दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता के साथ आर पी सिंह।
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आर.पी. सिंह ने दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता से मुलाकात की है और उन्हें एक पत्र भी लिखा है। उन्होंने दविंदर पाल सिंह भुल्लर के मामले की पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार मामले को सेंटेंस रि
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दिल्ली में हुए बम धमाकों के पीछे के दोषी दविंदर पाल सिंह भुल्लर की अब मानसिक हालत ठीक नहीं है। वे ना तो किसी को पहचानते हैं और ना ही किसी से बातचीत करते हैं।
जानें आर.पी. सिंह ने क्या लिखा पत्र में
- दविंदर पाल सिंह भुल्लर पिछले 14 सालों से गंभीर मानसिक बीमारी (स्किजोफ्रेनिया) से जूझ रहे हैं और उनका निरंतर मनोचिकित्सकीय इलाज चल रहा है। उन्हें 2015 में दिल्ली की तिहाड़ जेल से अमृतसर के सरकारी मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के साइकेट्री डिपार्टमेंट में स्थानांतरित किया गया था, जहां वे मेडिकल सुपरविजन में हैं।
- सुप्रीम कोर्ट ने उनकी गंभीर बीमारी और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उनकी फांसी की सजा को मानवीय आधारों पर उम्रकैद में तब्दील किया ।
- दिल्ली हाईकोर्ट ने विशेष रूप से निर्देश दिए थे कि भुल्लर केस की समीक्षा सेंटेंस रिव्यू बोर्ड द्वारा की जाए और रिव्यू बोर्ड कार्रवाई की रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जाए।
- आर.पी. सिंह ने पत्र में कहा है कि भुल्लर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए और कोर्ट के आदेशों की पालना में उनका केस रिव्यू बोर्ड के सामने जल्दी से रखा जाए ताकि पुनर्विचार किया जा सके।
- उन्होंने आग्रह किया कि लंबी कैद और लगातार बीमारी के चलते अब आगे की सजा सिर्फ तकलीफ बढ़ाएगी, ऐसे में इंसानियत और न्याय का तकाजा है कि भुल्लर के मामले में संवेदनशीलता, सहानुभूति और मानवता के आधार पर पुनर्विचार सुनिश्चित हो।
दिल्ली सीएम को लिखा गया खत

जानिए कौन हैं दविंदर पाल सिंह भुल्लर
दविंदर पाल सिंह भुल्लर एक पूर्व इंजीनियरिंग प्रोफेसर हैं, जिनका जन्म 1965 में पंजाब में हुआ था। उन्हें 1993 में दिल्ली में हुए बम धमाके के लिए दोषी ठहराया गया, जिसमें 9 लोगों की मौत और 30 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
इस हमले का निशाना कांग्रेस नेता एमएस बिट्टा थे। भुल्लर को 2001 में टाडा कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई, लेकिन 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य आधार पर सजा को उम्रकैद में बदल दिया।
वे पिछले 14 वर्षों से सिजोफ्रेनिया जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं और अमृतसर के अस्पताल में जहरे इलाज हैं। लंबे समय से उनकी रिहाई या संवेदनशील पुनर्विचार की मांग विभिन्न संगठनों और परिजनों द्वारा की जा रही है।








