पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  डिजिटल नहीं स्पिरिचुअल अरेस्ट हों तो सुख मिलेगा
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: डिजिटल नहीं स्पिरिचुअल अरेस्ट हों तो सुख मिलेगा

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40 मिनट पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

बड़े-बूढ़ों को समझना पड़ेगा कि डिजिटल लाइफ अब टाइम पास नहीं रहा। इसका व्यवस्थित प्रशिक्षण उन्हें दिया जाना चाहिए। पुरानी कहावत है कि वेश्या के कोठे पर नाच-गाना देखने वाले ये बात जानते थे कि ये अपराध का अड्‌डा है। और जिस दिन अपराध घटेगा, नाच देखने का शौक महंगा पड़ जाएगा। ये डिजिटल दुनिया बिल्कुल ऐसी ही हो गई है।

8 हजार करोड़ से अधिक के अपराध डिजिटल अरेस्ट के माध्यम से हो चुके हैं और खास तौर पर शिकार बड़े-बूढ़े ही बने। हमारे देश का आंकड़ा हमें बता रहा है कि समय आ गया है नए बच्चों की तरह इन पुराने लोगों को भी समझाना पड़ेगा, प्रशिक्षित करना पड़ेगा। अच्छा तो यह है कि डिजिटल अरेस्ट होने के पहले स्पिरिचुअल अरेस्ट होना समझ लें। जैसे-जैसे उम्र बढ़े, ईश्वर से अधिक जुड़ो।

इसके लिए आंख बंद करके, भीतर उतरकर अपनी आत्मा को स्पर्श करना पर्याप्त है। और ऐसा स्पिरिचुअल अरेस्ट सुख ही देगा। वरना दु:ख देने के लिए तो छोटा खिलौना हाथ में आ ही चुका है।

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