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दिल्ली के उपराज्यपाल टी.एस. संधू ने शुक्रवार को आयोजित मार्शल ऑफ द एयर फोर्स मेमोरियल लेक्चर में भारत के महान वायुसेना अधिकारी और दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल मार्शल ऑफ द एयर फोर्स अर्जन सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि जिस पद को अर्जन सिंह जैसे महान व्यक्तित्व ने सुशोभित किया हो, उसी पद पर सेवा करना सम्मान के साथ-साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। संधू ने कहा कि अर्जन सिंह का पूरा जीवन राष्ट्रसेवा, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक रहा। उनके आदर्श आज भी हर लोकसेवक और सैन्य अधिकारी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास के कई महत्वपूर्ण पड़ावों में अर्जन सिंह की भूमिका निर्णायक रही। विशेष रूप से 1965 के भारत-पाक युद्ध के दौरान उनके नेतृत्व में भारतीय वायुसेना ने अपनी क्षमता और साहस का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। उपराज्यपाल ने बताया कि अर्जन सिंह की असाधारण सेवाओं के लिए उन्हें पहले पद्म विभूषण और बाद में देश के इतिहास में पहली बार मार्शल ऑफ द एयर फोर्स की सर्वोच्च सैन्य रैंक से सम्मानित किया गया। सैन्य नेतृत्व से प्रशासन तक निभाई राष्ट्रसेवा की जिम्मेदारी संधू ने कहा कि सैन्य सेवा के बाद अर्जन सिंह ने राजनयिक, प्रशासक और वर्ष 1989-90 में दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में भी देश की सेवा की। उनका सैन्य नेतृत्व से सार्वजनिक प्रशासन तक का सफर इस बात का उदाहरण है कि राष्ट्रसेवा किसी एक पद या संस्था तक सीमित नहीं होती। उन्होंने हर जिम्मेदारी को ईमानदारी, विनम्रता और समर्पण के साथ निभाया। सार्वजनिक जीवन का उद्देश्य सेवा और कर्तव्य उपराज्यपाल ने कहा कि मार्शल अर्जन सिंह का जीवन यह संदेश देता है कि सार्वजनिक जीवन का वास्तविक उद्देश्य पद प्राप्त करना नहीं, बल्कि कर्तव्य का निर्वहन और लोगों की निस्वार्थ सेवा करना है। उन्होंने कहा कि अर्जन सिंह के आदर्शों को अपने आचरण और संस्थागत कार्यसंस्कृति में अपनाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। देखें फोटो…
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