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- Pt. Vijayshankar Mehta’s Column What Is Your Way Of Dealing With Situations
2 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
कहते हैं मृत्यु का अंधेरा हो तो जीवन की बिजली जोर से चमकती है। इसे यूं समझें कि जब हम दबाव और थकान में हों तो मान लेते हैं कि हम बाहर से नहीं, भीतर से भी दबाव और थकान में हैं। ऐसा होता नहीं है। यदि हमारा शरीर थका हुआ हो, दबाव महसूस करे, तो उसी समय हमारे भीतर कहीं बारीकी से एक स्फूर्ति, एक विश्राम की वृत्ति भी अंगड़ाई ले रही होती है।
हम उसे पकड़ नहीं पाते। यदि पकड़ लें तो बाहर की स्थितियां नियंत्रित हो जाएंगी। देश में 60% लोग बर्नआउट यानी थकान के शिकार हैं। यह थकान कहां से आती है? घर से। जहां आप काम करते हैं वहां के माहौल से।
और इन दोनों को प्रभावित करती है निजी सोच कि स्थितियों से निपटने का आपका तरीका कैसा है। लेकिन आपके भीतर एक वृत्ति है, जो बहुत स्फूर्त है, पॉजिटिव है। अगर आप कार्यस्थल पर परेशान हों, परिवार में दिक्कत आए, तो बाहर के लोगों पर मत टिकिए। भीतर उतरिए। फिर देखिए, आपको कोई परेशान नहीं कर सकता।








