पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  दिखावा, पाखंड, प्रदर्शन भविष्य में महंगा पड़ता है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: दिखावा, पाखंड, प्रदर्शन भविष्य में महंगा पड़ता है

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48 मिनट पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

अभी दो बातें बहुत बढ़ी हुई हैं। पहली रिलीजियस टूरिज्म। धार्मिक स्थलों पर बहुत भीड़ टूट पड़ रही है। इस कारण उस स्थान पर अव्यवस्थाएं देखने में आ रही हैं। दूसरी बात, प्री-मैरिज काउंसलिंग के केस बढ़ गए हैं। लोग शादी के पहले ही काउंसलर्स के पास पहुंच रहे हैं कि सलाह दीजिए कि लड़की या लड़का- जिसको हम फाइनल करने जा रहे हैं- उस पर निर्णय कैसे करें? अब इन दोनों बातों को जोड़कर देखिए।

डेस्टिनेशन मैरिज का फैशन चला तो कई धार्मिक स्थलों पर बाहर से आकर लोग शादी का आयोजन कर रहे हैं। उस स्थान पर यातायात जाम की, मंदिरों में प्रबंधन द्वारा दुर्व्यवहार की बातें आती हैं। यदि उन लोगों का सर्वे किया जाए- जो धार्मिक स्थल पर गए हैं और पूछा जाए कि दोबारा जाना चाहेंगे- तो 80% उदासीन हो जाएंगे।

क्योंकि अनुभव अच्छा नहीं रहा। ऐसे ही डेस्टिनेशन मैरिज की भव्यता के बाद आज सौ में से अस्सी लोगों का दाम्पत्य जीवन तनावग्रस्त हो जाता है। इन दोनों पर विचार करें तो एक चीज निकलकर आएगी। दिखावा, पाखंड, प्रदर्शन, कहीं का भी हो, भविष्य में महंगा ही पड़ता है।

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