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- Pt. Vijayshankar Mehta’s Column: Become Eager In The Service Of Ram, And Prompt In The Affairs Of Governance.
2 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
देश-सेवा में तत्पर रहें और देव-सेवा में आतुर रहें। वैसे तो विवेकानंद जी कहते हैं, देश ही पहला देव है। हम भारत को और परमात्मा के जिस स्वरूप को हम पूजते हों- बराबर रखें। इन दो शब्दों पर ध्यान दें- तत्पर होना और आतुर रहना। भाषा की दृष्टि से तो तत्पर कटिबद्ध व्यक्ति है। जो सकारात्मक होकर अनुशासित भाव से काम करे, वो तत्पर। आतुर में एक उतावलापन है, परिणाम प्राप्त होने की बेचैनी है, कहीं-कहीं अशांति है।
लेकिन तुलसीदास जी ने हनुमान चालीसा की सातवीं चौपाई में लिखा है- विद्यावान गुनी अति चातुर, राम काज करिबे को आतुर। ये आतुर शब्द हनुमान जी पर जमता है क्या? असल में राम काज शब्द को समझेंगे तो आतुर के अर्थ बदल जाएंगे। ईश्वर का काम करने में तत्पर से अधिक आतुर रहिए और देश का काम करने में आतुर से अधिक तत्पर रहिए। परमात्मा को जीवन में लाना हो तो उतावलापन करने में दिक्कत नहीं। व्याकुलता ही तो हमारे अधूरेपन में ईश्वर को भरेगी।









