Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column Why Do Parties Tolerate Such Statements From Leaders? 6 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर ऑपरेशन सिंदूर पर सरकार दुनियाभर में अलख जगाने के लिए कई दलों के अलग-अलग प्रतिनिधिमंडल भेज रही है। लगभग सभी दलों के नेताओं के ये दल पाकिस्तान सरकार द्वारा पोषित आतंकवाद को उजागर करेंगे […]
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नवनीत गुर्जर का कॉलम: गली-मोहल्ले बात चली है, पता चला है…
Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column The Talk Is Going On In The Streets And Neighborhoods, It Has Been Found Out… 6 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर सुर्खियों से आगे – चौराहों, घरों, दफ्तरों में बहस छिड़ी बहस छिड़ी है। चौराहों पर। घरों में। दफ्तरों में भी। हमें तो सिर्फ पीओके यानी पाक अधिकृत […]
नवनीत गुर्जर का कॉलम: कांग्रेस के मुद्दे पर सर्जिकल स्ट्राइक!
4 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर मुद्दों को लेकर कांग्रेस का रवैया सामान्यतया लचीला ही रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में कई मुद्दे ऐसे आए, जिन्हें वह जनहित में जोर-शोर से उठा सकती थी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। कुछ मुद्दों को उठाया भी तो वे ज्यादा चल नहीं पाए। हो सकता […]
नवनीत गुर्जर का कॉलम: भारत भावुक, पाकिस्तान की नींद उड़ी…
Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column India Is Emotional, Pakistan Is Losing Sleep… 12 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर कश्मीर घाटी में ऐसा संभवत: पहली बार हुआ है- धर्म पूछ-पूछ कर गोली मारना। नाम पूछकर गोली मारना। कलमा नहीं पढ़ पाने पर गोली मारना… इन दहशतगर्दों को कौन बताए कि सबसे बड़ा धर्म इंसानियत […]
नवनीत गुर्जर का कॉलम: किस्से लिखे हैं रोटियों पर, पढ़ेगा कौन?
Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column Stories Are Written On Rotis, Who Will Read Them? 5 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर गुलजार साहब की एक ताजा किताब है- “ए पोयम ए डे’। इसकी एक कविता को गद्य में समझें तो कुछ ऐसी बनती है- कोल्हू चलता रहता है। बैल उसी के पीछे-पीछे। उम्र भर। […]
नवनीत गुर्जर का कॉलम: हमारी अभिव्यक्ति आखिर कितनी आजाद हो?
5 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर जबां फिर से बदलने लग गई है। कि जैसे आसमां के रंग बदलते हैं। कि जैसे रेल, पटरियां बदलती है। कि जैसे गांव की लड़की सुबह जागे और जबरदस्ती ब्याह दी जाए। उसी तरह बदलने लग गई है लफ्जों की चमड़ी। ये लफ्ज कभी-कभी हाथों में तलवार लिए […]
नवनीत गुर्जर का कॉलम: आइए! राजनीतिक नैतिकता की राख बटोरें
Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column Come! Let’s Collect The Ashes Of Political Morality 2 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर आइए! राजनीति में नैतिकता की ढलती सांझ की राख बटोरें! नैतिकता की ढलान इसलिए क्योंकि वोट कब्जाने-कबाड़ने के नित-नए तरीके ईजाद किए जा रहे हैं, जो पूरी तरह से ईमानदार तो नहीं ही कहे […]
नवनीत गुर्जर का कॉलम: आखिर क्यों बाज नहीं आते ये बयानवीर?
6 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर हजारों कसमें खा-खाकर, कई लोगों की जान की बाजी लगाकर भी कभी न झुकने की रट लगाने वाले जेलेंस्की भी अब तो घुटनों पर आ गए हैं। लेकिन हमारे नेता जो बयानवीर बने घूमते रहते हैं, किसी मोड़ पर, किसी सीमा पर रुकना नहीं चाहते। एक कांग्रेस प्रवक्ता […]
नवनीत गुर्जर का कॉलम: विधानसभाओं की गरिमा भी अब तार-तार हो रही है।
Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column The Dignity Of The Legislative Assemblies Is Also Being Torn To Shreds Now. 4 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर क्यों? इसका जवाब किसी के पास नहीं है! दरअसल, जब सदन के जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग विपक्ष को किसी एक तरफ झुकते दिखाई देते हैं तो विपक्ष उत्तेजित […]
नवनीत गुर्जर का कॉलम: आखिर भीड़ को कौन, कब काबू में कर पाया है?
Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column After All, Who Has Been Able To Control The Crowd And When? 3 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर कुम्भ में, महाकुम्भ में, दिल्ली स्टेशन पर, भीड़ और भगदड़। इलाज क्या? दरअसल, जरूरत से ज्यादा या कहें कि बेतहाशा भीड़ जब इकट्ठा हो जाती है तो इसका कोई इलाज […]
नवनीत गुर्जर का कॉलम: महाराष्ट्र-झारखंड के बाद आखिर दिल्ली किसकी?
Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column After Maharashtra Jharkhand, Who Will Own Delhi? 8 घंटे पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर मौसम सर्दियों का है और चुनाव का भी। सर्दियां इस बार हाड़ कंपाने वाली तो नहीं थीं, लेकिन लम्बी जरूर रहीं। चुनाव के भी कुछ यही हाल रहे। पहले जम्मू-कश्मीर और हरियाणा। फिर महाराष्ट्र और […]
नवनीत गुर्जर का कॉलम: जेल में रहकर चुनाव लड़ने की छूट क्यों?
Hindi News Opinion Navneet Gurjar’s Column Why Is There Exemption To Contest Elections While Being In Jail? 3 मिनट पहले कॉपी लिंक नवनीत गुर्जर आम आदमी तो जाने कब से बंट चुका है खांचों में। उसकी रातें लम्बी हैं। सांसें सिकुड़ रही हैं। जैसे कोई होली में अभ्रक छिड़क रहा हो! ये सर्दियां हैं। सूखे […]
















