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- Column By Pandit Vijayshankar Mehta We Can Avoid Death, But We Can Avoid Its Agony
6 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
विमान दुर्घटना ने सबके मन में गहरा आघात पहुंचाया है। यही अवसर है कि हम मृत्यु के पीछे का संताप क्या होता है, इसको समझ लें। मृत्यु का ताप तो होता ही है, पर ताप से अधिक संताप होता है। अपनों से बिछड़ जाना। केवल यह कल्पना करना कि उस समय लोगों का क्या हुआ होगा, जब वो हजार डिग्री ताप से झुलसे होंगे।
बहुत सारे लोग, बहुत सारे समय तक असहज रहेंगे इस दुर्घटना के बाद। मैं स्वयं एक महीने में लगभग 15 फ्लाइट लेता हूं। हर फ्लाइट के आरंभ में और जब वो फ्लाइट उतरती है, मैं हनुमान चालीसा का पाठ करता हूं। इससे हम कोई तकनीकी नियंत्रण नहीं कर लेंगे, मृत्यु पर विजय भी नहीं पा लेंगे, लेकिन वो जो संताप होता है, उसको पॉजिटिविटी में बदल सकते हैं।
ब्रह्मा जी ने महाभारत में मृत्यु को कहा था- अगर कोई 7 बातें साध ले तो तुम्हारे संताप से बच जाएगा : लोभ, क्रोध, असूया, मोह, द्रोह, निर्लज्जता और कठोर वाणी। यह मृत्यु के संताप को पैदा करते हैं। अगर इन पर नियंत्रण पा लें तो उस संताप से बच सकते हैं।








