2 दिन पहले
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आज (22 सितंबर) से आश्विन मास का नवरात्रि उत्सव शुरू हो गया है। इस साल नवरात्रि 9 नहीं, 10 दिनों की है, क्योंकि इस नवरात्रि में चतुर्थी तिथि दो दिन रहेगी। आज नवरात्रि के पहले दिन देवी दुर्गा के पहले स्वरूप शैलपुत्री की पूजा करनी चाहिए।
दक्ष प्रजापति के यज्ञ में देवी सती ने अपनी देह त्याग दी थी। इसके बाद देवी का पहला अवतार राजा हिमालय के यहां शैलपुत्री रूप में हुआ, इसलिए नवरात्रि के पहले दिन इस स्वरूप की पूजा की जाती है। इनकी पूजा से जीवनी शक्ति बढ़ती है।
नौ देवियों का श्लोक
प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्।।
पंचमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रि महागौरीति आष्टमम्।।
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना।।
(मार्कंडेय पुराण)
इस श्लोक में देवी के नौ स्वरूपों के बारे में बताया गया है- पहली शैलपुत्री, दूसरी ब्रह्मचारिणी, तीसरी चंद्रघंटा, चौथी कुष्मांडा, पांचवीं स्कंदमाता, छठीं कात्यायनी, सातवीं कालरात्रि, आठवीं महागौरी और नवीं सिद्धादात्री हैं।


देवी शैलपुत्री की कथा
- देवी सती के पिता प्रजापति दक्ष यज्ञ करवा रहे थे। दक्ष ने यज्ञ में शिव और सती को छोड़कर सभी देवी-देवताओं को बुलाया।
- सती ने शिव से पिता के यज्ञ में शामिल होने को कहा शिव ने समझाया कि बिना बुलाए नहीं जाना चाहिए।
- सती ने शिव की बात नहीं मानीं और यज्ञ में गईं। सती यज्ञ में गईं तो दक्ष ने शिव का अपमान किया।
- सती, शिव का अपमान सहन नहीं कर सकी और योग अग्नि से खुद को जला लिया।
- बाद में सती ने पर्वतराज हिमालय के यहां जन्म लिया और शिव को पाने के लिए तपस्या की।
- शैल यानी पर्वत पुत्री होने के कारण देवी का नाम शैलपुत्री पड़ा।
लाइफ मैनेजमेंट टिप्स- देवी शैलपुत्री ने शिव से विवाह का संकल्प लिया था और अपने तप से शिव जी को प्राप्त भी किया। इसी तरह हमें भी हर काम मजबूती, साहस और पूरी ताकत से करना चाहिए। कामकाज में आने वाली रुकावटों से परेशान नहीं होना चाहिए। संकल्प मजबूत होगा तो सफलता जरूर मिलेगी।








