दिल्ली में दुकान-दफ्तरों में नाईट शिफ्ट कर सकेंगी महिला कर्मचारी:  राज्य सरकार ने परमिशन दी; लिखित रजामंदी जरूर, 9 घंटे से ज्यादा की शिफ्ट नहीं होगी
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दिल्ली में दुकान-दफ्तरों में नाईट शिफ्ट कर सकेंगी महिला कर्मचारी: राज्य सरकार ने परमिशन दी; लिखित रजामंदी जरूर, 9 घंटे से ज्यादा की शिफ्ट नहीं होगी

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नई दिल्ली1 घंटे पहले

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कर्मचारी को ओवरटाइम पर सामान्य वेतन का दोगुना भुगतान, साप्ताहिक कार्य की अधिकतम सीमा 48 घंटे तय की गई। - Dainik Bhaskar

कर्मचारी को ओवरटाइम पर सामान्य वेतन का दोगुना भुगतान, साप्ताहिक कार्य की अधिकतम सीमा 48 घंटे तय की गई।

दिल्ली में महिला कर्मचारी अब दुकानों और अन्य वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों में नाइट शिफ्ट में काम कर सकेंगी। दिल्ली सरकार ने गुरुवार को अधिसूचना जारी कर इसकी औपचारिक अनुमति दे दी है। हालांकि, इसके लिए महिला कर्मचारियों की लिखित सहमति अनिवार्य होगी।

नोटिफिकेशन में कहा गया है कि हर कर्मचारी को ओवरटाइम पर सामान्य वेतन का दोगुना भुगतान मिलेगा और साप्ताहिक कार्य की अधिकतम सीमा 48 घंटे तय की गई है। इसके साथ ही सभी प्रतिष्ठानों में आंतरिक शिकायत समिति (ICC) बनाना भी अनिवार्य किया गया है।

महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति देने के प्रस्ताव को इस साल की शुरुआत में उपराज्यपाल वी. के. सक्सेना ने मंजूरी दी थी। इसके बाद श्रम विभाग ने दिल्ली दुकानदार एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, 1954 में दो नए प्रावधान जोड़े हैं, जो महिलाओं की नियुक्ति और उनके कार्य की शर्तों से संबंधित हैं।

जिम्मेदारों को इन बातों का रखना होगा ख्याल

  • महिला कर्मचारियों को नाइट शिफ्ट में तभी लगाया जा सकेगा जब वे इसके लिए लिखित रूप से सहमत हों।
  • कोई भी कर्मचारी किसी भी दिन 9 घंटे से अधिक (भोजन-विश्राम सहित) और सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम नहीं कर सकेगा।
  • लगातार 5 घंटे से ज्यादा काम करवाने की अनुमति नहीं होगी।
  • नाइट शिफ्ट या ओवरटाइम करने वाले कर्मचारियों के लिए सुरक्षा, परिवहन और उपयुक्त सुविधाओं की व्यवस्था नियोक्ता को करनी होगी।
  • ओवरटाइम का भुगतान दोगुना वेतन दर पर किया जाएगा।
  • शिफ्ट प्रणाली इस तरह बनाई जाएगी कि किसी भी कर्मचारी को सिर्फ नाइट शिफ्ट में ही काम करने के लिए मजबूर न किया जाए।

सुरक्षा और निगरानी के लिए भी प्रावधान नोटिफिकेशन में कहा गया है कि हर प्रतिष्ठान जहां महिलाएं कार्यरत होंगी, वहां यौन उत्पीड़न रोकथाम कानून, 2013 के तहत आंतरिक शिकायत समिति (ICC) गठित की जाएगी।

साथ ही ऐसे सभी वर्क प्लेस में सीसीटीवी लगाए जाएंगे और उनकी फुटेज कम से कम एक महीने तक सेव रखी जाएगी। जरूरत पड़ने पर यह रिकॉर्डिंग मुख्य निरीक्षक (शॉप्स विभाग) को प्रस्तुत करनी होगी।

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