नौसेना को पनडुब्बी मारने वाला आधुनिक हथियार मिलेगा:  सेना को नई राइफल; ₹4,666 करोड़ खर्च होंगे, लगातार दूसरे दिन बड़ा रक्षा सौदा
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नौसेना को पनडुब्बी मारने वाला आधुनिक हथियार मिलेगा: सेना को नई राइफल; ₹4,666 करोड़ खर्च होंगे, लगातार दूसरे दिन बड़ा रक्षा सौदा

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नई दिल्ली13 मिनट पहले

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रक्षा मंत्रालय ने क्लोज क्वार्टर बैटल कार्बाइन राइफल और हैवीवेट टॉरपीडो की खरीद के लिए सौदा किया है। - Dainik Bhaskar

रक्षा मंत्रालय ने क्लोज क्वार्टर बैटल कार्बाइन राइफल और हैवीवेट टॉरपीडो की खरीद के लिए सौदा किया है।

रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को भारतीय सेना और नौसेना की ताकत बढ़ाने के लिए 4,666 करोड़ रुपए के रक्षा समझौते किए। इनके तहत सेना को 4.25 लाख से ज्यादा नई बैटल कार्बाइन राइफल मिलेंगी। इसके साथ ही नौसेना के लिए पनडुब्बी मारने वाले 48 आधुनिक हैवीवेट टॉरपीडो भी खरीदे जाएंगे।

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक 2,770 करोड़ रुपए के क्लोज क्वार्टर बैटल कार्बाइन राइफल और उनसे जुड़े उपकरण खरीदे जाएंगे। इसके लिए भारत फोर्ज लिमिटेड और पीएलआर सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ करार किया गया है।

इसके अलावा 1,896 करोड़ रुपए के दूसरे समझौते में नौसेना की कलवरी क्लास पनडुब्बियों के लिए 48 हैवीवेट टॉरपीडो खरीदे जाएंगे। इसके लिए इटली की कंपनी WASS सबमरीन सिस्टम्स SRL से डील हुई है। इन टॉरपीडो की डिलीवरी अप्रैल 2028 से शुरू होकर 2030 की शुरुआत तक पूरी होगी।

मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत लिया गया है, ताकि स्वदेशी और आधुनिक तकनीक से सैनिकों की ताकत को बढ़ाए जा सके। ये लगातार दूसरे दिन रक्षा सौदा किया गया है। इससे पहले सोमवार को 79,000 करोड़ रुपए के रक्षा सौदे को मंजूरी मिली थी।

1 दिन पहले 79,000 करोड़ रुपए के रक्षा सौदे को मंजूरी मिली थी

रक्षा मंत्रालय ने 1 दिन पहले सोमवार को करीब 79,000 करोड़ रुपए के एडवांस हथियार और सैन्य उपकरण खरीदने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में ये फैसला लिया गया था।

इससे नाग मिसाइल खरीदी जाएंगी, जो दुश्मन के टैंक और बंकर तबाह करने में सक्षम हैं। इसके अलावा आत्मघाती ड्रोन भी खरीदे जाएंगे। भारतीय सेना के पास अभी नागस्त्र-1 ड्रोन है, जिसकी रेंज 30 किमी तक है।

नेवी के लिए रिमोटली पॉयलेटेड एयरक्रॉफ्ट सिस्टम (RPAS) भी खरीदा जाएगा। यह भी एक तरह का ड्रोन है। इसे खासतौर से नेवी के लिए डिजाइन किया गया है।

एयरफोर्स के लिए ऑटोमेटिक टेक-ऑफ लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम खरीदा जाएगा। यह एक ऐसी तकनीक है जो किसी विमान या ड्रोन के टेक-ऑफ और लैंडिंग की पूरी प्रक्रिया को अपने-आप रिकॉर्ड कर लेता है। इससे फ्लाइट सेफ्टी में सुधार होगा।

थल सेना के लिए

  • लॉयटर म्यूनिशन सिस्टम: Loiter Munition System (आत्मघाती ड्रोन) खरीद जाएगा। यह दुश्मन के टारगेट पर सटीक हमला करेगा।
  • लो लेवल लाइट वेट रडार्स: छोटे और कम ऊंचाई पर उड़ने वाले ड्रोन/UAS की पहचान और ट्रैकिंग। ड्रोन खतरे से सुरक्षा के लिए इसका उपयोग किया जाएगा।
  • पिनाका मिसाइल: पिनाका रॉकेट सिस्टम की रेंज और सटीकता बढ़ाई जाएगी। हाई वैल्यू टारगेट पर लंबी दूरी से हमला करने में सक्षम है।
  • एंटी ड्रोन सिस्टम: मार्क-II का अपडेट वर्जन खरीदा जाएगा। यह दुश्मनों के ड्रोन की पहचान कर उन्हें हवा में खत्म कर देता है। बॉर्डर एरिया में तैनाती होगी।

नेवी के लिए

  • बोलार्ड पुल (बीपी) टग: एक मजबूत रस्सी खरीदी जाएगी। जिनका इस्तेमाल बंदरगाहों पर बड़े जहाजों को खींचने, मोड़ने के लिए किया जाएगा।
  • एचएफ एसडीआर: हाई फ्रीक्वेंसी सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो लंबी दूरी तक कम्यूनिकेशन में इस्तेमाल किया जाएगा। इसका उपयोग बोर्डिंग और लैंडिंग ऑपरेशन्स के दौरान होता है।
  • (HALE) आरपीएस: हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग रेंज एक तरह का रेडियो सिस्टम होता है। हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी के लिए किया जाता है।

एयरफोर्स के लिए

  • ऑटोमेटिक टेक-ऑफ लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम: एक ऐसी तकनीक/सिस्टम है जो किसी विमान या ड्रोन के टेक-ऑफ और लैंडिंग की पूरी प्रक्रिया को अपने-आप रिकॉर्ड कर लेता है। इससे फ्लाइट सेफ्टी में सुधार होगा।
  • अस्त्र मार्क-II मिसाइल: यह एयर-टू-एयर मिसाइल है। इसका काम दुश्मन के फाइटर विमानों को लंबी दूरी से मार गिराना है। नई खरीद में रेंज पहले से ज्यादा होगी।
  • पायलट सिमुलेटर: तेजस फाइटर जेट के लिए पायलट सिमुलेटर तैयार किया जाएगा। इसका फायदा कम खर्च और ज्यादा सुरक्षित ट्रेनिंग देना है।
  • SPICE-1000 बम: SPICE-1000 ऐसा बम है जो लक्ष्य को पहचान कर उसी पर गिरता है। इसका वजन करीब 1000 पाउंड (लगभग 450 किलो) होता है। इसमें GPS और कैमरा सिस्टम लगा होता है।

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