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नई दिल्ली। हेड कांस्टेबल दिनेश यादव ने बताया मालवीय नगर हादसे में पीसीआर कॉल होने के बाद वे अपने सहयोगी रामपाल के साथ मौके पर पहुंचे। रास्ते में जाम लगने के बाद वह करीब 250 मीटर तक दौड़कर मौके पर पहुंचे। मौके पर पहुंचने के बाद वे सीढ़ियों की मदद से छत तक पहुंचे और मुक्का मार मार कर उन्होंनें खिड़कियों के शीशे तोड़े। इस दौरान उनके कांच घुस गया। खून से लथपथ होने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और इमारत में फंसे पांच लोगों को अकेले सुरक्षित बाहर निकाला। उनके पैर में भी कांच लगा था। इस दौरान कुछ लोग छत से भी नीचे कूदे थे। उन्हें बचाने के दौरान तारों में लगी आग की वजह से रामपाल भी घायल हुए। उन्होंने आगे बताया एक इमारत में एक नाइजीरियन महिला अपनी बेटी के साथ थी। उन्होंने बाथरूम की खिड़की से बाहर निकाला। खिड़की बाथरूम में काफी ऊपर थी। महिला ने एक बार उन्हें कहा था कि बेटा मेरी बेटी को बचा लो और तुम चले जाओ यहां से, लेकिन मैंने हार नहीं मानी और महिला को अपने कंधे पर बैठाकर और बाल्टी पर खड़े होकर उन्हें बाहर निकाला। गर्म सीढ़ियां और जले हुए सामानों के बीच से लोगों को निकला वहीं दमकल विभाग के साथ बिल्डिंग के अंदर हेड कांस्टेबल करतार भी घुस गए। गर्म सीढ़ियां और जले हुए सामान के बीच वह लोगों को गोद में उठाकर बाहर लगा रहे थे। गर्म चीजें लगने से वह भी घायल हो गए। इसके बाद भी स्टाफ ने हार नहीं मानी और लोगों की सुरक्षा में जुटे रहे। वरिष्ठ अधिकारी ने बताया आग लगने के बाद नेब सराय थाने का स्टाफ भी मौके पर पहुंच गया। उन्होंने बताया वे हार नहीं माने। इमारत में आग लगने के बाद बराबर में एक खड़े बिजली के खंबे में आग लगी गई। जिसके बाद तार टूटकर नीचे जमीन पर गिरने लगे। इसके बाद भी ऊपर से कूद रहे लोगों की वे मदद में जुट रहे। आग विकराल हुई तो उन्हें पीछे हटना पड़ा
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