निकलस क्रिस्तॉफ का कॉलम:  ईरान और इजराइल अब एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ रहे हैं
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निकलस क्रिस्तॉफ का कॉलम: ईरान और इजराइल अब एक बड़े संघर्ष की ओर बढ़ रहे हैं

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8 घंटे पहले

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निकलस क्रिस्तॉफ दो बार पुलित्जर पुरस्कार विजेता अमेरिकी स्तम्भकार - Dainik Bhaskar

निकलस क्रिस्तॉफ दो बार पुलित्जर पुरस्कार विजेता अमेरिकी स्तम्भकार

इजराइल ने ईरान पर जो दु:साहसी प्रहार किया है, उससे मध्य-पूर्व में एक और युद्ध छिड़ सकता है। ऐसे में ट्रम्प के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि इस क्षेत्र में अमेरिकी सैनिकों की रक्षा कैसे करें और इस मुसीबत से अमेरिका को जितना सम्भव हो उतना दूर कैसे रखें।

नेतन्याहू ने अपने इस नए सैन्य-अभियान को यह कहकर उचित ठहराया है कि ईरान उसके अस्तित्व के लिए खतरा बन रहा है। और यह सच है कि ईरान ने इतने पैमाने पर यूरेनियम को एनरिच कर लिया था कि उससे इजराइल के लिए चिंताजनक हालात निर्मित हो गए थे।

यूरेनियम एनरिचमेंट एटम बम बनाने की प्रक्रिया है, जिसके तहत यूरेनियम में यूरेनियम-235 के कंसंट्रेशन को बढ़ाया जाता है। माना जा रहा था कि ईरान को कई एटम बम बनाने के लिए जरूरी सामग्री प्राप्त करने में बस कुछ ही सप्ताह बाकी थे, हालांकि बम बनाने और उन्हें डिलीवर करने के तरीके तक पहुंचने में अभी ईरान को बहुत समय लगता।

लेकिन ईरान के बढ़ते खतरनाक मंसूबों का एक प्रमुख कारण ईरान के साथ अपने व्यवहार में नेतन्याहू और ट्रम्प द्वारा अतीत में की गई भारी गलतियां भी थीं। नेतन्याहू के मजबूत समर्थन के चलते ट्रम्प ने 2018 में ओबामा द्वारा किए परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया था, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को काफी हद तक नियंत्रित किया गया था।

ट्रम्प को उम्मीद थी कि इसके बाद ईरान घुटनों पर चलकर उनके पास आएगा और रियायतों की मांग करेगा। लेकिन ईरान ने इसके उलट अपने यूरेनियम एनरिचमेंट में तेजी ला दी। एक पूर्व इजराइली सुरक्षा अधिकारी ने 2018 की डील को रद्द करने के फैसले को एक हादसा बताया है, वहीं दूसरे ने कहा है कि यह एक ऐतिहासिक भूल थी।

नेतन्याहू की आक्रामकता तब भी काम नहीं आई थी, और अब भी इसके कारगर होने की संभावना नहीं लगती। ईरान पर इजराइल की हालिया बमबारी का मकसद ईरान के साथ मूल परमाणु समझौते को कुछ हद तक बहाल करने के ट्रम्प के हालिया कूटनीतिक प्रयासों को कमजोर करना भी हो सकता है।

इस पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी कि इजराइल की ईरान पर इस बमबारी के क्या परिणाम होते हैं। लेकिन इस बात पर हमेशा से संदेह किया जाता रहा है कि क्या ईरान के परमाणु-कार्यक्रम स्थल को नष्ट किया जा सकता है? कम से कम अमेरिकी बंकर-बस्टर बमों के बिना तो यह मुमकिन नहीं है, क्योंकि वह जमीन के भीतर बहुत गहराई में स्थित है।

यह स्पष्ट नहीं है कि इसे निशाना बनाया गया है या नहीं। इजराइल ने उन आवासों पर भी बमबारी की है, जहां परमाणु वैज्ञानिक रहते हैं, और यह कदम अधिक असरदार हो सकता है। सैन्य विशेषज्ञ वर्षों से कहते आ रहे हैं कि ईरान के लिए अपने सेंट्रीफ्यूज बदलना सरल है, लेकिन नए परमाणु वैज्ञानिकों को खोजना उसके लिए टेढ़ी खीर होगी।

लेकिन नतीजे उलटे भी हो सकते हैं, क्योंकि इस तरह के हमले ईरान के परमाणु हथियारों के लिए अभियान को और तेज कर सकते हैं। इसके लिए ईरानी नेताओं द्वारा तर्क दिया जाएगा कि इससे पता चलता है उनके मुल्क को न्यूक्लियर डिटरेंट की कितनी आवश्यकता है। न्यूक्लियर डिटरेंट उस स्थिति को कहते हैं, जब किसी देश के परमाणु-हथियार सम्पन्न होने पर दूसरे देश उस पर हमला करने से बचते हैं।

यहां इस बात को याद रखना जरूरी है और ईरान की मेरी रिपोर्टिंग-यात्राओं में भी यह सामने आया है कि ईरान के लोगों में उनकी हुकूमत बहुत अलोकप्रिय हो चुकी है। आम ईरानी श्रमिक, किसान आदि लगातार भ्रष्टाचार, पाखंड और आर्थिक कुप्रबंधन के बारे में शिकायत करते रहते हैं। इसके बावजूद विदेशी हमले की स्थिति में वे सभी ईरानी झंडे के नीचे एकजुट होंगे।

यह तय है कि ईरान इजराइल पर जवाबी हमला बोलेगा। लेकिन सवाल यह है कि क्या वह इराक, बहरीन या मध्य-पूर्व में कहीं और अमेरिकी ट्रुप्स को भी निशाना बनाएगा और किस हद तक? हम मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव को एक ऐसे बड़े क्षेत्रीय युद्ध की ओर जाते देख सकते हैं, जिसे कोई नहीं चाहता।

युद्ध की स्थिति में अमेरिकी सैनिक और दूतावास भी खतरे में होंगे, और ट्रम्प के लिए उन्हें बचाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि वे अमेरिका को इस लड़ाई से दूर रखें और परमाणु-समझौते को फिर से शुरू करने का प्रयास करें।

आर्म्ड सर्विस कमेटी के शीर्ष डेमोक्रेट सेनेटर जैक रीड ने चेताया है कि नेतन्याहू ने आक्रामकता को बढ़ाने में लापरवाही का प्रदर्शन किया है, जो एक व्यापक क्षेत्रीय-हिंसा को भड़का सकता है। वे सही हैं। ट्रम्प ने अभी तक विदेशी संघर्षों में अमेरिका को उलझाने से कोताही बरती है और आशा है कि ईरान के मामले में भी वे ऐसा ही करेंगे।

माना जा रहा था कि ईरान को कई एटम बम बनाने के लिए जरूरी सामग्री प्राप्त करने में बस कुछ ही सप्ताह बाकी थे। हालांकि बम बनाने और उन्हें डिलीवर करने के तरीके तक पहुंचने में अभी ईरान को बहुत समय लगता। (द न्यूयॉर्क टाइम्स से)

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