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दो दिन रहेगी भाद्रपद मास की अमावस्या: कुशग्रहणी अमावस्या पर कुशा घास इकट्ठा करने की परंपरा, दोपहर में करें पितरों के लिए धूप-ध्यान

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5 घंटे पहले

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इस साल भाद्रपद मास की अमावस्या दो दिन है। यह तिथि 10 सितंबर की सुबह 10.33 बजे से शुरू होगी और 11 तारीख की सुबह 8.56 बजे खत्म होगी। इसी वजह से 10 तारीख को कुशग्रहणी अमावस्या मनाई जाएगी और 11 तारीख को स्नान-दान की अमावस्या रहेगी।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, भाद्रपद अमावस्या को पिठोरी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है। महिलाएं संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से इस तिथि पर व्रत रखती हैं। कुशग्रहणी अमावस्या पर कुशा घास इकट्ठा करने की परंपरा है। पूजा और श्राद्ध-तर्पण आदि धर्म-कर्म के लिए कुश घास का विशेष महत्व माना गया है। इस घास के बिना पूजा-पाठ और श्राद्ध कर्म अधूरे ही माने जाते हैं। पुराने समय में भक्त पूरे साल पूजा-पाठ और श्राद्ध आदि धर्म-कर्म में इस्तेमाल करने के लिए कुशा घास भाद्रपद अमावस्या पर ही इकट्ठा करते थे। इसी वजह से इसे कुशग्रहणी अमावस्या कहा जाने लगा।

अमावस्या की दोपहर में करें पितरों के लिए धूप-ध्यान

अमावस्या तिथि पर पितरों के लिए श्राद्ध-तर्पण और दान-पुण्य करने की परंपरा है। इस दिन श्रद्धालु अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए जल अर्पित करते हैं और जरूरतमंद लोगों को भोजन, वस्त्र और उपयोगी चीजों का दान करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से पितरों को तृप्ति मिलती है और पितरों के आशीर्वाद से परिवार में सुख-शांति आती है।

अमावस्या पर कर सकते हैं ये शुभ काम

भाद्रपद अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। गंगा, यमुना, नर्मदा, शिप्रा जैसी नदियों में स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है। जो लोग नदी स्नान नहीं कर पा रहे हैं, वे घर पर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। स्नान के बाद तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करना चाहिए।

इस दिन सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद लोगों को दान करना चाहिए। काले तिल, सरसों का तेल, कपड़े, अनाज, भोजन, जूते-चप्पल, छाता और कंबल जैसी चीजें दान कर सकते हैं।

अमावस्या पर पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है। श्रद्धालु पीपल के नीचे दीपक जलाते हैं और परिक्रमा करते हैं। इसी तरह गाय, कौए और कुत्ते को भोजन कराने की परंपरा भी है।

भाद्रपद अमावस्या पर भगवान विष्णु और महालक्ष्मी की पूजा का विशेष अभिषेक करना चाहिए। घर के मंदिर में जल और पंचामृत से अभिषेक करने के बाद पीला चंदन, तुलसी और पुष्प अर्पित किए जाते हैं। भगवान विष्णु के मंत्र ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय का जप करते हुए परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करनी चाहिए।

किसी तालाब या नदी में मछलियों के लिए आटे की गोलियां बनाकर डालें। किसी गोशाला में गायों की देखभाल के लिए धन का दान करें।

हनुमान जी के सामने दीपक जलाएं और हनुमान चालीसा का पाठ करें। अगर आपके पास पर्याप्त समय हो, तो सुंदरकांड का पाठ भी कर सकते हैं।

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