पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  अपनी कामनाओं पर केवल नियंत्रण नहीं मास्टरी भी रखें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अपनी कामनाओं पर केवल नियंत्रण नहीं मास्टरी भी रखें

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1 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

मनुष्य का शरीर मिला है तो कामनाएं तो होंगी। इच्छाओं से कौन बचा है? तो बेकार में इच्छाओं को मारिए मत। कामनाओं के साथ भी जीना सीखिए। हर इंसान के अंदर बहुत सारी कामनाएं होती हैं। एक कामना ऐसी भी रखें कि जो परमात्मा दे दे, वह स्वीकार हो।

जिस दिन यह इच्छा भीतर उतर आए, फिर सारी इच्छाएं आपकी गुलाम हैं। अपनी कामनाओं पर केवल नियंत्रण ना रखें, उन पर मास्टरी रखना है। मास्टरी शब्द बना है- प्रभुत्व और विजय- इन दोनों से मिलकर। नियंत्रण यदि क्रिया है तो मास्टरी आर्ट है।

श्रीकृष्ण अश्व-मनोविज्ञान के जानकार थे, लेकिन उनका घोड़ों पर केवल नियंत्रण नहीं था- मास्टरी थी। तो हम श्रीकृष्ण से सीखें कि जीवन में जब भी कोई काम करें, उसमें मास्टरी होनी चाहिए। नियंत्रण तो गलत से गलत आदमी भी कर लेता है। लेकिन जब हम मास्टरी में दक्ष हो जाएंगे, तो हम जो भी करेंगे, वह शत-प्रतिशत परिणाम देने वाला बन जाएगा। और यदि असफलता मिल भी गई तो हम ये मानेंगे कि यहां समापन नहीं है, एक नई शुरुआत है।

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