पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  जैसे ही बुरा विचार मन में आए, प्रारंभ में ही रोक देना
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: जैसे ही बुरा विचार मन में आए, प्रारंभ में ही रोक देना

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  • Pt. Vijayshankar Mehta’s Column As Soon As A Bad Thought Comes Into Your Mind, Stop It At The Very Beginning

2 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

आज जिस दौड़-भाग, संग्रह की दुनिया में हम रह रहे हैं, भगवान महावीर के ये वचन हमारे बड़े काम के हैं- अपरिग्रह को आग्रह के साथ जीवन में उतारिए। अपरिग्रह का अर्थ होता है- अभाव का आनंद। कम साधन में अधिक संतुष्टि। आज जिसे देखो, वो अशांत है। और अशांति का कारण मन है।

महावीर ने तो इतनी बारीक बात बोली है कि मन में यदि थोड़ा-सा भी, क्षणिक भी बुरा विचार आ जाए तो उसे हिंसा मान लेना। इसलिए वो कहते थे कि मन, वचन और कर्म से कुचेष्टाओं का त्याग कर दो तो शांति दौड़कर चली आएगी।

आज महावीर जयंती पर संकल्प लें कि जैसे ही बुरा विचार मन में आए, उसको प्रारंभ में ही रोक देना। अगर जरा-सा भी मौका दिया, तो आगे बढ़ते हुए और खासतौर पर बीच में जाकर दुर्गुण मजबूत हो जाते हैं। और इतने मजबूत हो जाते हैं कि आपको फिर लौटने नहीं देते। फिर वो परिणाम पर ले जाकर पटकते हैं। इसलिए आरंभ में ही सावधान हो जाओ। मन में ही दुर्गुण को समाप्त कर दो। वचन और कर्म में अत्यधिक शुद्ध रहो।

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