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नौकरी के 30-35 साल… खून-पसीने की कमाई और रिटायरमेंट पर मिला पीएफ, ग्रेच्युटी का एकमुश्त फंड। अधिकांश वरिष्ठ नागरिक जोखिम से बचने के लिए इसे सबसे सुरक्षित मानकर बैंक की एफडी या सेविंग्स अकाउंट में पूरा जमा कर देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं यदि आपका बैंक संकट में आ जाए या डूब जाए, तो आपकी कितनी रकम सुरक्षित है? आरबीआई की संस्था- जमा बीमा क्रेडिट गारंटी निगम (डीआईसीजीसी) किसी भी बैंक के डूबने की स्थिति में एक जमाकर्ता को अधिकतम ₹5 लाख तक की राशि वापस मिलने की गारंटी देता है। ऐसे में रिटायरमेंट फंड को सिर्फ एक बैंक में जमा करने के बजाय अलग-अलग बैंक या अकाउंट में रखना ज्यादा सुरक्षित होता है।
एक बैंक या अकाउंट में 5 लाख से ज्यादा न रखें, बैंक डूबने पर अधिकतम इतनी राशि कवर होती है 1. इंश्योरेंस कवर को समझें डीआईसीजीसी का इंश्योरेंस कवर प्रति जमाकर्ता, प्रति बैंक के आधार पर काम करता है। यदि आपने एक ही बैंक में ₹2 लाख सेविंग्स अकाउंट में व 4 लाख रुपए एफडी में जमा किए हैं तो इसका गणित समझ लें। बैंक डूबने की स्थिति में सिर्फ 5 लाख रुपए ही कवर होंगे, क्योंकि डीआईसीजीसी इतनी राशि की गारंटी देता है। 2. ओनरशिप पैटर्न को बदलें यदि आप अलग-अलग बैंकों के चक्कर नहीं काटना चाहते तो एक ही बैंक में खाता खोलने का कानूनी तरीका बदलें। एक ही बैंक में एक खाता खुद के नाम से, दूसरा पत्नी व तीसरा खाता संयुक्त नाम से खुलवा लें। उनमें 5-5 लाख करके 15 लाख रुपए जमा करें। बैंक डूबने की स्थिति में आपकी पूरी राशि इंश्योरेंस में कवर हो जाएगी। 3. ब्याज का गणित ध्यान रखें एक गलती अकसर यह भी होती है कि 5 लाख की एफडी एक साथ कर देते हैं। जबकि इंश्योरेंस कवरेज में ब्याज की रकम भी शामिल होती है। यदि 40 हजार रु. सालाना ब्याज बनता है तो एफडी साढ़े 4 लाख रुपए से ज्यादा की नहीं करें। बैंक संकट के दौरान यह ब्याज भी डूबने से बच जाएगा। 4. ऑफर के लालच में नहीं फंसें अकसर सरकारी या बड़े निजी बैंकों की तुलना में कोऑपरेटिव बैंक 0.5% से 1% तक ज्यादा ब्याज का ऑफर देते हैं। इसके लालच में आने से पहले संबंधित बैंक के मैनेजर से लिखित में लें या फिर www.dicgc.org.in वेबसाइट पर यह चेक करें कि फला कोऑपरेटिव बैंक डीआईसीजीसी के सुरक्षा कवच में रजिस्टर्ड है या नहीं। 5. प्रीमियम की चिंता नहीं करें बैंक में जमा पूंजी की सुरक्षा के लिए आपको जेब से एक रुपया भी नहीं देना होता है। इस इंश्योरेंस का प्रीमियम संबंधित बैंकों द्वारा डीआईसीजीसी को चुकाया जाता है। बैंक इस राशि को आपके खाते से या ब्याज दरों से नहीं काट सकते। आप कवर लिमिट को ध्यान में रखकर साढ़े 4-4 लाख रुपए अलग-अलग बैंक में जमा करें तो पैसा हमेशा सुरक्षित रहेगा।
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