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धनतेरस 6 और 7 को, खरीदारी के दो शुभ दिन: पूजा और शॉपिंग के महूर्त भी ज्यादा; धनिया-झाड़ू खरीदने का महत्व जानिए

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23 मिनट पहले

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दिवाली की शॉपिंग करना चाहते हैं, तो खुश हो जाइए। क्योंकि इस बार खरीदारी के लिए शुभ मानी जाने वाली धनतेरस दो दिन रहेगी। त्रयोदशी तिथि 6 नवंबर सुबह 10:30 बजे से 7 नवंबर सुबह 10:47 बजे तक है।

अब जरा पूजा-पाठ की बात कर लेते हैं। लक्ष्मी-कुबेर पूजा और यम के लिए दीपदान 6 नवंबर की शाम को होंगे। वैसे तो शॉपिंग कभी भी कर सकते हैं, लेकिन शुभ मुहूर्त जानना चाहें, तो नीचे ग्राफिक्स में देख लीजिए…

सोना-चांदी के साथ धनिया-झाड़ू खरीदना भी शुभ

बात खरीदारी की हो रही है, तो जान लीजिए कि धनतेरस पर सोने-चांदी के गहने-सिक्के लेना तो मंगलकारी माना ही जाता है, लेकिन इस दिन खड़ा धनिया और झाड़ू खरीदने का भी खास महत्व है।

व्यापारी दिवाली से नया कारोबारी साल मानते हैं। इसीलिए, अगले पूरे साल का हिसाब-किताब रखने के लिए इसी दिन नए बहीखाते खरीदने की परंपरा है।

लक्ष्मी के 7 प्रतीक, सभी को पूजने की मान्यता

श्रीमद्भागवत महापुराण में समुद्र मंथन की कथा है। देवताओं और असुरों ने अमृत के लिए क्षीरसागर का मंथन किया। इससे पहले सुरभि गाय, उच्चैःश्रवा घोड़ा, चार दांतों वाला ऐरावत हाथी, कौस्तुभ और पद्मराग मणि, पारिजात और अप्सराएं निकलीं। इसके बाद देवी लक्ष्मी प्रकट हुईं।

लक्ष्मी के प्रकट होने पर इंद्र ने उनके लिए आसन दिया। नदियां सोने के कलशों में जल लेकर आईं। ऋषियों ने वैदिक मंत्रों के साथ उनका अभिषेक किया और दिशाओं के हाथियों ने भी देवी को स्नान कराया। इसके बाद लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपना पति चुना।

200 साल पहले धनतेरस पर सिक्कों की पूजा

ब्रिटिश इतिहासकार जेम्स टॉड ने 1832 में अपनी पुस्तक एनल्स एंड एंटिक्विटीज ऑफ राजस्थान में लिखा है कि कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी पर लोग सिक्कों को देवी लक्ष्मी का प्रतीक मानकर पूजते थे। यह परंपरा खासतौर से व्यापारी समुदाय में प्रचलित थी। टॉड ने 1818 से 1822 के बीच राजपूताना परंपराओं का अध्ययन किया था। इससे पता चलता है कि करीब दो सदी पहले भी धनतेरस पर धन की पूजा महत्वपूर्ण थी।



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