नवनीत गुर्जर का कॉलम:  तुम सौदागर तेल के, हम कोल्हू के बैल!
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: तुम सौदागर तेल के, हम कोल्हू के बैल!

कच्ची घाणी। अब तो इसके लिए भी आधुनिक तरीके, मशीनें आ गई हैं। लेकिन पहले कोल्हू होता था और कोल्हू का बैल। जी, हम सब कच्ची घाणी के या कोल्हू के बैल ही तो हैं! कोल्हू चलता था तो ‘चक चूं’ करता था। बैल बस, सारी उम्र चलता रहता था। साल, महीने गिने बिना। गोल-गोल […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  नए साल में नई शपथ, नए नियम
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: नए साल में नई शपथ, नए नियम

2025 गया! 26 आ गया। अरदास यही है कि हमारे सभी कर्म सत्कर्म हों! ईश्वर कृपा करे कि इस बार पिछले साल जैसे हादसों का मुंह न देखना पड़े। हालांकि समय न किसी के लिए रुकता। न किसी के लिए चलता। उसकी अपनी चाल है। वर्षों से। युगों-युगों से। न वो कभी थका। न कभी […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  बड़े-बूढ़े कह गए हैं कि जो पेड़ नई कोंपलों का स्वागत नहीं करते, ठूंठ हो जाते हैं
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: बड़े-बूढ़े कह गए हैं कि जो पेड़ नई कोंपलों का स्वागत नहीं करते, ठूंठ हो जाते हैं

Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column Elders Have Said That Trees That Do Not Welcome New Shoots Become Stumps. 3 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर जमाना एआई का है! आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का है। भाव, भावनात्मक बातों और संवेदना जैसी चीजों का अकाल आने वाला है। बच्चे को मां की कस्टडी में देने को हम […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  गजब की ठण्ड है इन दिनों- जी राम जी!
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: गजब की ठण्ड है इन दिनों- जी राम जी!

6 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर ठण्ड लटालूम! पहले नियम-कायदों ने उड़ानें रोक रखी थीं। अब ठण्ड उड़ानें रद्द या लेट करवा रही है। सूरज के बारहों रूप मद्धम पड़ गए हैं। घरों के हाल सुख-दु:ख की धूप-छांह से हैं। पहले धूप का एक टुकड़ा जिस खिड़की से आता है, उसी से लौटकर खिड़की […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  आसमान में संकट, जमीन पर चीख-पुकार
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: आसमान में संकट, जमीन पर चीख-पुकार

3 मिनट पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर बड़ा अच्छा लगता है जब आकाश में उड़ते हैं। इतने विशाल देश के किसी भी कोने से कहीं भी डेढ़-पौने दो घंटे में पहुंच जाते हैं। ऊपर से नीचे बादलों को देखने का आनंद अलग से! रुई के फाहे जैसे बादल। देखकर लगता है जैसे ऊपर वाले ने […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  ‘SIR’, अब कहीं तो हमें माफ कर दीजिए!
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: ‘SIR’, अब कहीं तो हमें माफ कर दीजिए!

4 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर ज्ञानेश बाबा ऊपर, सबसे ऊपर बैठकर ज्ञान बांटते फिरते हैं। न किसी की समझ में आता। न कोई समझना चाहता। पूछा कुछ और जाता है। जवाब कुछ और मिलता है। बीएलओ बेचारे आजकल घर-घर चक्कर काट रहे हैं। उनमें से ज्यादातर को कुछ पता ही नहीं है। एक […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  बिहार के तालाब में कूदने की कहानी
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: बिहार के तालाब में कूदने की कहानी

7 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर किसने अपनी बांह चढ़ाकर वक्त को रोका था? कौन लम्बी दौड़ लगाकर समय से आगे निकल पाया? कोई नहीं। कोई नहीं। बिहार में सोच से आगे सीटें आ गईं। क्यों? सोच का अपना गणित है और सीटों का अपना। शुरुआत में मैथिली ठाकुर का स्थानीय भाजपा में भारी […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  नेताजी, तुम आना! जैसे कैक्टस में कांटे आते हैं!
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: नेताजी, तुम आना! जैसे कैक्टस में कांटे आते हैं!

Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column: “Netaji, Please Come! Like Thorns On A Cactus!” 5 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर अबके वोट मांगने आए हो! फिर कब आओगे? तमन्ना है! अरदास है! विनती भी। तुम आना। जरूर आना। जब भी वक्त मिले। …और वक्त अगर न हो जब, तब भी आना। जैसे जिस्म की […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  अपने ही हाथों खुद गुलाम होने की कहानी…
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: अपने ही हाथों खुद गुलाम होने की कहानी…

Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column The Story Of Becoming A Slave By One’s Own Hands… 35 मिनट पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर मैं देश हूं! भारत हूं! चूंकि पिछले बारह वर्षों से चुनावी मोड में रहने वाले देश में फिलहाल फिर चुनाव हैं, इसलिए समझ लीजिए मैं बिहार हूं! बहुत गुजरा है वक्त ऐसे […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  बिहार में चुनावी बहार! है भी, नहीं भी!
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: बिहार में चुनावी बहार! है भी, नहीं भी!

Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column: Bihar Is In The Electoral Frenzy, And It’s Not! 7 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर बरसात, शीत और गर्मी, मुख्य रूप से हिंदुस्तान में तीन मौसम होते हैं, लेकिन वर्षों से यहां एक ही मौसम प्रभावी दिखाई दे रहा है- चुनावी मौसम! एक चुनाव गया, दूसरा आया। दूसरा […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  मुफ्त की रेवड़ियों से हामिद के चिमटे तक
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: मुफ्त की रेवड़ियों से हामिद के चिमटे तक

4 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर चुनाव कोई भी हो, आज-कल मुफ्त की रेवड़ियों, बेतहाशा चुनाव खर्च, अभद्र भाषा और भद्दे भाषणों पर आकर टिक गया है। निश्चित तौर पर इन मुफ्त की रेवड़ियों से चुनाव जीते भी जा रहे हैं। हो सकता है आगे भी जीते जाते रहें, लेकिन राज्यों के बजट पर […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो!
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैर के दरिया पार करो!

Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column Leave The Boatmen, Cross The River By Swimming! 3 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर “तूफानों से आंख मिलाओ / सैलाबों पर वार करो / मल्लाहों का चक्कर छोड़ो / तैर के दरिया पार करो।’ राहत इंदौरी साहब के इस शेर को ही शायद ध्येय मानकर नेपाल के युवाओं […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  अपने ही सवालों में घिरा हुआ विपक्ष
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: अपने ही सवालों में घिरा हुआ विपक्ष

4 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर लगभग तीन महीने से हवा में तैर रहे सवालों के जवाब मिल गए। पहलगाम के। ऑपरेशन सिंदूर के और इन दोनों से जुड़े अन्य मामलों के भी। हालांकि भारत को कितना और क्या नुकसान हुआ, जैसे कुछ सवाल अनुत्तरित ही रहे और दलगत राजनीति से ऊपर उठें और […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  राजनीति यानी अनिश्चितता का बियाबान
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: राजनीति यानी अनिश्चितता का बियाबान

5 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर अटल जी कहते थे- राजनीति एक बियाबान है। यहां कुछ भी निश्चित नहीं। ठहरा हुआ नहीं। निश्चिंत भी नहीं। उपराष्ट्रपति रहते शायद जगदीप धनखड़ ने भी यही सोचा होगा। तड़पना, गुम हुए लम्हों की खातिर। कई अनजान वादों से गुजरना। अधूरी, नामुकम्मिल कोशिशों के दर्द। इन सबके साथ […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  बारिश, पुल, पुलिया और भ्रष्ट व्यवस्था‎
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: बारिश, पुल, पुलिया और भ्रष्ट व्यवस्था‎

5 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर बारिश हर तरफ है। जोरदार है। जबर्दस्त है। कहीं सुकून देने वाली। कहीं तबाही मचाने वाली। हल्की हो या तेज, पुल-पुलिया ताश के पत्तों की तरह बह रहे हैं। दरअसल, इस बहने-टूटने में इन पुल-पुलिया का कोई कसूर नहीं है। शरद जोशी ने लिखा है- हिंदुस्तान में नदियां […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  पुकार! किसी के पास कान हो तो सुने!
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: पुकार! किसी के पास कान हो तो सुने!

4 मिनट पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर हर तरफ बादल हैं। बारिश है। बाढ़ भी। पहाड़ों पर तबाही ज्यादा है। वे सरक रहे हैं। दरक रहे हैं। मैदानों में हमेशा की तरह कहीं भारी बारिश। कहीं बूंदा-बांदी। लेकिन बिहार जहां इन​ दिनों अमूमन बाढ़ होती है, फिलहाल सूखा है। गर्मी है। चुनावी गर्मी। यहां चुनाव […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  आशाओं का अम्बर और मोह के धागे
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: आशाओं का अम्बर और मोह के धागे

Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column The Sky Of Hopes And The Threads Of Attachment 7 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर कहीं एक सोनम ने पति की हत्या करवा दी। कहीं इस भर गर्मी में लोग नहाते हुए डूब गए- सेल्फी लेते हुए, कोई मस्ती करते हुए या एक-दूसरे को बचाते हुए। पीछे छोड़ […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  नेताओं के ऐसे बोल, पार्टियां सहती क्यों हैं?
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: नेताओं के ऐसे बोल, पार्टियां सहती क्यों हैं?

Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column Why Do Parties Tolerate Such Statements From Leaders? 6 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार दुनियाभर में अलख जगाने के लिए कई दलों के अलग-अलग प्रतिनिधिमंडल भेज रही है। लगभग सभी दलों के नेताओं के ये दल पाकिस्तान सरकार द्वारा पोषित आतंकवाद को उजागर करेंगे […]

​​​​​​​नवनीत गुर्जर का कॉलम:  गली-मोहल्ले बात चली है, पता चला है…
टिपण्णी

​​​​​​​नवनीत गुर्जर का कॉलम: गली-मोहल्ले बात चली है, पता चला है…

Hindi News Opinion ​​​​​​​Navneet Gurjar’s Column The Talk Is Going On In The Streets And Neighborhoods, It Has Been Found Out… 6 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर सुर्खियों से आगे – चौराहों, घरों, दफ्तरों में बह​स छिड़ी बहस छिड़ी है। चौराहों पर। घरों में। दफ्तरों में भी। हमें तो सिर्फ पीओके यानी पाक अधिकृत […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  कांग्रेस के मुद्दे पर सर्जिकल स्ट्राइक!
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: कांग्रेस के मुद्दे पर सर्जिकल स्ट्राइक!

4 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर मुद्दों को लेकर कांग्रेस का रवैया सामान्यतया लचीला ही रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में कई मुद्दे ऐसे आए, जिन्हें वह जनहित में जोर-शोर से उठा सकती थी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। कुछ मुद्दों को उठाया भी तो वे ज्यादा चल नहीं पाए। हो सकता […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  भारत भावुक, पाकिस्तान की नींद उड़ी…
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: भारत भावुक, पाकिस्तान की नींद उड़ी…

Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column India Is Emotional, Pakistan Is Losing Sleep… 12 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर कश्मीर घाटी में ऐसा संभवत: पहली बार हुआ है- धर्म पूछ-पूछ कर गोली मारना। नाम पूछकर गोली मारना। कलमा नहीं पढ़ पाने पर गोली मारना… इन दहशतगर्दों को कौन बताए कि सबसे बड़ा धर्म इंसानियत […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  किस्से लिखे हैं रोटियों पर, पढ़ेगा कौन?
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: किस्से लिखे हैं रोटियों पर, पढ़ेगा कौन?

Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column Stories Are Written On Rotis, Who Will Read Them? 5 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर गुलजार साहब की एक ताजा किताब है- “ए पोयम ए डे’। इसकी एक कविता को गद्य में समझें तो कुछ ऐसी बनती है- कोल्हू चलता रहता है। बैल उसी के पीछे-पीछे। उम्र भर। […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  हमारी अभिव्यक्ति आखिर कितनी आजाद हो?
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: हमारी अभिव्यक्ति आखिर कितनी आजाद हो?

5 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर जबां फिर से बदलने लग गई है। कि जैसे आसमां के रंग बदलते हैं। कि जैसे रेल, पटरियां बदलती है। कि जैसे गांव की लड़की सुबह जागे और जबरदस्ती ब्याह दी जाए। उसी तरह बदलने लग गई है लफ्जों की चमड़ी। ये लफ्ज कभी-कभी हाथों में तलवार लिए […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  आइए! राजनीतिक नैतिकता की राख बटोरें
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: आइए! राजनीतिक नैतिकता की राख बटोरें

Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column Come! Let’s Collect The Ashes Of Political Morality 2 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर आइए! राजनीति में नैतिकता की ढलती सांझ की राख बटोरें! नैतिकता की ढलान इसलिए क्योंकि वोट कब्जाने-कबाड़ने के नित-नए तरीके ईजाद किए जा रहे हैं, जो पूरी तरह से ईमानदार तो नहीं ही कहे […]

नवनीत गुर्जर का कॉलम:  आखिर क्यों बाज नहीं आते ये बयानवीर?
टिपण्णी

नवनीत गुर्जर का कॉलम: आखिर क्यों बाज नहीं आते ये बयानवीर?

6 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर हजारों कसमें खा-खाकर, कई लोगों की जान की बाजी लगाकर भी कभी न झुकने की रट लगाने वाले जेलेंस्की भी अब तो घुटनों पर आ गए हैं। लेकिन हमारे नेता जो बयानवीर बने घूमते रहते हैं, किसी मोड़ पर, किसी सीमा पर रुकना नहीं चाहते। एक कांग्रेस प्रवक्ता […]