नवनीत गुर्जर का कॉलम:  नेताओं के ऐसे बोल, पार्टियां सहती क्यों हैं?
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: नेताओं के ऐसे बोल, पार्टियां सहती क्यों हैं?

Spread the love


  • Hindi News
  • Opinion
  • Navneet Gurjar’s Column Why Do Parties Tolerate Such Statements From Leaders?

6 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
नवनीत गुर्जर - Dainik Bhaskar

नवनीत गुर्जर

ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार दुनियाभर में अलख जगाने के लिए कई दलों के अलग-अलग प्रतिनिधिमंडल भेज रही है। लगभग सभी दलों के नेताओं के ये दल पाकिस्तान सरकार द्वारा पोषित आतंकवाद को उजागर करेंगे और दुनिया के ज्यादातर देशों को पाकिस्तान का छिपा हुआ एजेंडा मय सबूत के दिखाएंगे। सरकार की यह अच्छी रणनीति है।

इससे भी अच्छी बात यह है कि इन प्रतिनिधिमंडलों में सभी दलों के नेताओं को शामिल किया गया है। निश्चित ही दुनियाभर में इसका एक अच्छा संदेश जाएगा।

दूसरी तरफ हमारे ही देश में सत्ता पक्ष और विपक्ष के कुछ नेता अनाप-शराप बयान देने से नहीं चूक रहे हैं। हैरत की बात यह है कि उनकी पार्टियां उन्हें निकाल बाहर करने के बजाय परोक्ष रूप से उनके बचाव में जुटी हुई हैं!

मध्यप्रदेश के एक मंत्री विजय शाह और एक उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने तो हद ही कर दी। एक ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर ऊल-जलूल बयान दे डाला तो दूसरे ने पूरी सेना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चरणों में नतमस्तक बता दिया!

अब दिखावे के लिए इन बयानों की जांच के लिए एसआईटी गठित की जा रही है। निश्चित ही यह सब दिखावा ही है। जो बयान दिए गए हैं, वे सबके सामने हैं। इसमें एसआईटी गठित करने का क्या मतलब? वो लीपापोती के सिवाय करेगी ही क्या? लगता तो यह है कि राजनीतिक पार्टियों को ऐसे विवादित बयान देने वाले नेताओं को पाले रखने की आदत हो गई है।

वे ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत ही नहीं जुटा पातीं। ये तो हुई भाजपा नेताओं के बयानों की बात। अब आते हैं कांग्रेस नेताओं के बयानों पर।

जब सेना ने कह दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, तब राहुल गांधी यह कैसे पूछ सकते हैं कि पाकिस्तान ने हमारे कितने विमान गिराए? गिराए या नहीं, यह अलग प्रश्न हो सकता है, लेकिन इस वक्त इस तरह का प्रश्न पूछा जाना चाहिए क्या?

कुल मिलाकर आप विपक्ष के नेता हैं, सबकुछ जानने का आपको अधिकार है। लेकिन ऐसे प्रश्नों के लिए यह समय उचित नहीं कहा जा सकता। अब राहुल गांधी तो स्वयंभू नेता हैं, उनके खिलाफ तो कार्रवाई कौन कर सकता है भला?

मामला राहुल गांधी तक ही सीमित नहीं है। कांग्रेस के अध्यक्ष श्रीमान मल्लिकार्जुन खरगे भी पीछे नहीं हैं। उनका कहना है कि पहलगाम या आसपास कुछ आतंकी गतिविधि होने वाली है, यह सूचना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मिल चुकी थी, इसलिए उन्होंने अपना दौरा रद्द कर दिया। उसके एक-दो दिन बाद ही पहलगाम में नरसंहार हुआ!

अब यह कैसे हो सकता है कि सूचना मिलने के बाद भी कोई रोकथाम नहीं की जाए। कोई व्यवस्था नहीं की जाए… और प्रधानमंत्री को पता होने के बाद तो यह संभव हो ही नहीं सकता। खरगे साहब को बयान देते वक्त यह सोचना चाहिए कि वे जो कह रहे हैं, उसका आखिर मतलब क्या है!

हां, पहलगाम की घटना को लेकर आप यह कह सकते हैं कि यह सुरक्षा की चूक हो सकती है। यह सवाल उठा सकते हैं कि इतने पर्यटक वहां थे तो सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए?

लेकिन यह कहना कतई उचित नहीं है कि सूचना होने के बावजूद कुछ नहीं किया गया। उधर ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित प्रतिनिधि मंडल में कौन जाए, कौन नहीं, इसे लेकर पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस पार्टी ने तूफान मचा रखा था। आखिर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी का नाम तय कर दिया गया।

इधर शिवसेना (उद्धव गुट) में भी इस मामले को लेकर कुछ कानाफूसी हुई थी। पता चला है कि प्रतिनिधिमंडल के लिए उद्धव ठाकरे प्रियंका चतुर्वेदी का नाम पहले ही दे चुके थे और संजय राउत को खबर ही नहीं थी!

उद्धव सेना में संभवतया ऐसा पहली बार हुआ। खैर, कुल मिलाकर बात यह है कि राजनीतिक दलों को देश, उसकी सुरक्षा और सेना के मामले में दलीय राजनीति से ऊपर उठकर बात करनी चाहिए।

बहुत हद तक इस बार ऐसा किया भी गया लेकिन किसी न किसी दल में कोई न कोई नेता अनर्गल बयानबाजी करता रहा। राजनीतिक दलों को चाहिए कि ऐसे नेताओं को सख्त चेतावनी देकर उनका मुंह बंद कर दें। फिर भी न मानें तो पार्टी से, और पदों से हटा देना चाहिए। इसके सिवाय दूसरा कोई रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए।

बयान सबके सामने हैं, फिर जांच किस बात की? बयानों की जांच के लिए एसआईटी गठित की जा रही है। निश्चित ही यह सब दिखावा ही है। जो बयान दिए गए हैं, वे सबके सामने हैं। इसमें एसआईटी गठित करने का क्या मतलब? वो लीपापोती के सिवाय आखिर करेगी ही क्या?

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *