देशभर में UGC के नए नियमों का विरोध:  UP में सवर्ण युवकों ने मुंडन कराया, बिहार में फांसी मांगी; सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार
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देशभर में UGC के नए नियमों का विरोध: UP में सवर्ण युवकों ने मुंडन कराया, बिहार में फांसी मांगी; सुप्रीम कोर्ट सुनवाई को तैयार

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नई दिल्ली/लखनऊ/पटना5 घंटे पहले

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बिहार के पटना में UCG के नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया। - Dainik Bhaskar

बिहार के पटना में UCG के नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया गया।

देशभर में जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स और सवर्ण जाति के लोगों का यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नए नियमों को लेकर विरोध जारी है। बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने नए नियमों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई की मांग स्वीकर की।

सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने वकीलों की दलीलों पर ध्यान दिया। सीजेआई ने कहा- हमें पता है कि क्या हो रहा है। सुनिश्चित करें कि खामियों को दूर किया जाए। हम इसे लिस्ट करेंगे।

इधर, यूपी-बिहार में आज भी जमकर हंगामा हुआ। स्टूडेंट्स और सवर्ण जातियों के लोग सड़कों पर उतरे। यूपी के पीलीभीत में सवर्ण समाज के युवकों ने मुंडन कराया। बिहार में PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के पोस्टर पर कालिख पोती गई।

यूपी-बिहार से प्रदर्शन की 6 तस्वीरें

पटना में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने PM मोदी के पोस्टर पर कालिख पोती।

पटना में प्रदर्शन कर रहे लोगों ने PM मोदी के पोस्टर पर कालिख पोती।

तस्वीर पटना की है। हाथ में लोगों ने काला कानून वापस लो के पोस्टर लेकर नारेबाजी की।

तस्वीर पटना की है। हाथ में लोगों ने काला कानून वापस लो के पोस्टर लेकर नारेबाजी की।

पटना में प्रदर्शनकारियों ने PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के पोस्टर जलाए।

पटना में प्रदर्शनकारियों ने PM मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के पोस्टर जलाए।

यूपी के लखनऊ में सवर्ण समाज के लोग और छात्रों ने प्रदर्शन किया।

यूपी के लखनऊ में सवर्ण समाज के लोग और छात्रों ने प्रदर्शन किया।

देवरिया में प्रदर्शनकारी पुलिस से भिड़ गए। उनकी पुलिसवालों से जमकर नोकझोंक हुई।

देवरिया में प्रदर्शनकारी पुलिस से भिड़ गए। उनकी पुलिसवालों से जमकर नोकझोंक हुई।

रायबरेली में भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गोरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने सवर्ण नेताओं को चूड़ियां भेजीं।

रायबरेली में भाजपा किसान नेता रमेश बहादुर सिंह और गोरक्षा दल के अध्यक्ष महेंद्र पांडेय ने सवर्ण नेताओं को चूड़ियां भेजीं।

UGC के नए नियमों का विरोध क्यों?

UGC ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026।’ इसके तहत कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं।

ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि नियमों को जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताकर विरोध हो रहा है।

आलोचकों का कहना है कि सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स का कहना है कि नए नियम कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपसों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी।

दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने सिफारिश की थी

सभी यूनिवर्सिटी, कॉलेजों और उच्च शिक्षण संस्थानों में ‘इक्विटी कमेटी’ के गठन को अनिवार्य करने की सिफारिश संसद की शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी स्थायी समिति ने की थी।

इस समिति के अध्यक्ष कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व CM दिग्विजय सिंह हैं। समिति में कुल 30 सदस्य हैं, जिनमें लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 9 सांसद शामिल हैं। इनमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसद शामिल हैं।

रोहित और डॉ. पायल का सुसाइड और SC का सख्त निर्देश

UGC का यह नियम सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों, सामाजिक दबाव और रोहित वेमुला और पायल तड़वी के सुसाइड जैसे मामलों से बने हालात का परिणाम बताया जा रहा है। अब जानिए रोहित और पायल के बारे में…

रोहित वेमुला हैदराबाद यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्कॉलर थे। उन्होंने 17 जनवरी 2016 को सुसाइड किया। आरोप लगा कि रोहित दलित थे, इसलिए उनके साथ संस्थागत जातिगत भेदभाव हुआ। रोहित की मौत के बाद आत्महत्या के बाद देशव्यापी आंदोलन भी हुआ। जवाबदेही की मांग उठी।

डॉ. पायल तड़वी मुंबई में मेडिकल की पोस्टग्रेजुएट छात्रा थीं। उन्होंने 2019 में सुसाइड किया। आरोप लगे कि आदिवासी समुदाय से होने के कारण पायल के सीनियर डॉक्टरों ने उनके साथ जातिगत भेदभाव किया था। लगातार उत्पीड़न के पायल ने सुसाइड किया। हालांकि इस मामले में एट्रोसिटी एक्ट के तहत आरोपी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया था। यह मामले सुप्रीम कोर्ट तक गया था।

इनके अलावा भी अनिकेत अंभोरे मामला (AIIMS दिल्ली), सेंथिल कुमार मामला (JNU, 2008),अमन कच्‍छू मामला (हिमाचल प्रदेश मेडिकल कॉलेज, 2009) इनके अलावा अन्य मेडिकल कॉलेज और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के और भी जातिगत भेदभाव के मामले भी हैं, जिन पर सुप्रीम कोर्ट में चर्चा हुई है।

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