोस कार्रवाइयां अलग होती हैं। उन्हें जांचा-परखा जा सकता है। वे मंशाओं को उजागर करती हैं।

वे समय के साथ सामने आती हैं और हमें बताती हैं कि कोई व्यक्ति, कम्पनी या देश किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। हर मैनेजर, लीडर और व्यक्ति को एक आदत विकसित करनी चाहिए : वास्तविक कार्रवाइयों की पहचान करना और उन्हें शोर से अलग करना।

यह वो अनुशासन है, जो सब कुछ बदल देता है। यह वो अभ्यास है, जिसे मैं अपनाने के लिए प्रेरित करता हूं। समय के साथ कार्रवाइयों का अवलोकन करें। किसी एक क्षण को न देखें, बल्कि क्रम को देखें। उन्हें एक सूत्र में पिरोएं।

फिर स्वयं से पूछें : यह पैटर्न क्या संकेत देता है? आगे क्या हो सकता है? एक्शंस को जोड़कर एक सुसंगत लाइन-ऑफ-थिंकिंग बनाने की यह क्षमता आज के समय में लीडरशिप के सबसे शक्तिशाली कौशलों में से एक है। और आप इसका अभ्यास रोज कर सकते हैं।

रोज केवल दस मिनट एक्शंस का अवलोकन करने और तथ्यों को जोड़ने (कनेक्टिंग डॉट्स) में लगाएं। समय के साथ इसका प्रभाव बढ़ता जाता है। आपका माइंड अधिक तेज होता है, आपके निर्णयों में सुधार आता होता है और आपकी अंतर्दृष्टियां विकसित होती हैं- ठीक वैसे ही जैसे बैंक खाते में चक्रवृद्धि ब्याज। छोटे-छोटे दैनिक निवेश असाधारण परिणाम देते हैं।

पूर्वानुमान कोई जादू नहीं है, यह एक मानवीय कौशल है। कुछ लोग मानते हैं कि भविष्य का अनुमान लगाने के लिए विशेष प्रतिभा की आवश्यकता होती है। ऐसा नहीं है। मनुष्य स्वाभाविक रूप से पूर्वानुमान लगा सकते हैं।

जब आप किसी मित्र से बातचीत करते हैं, तो अकसर उसके अगला शब्द कहने से पहले ही उसका अनुमान लगा लेते हैं। जब आप क्रिकेट मैच देखते हैं, तो मैदान में निर्मित होने वाली स्थिति को पढ़ते हैं और आगे क्या होगा, इसका कयास लगा लेते हैं। हमारा मस्तिष्क इसी तरह से बना है। यही स्वाभाविक क्षमता एआई का आधार भी है। एआई भी पैटर्न्स का अवलोकन करता है और पूर्वानुमान लगाता है। आप भी कर सकते हैं।

आप ऑब्जर्व करते हैं। आप पूर्वानुमान लगाते हैं। यदि आप गलत होते हैं, तो एडजस्ट करते हैं। अगली बार आप अधिक सटीक होते हैं। यही सीखने की प्रक्रिया है। इसी तरह से लीडर्स बनते हैं। अपने क्षेत्र में किसी भी प्रमुख लीडर, बड़ी कंपनी या किसी महत्वपूर्ण डेवलपमेंट को देखें।

भावनात्मक प्रतिक्रिया न दें। किसी एक खबर के आधार पर राय न बनाएं। इसके बजाय, पिछले पांच या छह महीनों में लिए गए एक्शंस को देखें। उन्हें क्रम में रखें। फिर तीन प्रश्न पूछें : सबसे पहले कौन-से कार्य हुए? उसके बाद क्या हुआ? कौन-से पैटर्न उभर रहे हैं? फिर यह अनुमान लगाने का प्रयास करें कि आगे क्या हो सकता है। आप गलत हो सकते हैं- यह पूरी तरह स्वीकार्य है। महत्वपूर्ण यह है कि आप अपने मानसिक कौशल का निर्माण कर रहे हैं। हर अभ्यास इसे और मजबूत बनाता है।

आज के दौर में अगर आप अपने संस्थान के बाहर क्या हो रहा है, उसे समझ नहीं पाते, तो अनिश्चितता से नहीं निपट सकते। आप हमेशा प्रतिक्रिया करते रहेंगे, नेतृत्व नहीं कर पाएंगे। अच्छे लीडर्स एक साथ दो जिम्मेदारियां निभाते हैं। उनकी एक नजर आंतरिक क्रियान्वयन पर होती है- आज के काम को सही ढंग से पूरा करना।

दूसरी नजर क्षितिज पर होती है- जो आने वाला है, उसे पहले से समझना। सूचना, डेटा और अंतर्दृष्टि अब चौबीसों घंटे उपलब्ध हैं। एडवांटेज उसी को मिलता है, जो उन्हें देखने, जोड़ने और समझने की कला में माहिर हो।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)

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