पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  अपने काम से प्रेम करिए तो कर्म बोझ नहीं लगेगा
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अपने काम से प्रेम करिए तो कर्म बोझ नहीं लगेगा

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4 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

आजकल ट्रांसफरेबल स्किल्स का जमाना है। इसे सीधी भाषा में कहें तो किसी एक काम में दूसरे काम के कौशल को उतारना। जैसे इंटरपर्सनल कम्युनिकेशन, समय प्रबंधन, डेटा विश्लेषण। एक ही काम में इन सबको जोड़ना पड़ेगा। यह प्रबंधन के ढंग हैं।

अब इसी में अगर अध्यात्म का सहारा लें तो ऋषि-मुनियों ने शास्त्रों में एक स्किल और बताई है, और वो है प्रेम। ये हर जगह काम आएगी। काकभुशुंडि जी ने जब गरुड़ जी को कथा सुनानी शुरू की तो तुलसीदास जी ने लिखा- प्रथमहिं अति अनुराग भवानी, रामचरित सर कहेसि बखानी।

भवानी, पहले तो उन्होंने बड़े ही प्रेम से रामचरितमानस सरोवर का रूपक समझाकर कहा और फिर आगे कथा बढ़ाई। यह बात शिव जी पार्वती जी को कह रहे हैं। कथा में बोलते समय उन्होंने प्रेम उतारा।

वक्तव्य में प्रेम हो तो मिठास, अपनापन, वाणी की गरिमा अपने आप आ जाती है। जो भी काम करें, प्रेम से करें और सबसे बड़ी बात तो यह है कि अपने काम से प्रेम करिए तो आपका कर्म आपको बोझ नहीं लगेगा।

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