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- Pt. Vijayshankar Mehta’s Column The Habit Of Telling Lies Like Truth Should Not Come In Our House
4 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
घर-गृहस्थी में सबसे संवेदनशील संवाद पति-पत्नी के बीच घटता है। इनकी वाणी, इनके शब्द यदि संतुलित न हुए तो कीमत पूरा परिवार और खासतौर पर बच्चे चुकाते हैं। घर के बाहर का जीवन तो अब शब्द-वाणी के मामले में बिल्कुल अलग हो गया है।
बाहर की दुनिया में आप जाएं तो पता लगेगा कि आजकल ज्यादातर लोग सच जैसा झूठ बोलते हैं। लेकिन ये आदत घर में ना आ जाए। हमारे यहां ऐसा कहा जाता है कि बच्चों को झूठ बोलना बिल्कुल ना सिखाएं और माता-पिता जब घर में बच्चों से बात कर रहे हों तो सत्य सामने आना चाहिए।
लेकिन यही बात पति-पत्नी के रिश्ते में भी है। पति-पत्नी यदि आपस में कर्कश-वाणी ना भी बोलें तो चुभने वाले संवाद कह देते हैं। बातचीत तो होती नहीं है, टीका-टिप्पणी में ही पूरा समय निकल जाता है। पति-पत्नी के वार्तालाप बहुत अपरिपक्व, अशांतिपूर्ण हो गए हैं। ऐसे में परिवारों को आने वाले समय में नुकसान होगा। इसलिए शब्द संतुलित हों, पारदर्शी हों और प्रेमपूर्ण हों।








