तुलसी पूजा का पर्व आज:  घर में उत्तर दिशा में लगाना चाहिए तुलसी का पौधा, भगवान विष्णु और बाल गोपाल को तुलसी के बिना न लगाएं भोग
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तुलसी पूजा का पर्व आज: घर में उत्तर दिशा में लगाना चाहिए तुलसी का पौधा, भगवान विष्णु और बाल गोपाल को तुलसी के बिना न लगाएं भोग

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11 घंटे पहले

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आज देवउठनी एकादशी। ये भगवान विष्णु के साथ तुलसी की पूजा का महापर्व है। कार्तिक शुक्ल एकादशी पर तुलसी और शालीग्राम की विवाह कराया जाता है। तुलसी को पूजनीय और पवित्र माना जाता है, इसलिए इसे घर के आंगन में लगाया जाता है। वास्तु शास्त्र के मुताबिक, घर में तुलसी हो तो कई वास्तु दोष शांत हो जाते हैं। तुलसी विवाह के अवसर जानिए इस पौधे से जुड़ी खास बातें…

  • उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा कहते हैं कि तुलसी के पौधे लिए घर की उत्तर दिशा सबसे अच्छी होती है। दक्षिण दिशा में तुलसी लगाने से बचना चाहिए।
  • घर की उत्तर दिशा में तुलसी नहीं लगा पा रहे हैं तो पूर्व दिशा में लगा सकते हैं। तुलसी के साथ ही एक शालीग्राम प्रतिमा भी रखनी चाहिए। मान्यता है कि जिस घर में तुलसी के साथ शालीग्राम है, वो तीर्थ के समान पवित्र है। ऐसी जगह पर सभी देवी-देवता वास करते हैं।
  • रोज सुबह स्नान के बाद तुलसी को जल चढ़ाना चाहिए, परिक्रमा करनी चाहिए। सूर्यास्त के बाद तुलसी के पास दीपक जलाना चाहिए, लेकिन ध्यान रखें शाम को इस पौधे को स्पर्श नहीं करना चाहिए।
  • भगवान विष्णु और बाल गोपाल को भोग लगाते समय तुलसी के पत्ते जरूर साथ में रखें। तुलसी के बिना विष्णु जी और उनके अवतार भोग स्वीकार नहीं करते हैं, ऐसी मान्यता है।
  • आयुर्वेद में तुलसी का इस्तेमाल कई तरह की औषधियों में किया जाता है। नियमित रूप से तुलसी के पत्तों का सेवन करने से हमारा इम्यून सिस्टम सुधरता है।
  • शिव जी और गणेश जी की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। गणेश जी और तुलसी ने एक-दूसरे को शाप दिया था, इस वजह से गणेश पूजा में तुलसी नहीं रखी जाती है। भगवान शिव ने तुलसी के पूर्व जन्म में उसके पति का वध किया था, इस कारण तुलसी ने खुद को शिव पूजा के लिए वर्जित कर दिया था।
  • वास्तु की मान्यता है कि तुलसी से घर के कई दोष दूर होते हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी इसका शुभ असर होता है। तुलसी की महक से घर के आसपास के वातावरण में मौजूद हानिकारक सूक्ष्म कीटाणु नष्ट होते हैं।
  • घर में तुलसी का सूखा पौधा नहीं रखना चाहिए। अगर पौधा सूख जाए तो बहती नदी या तालाब में प्रवाहित कर सकते हैं। तुलसी के पीले और खराब पत्तों को भी हटा देना चाहिए। नियमित रूप से तुलसी की देखभाल करनी चाहिए।
  • तुलसी के पत्ते एकादशी, रविवार और सूर्य या चंद्र ग्रहण समय तोड़ने से बचना चाहिए। अगर इन तिथियों पर तुलसी की जरूरत हो तो तुलसी के पास नीचे गिरे हुए पत्तों को उठाएं और उन्हें धोकर पूजा में इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • अनावश्यक रूप से तुलसी के पत्ते कभी नहीं तोड़ना चाहिए। बिना काम से तुलसी के पत्तों को तोड़ना अशुभ माना जाता है। अकारण इसके पत्तों को तोड़ना तुलसी का पौधा उखाड़ने के समान है।

तुलसी पूजा मंत्र

तुलसी पूजा करते समय तुलसी नामाष्टक मंत्र का जप करना चाहिए।

तुलसी नामाष्टक मंत्र – वृंदा वृंदावनी विश्वपूजिता विश्वपावनी। पुष्पसारा नंदनीय तुलसी कृष्ण जीवनी।।

एतनामांष्टक चैव स्त्रोतं नामर्थं संयुतम। य: पठेत तां च सम्पूज्य सौश्रमेघ फलंलभेत।।

तुलसी के पास दीपक जलाएं। तुलसी को गंध, फूल, लाल चुनरी अर्पित करें। फलों का भोग लगाएं। तुलसी के सामने बैठकर तुलसी की माला से इस मंत्र का जप 108 बार करें।

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