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- Pt. Vijayshankar Mehta’s Column Work Should Be Done On Saving The Inner Layer Of Temples
32 मिनट पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
प्रत्येक देवस्थल में दो परतें होती हैं। एक दिव्यता की और दूसरी व्यवस्था की। वो स्थान जिस बात से चैतन्य होता है, वो आंतरिक परत है। जो देवता वहां स्थापित हैं, उसका प्रभाव वहां के रज-कण में होता है। दूसरी परत व्यवस्था की है।
जो लोग उस मंदिर का संचालन कर रहे हैं, चाहे वो पुजारी हों या प्रशासन, वो व्यवस्था की परत को इतना उलझा लेते हैं कि लोग परमात्मा को भूल कर व्यवस्था में जुट जाते हैं। आज अधिकांश मंदिरों में हम देखते हैं कि व्यवस्था के पीछे अव्यवस्था और भ्रष्टाचार चलने लगा है।
मंदिरों में दर्शन के लिए भ्रष्टाचार हो सकता है, ऐसा सुनकर आश्चर्य होता है, पर ऐसा होने लगा है। बारह ज्योतिर्लिंगों में से उज्जैन का महाकालेश्वर कई मामलों में अनूठा है। जैसे यहां भस्मारती होती है और कहीं नहीं होती। पर यहां अनेक लोग अब कहने लगे हैं कि हम आते हैं आंतरिक परत से जुड़ने के लिए और उलझ जाते हैं व्यवस्था की परत में। ऐसा और भी मंदिरों में हो रहा है। मंदिर व्यवस्था से जुड़े लोगों को इस पर विचार करना चाहिए।








