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- Pt. Vijayshankar Mehta’s Column Speech And Behavior Are Important While Setting Limits In Relationships
5 घंटे पहले
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पं. विजयशंकर मेहता
जिंदगी में हर बात की अपनी सीमा होती है। हमारे यहां इसको लक्ष्मण-रेखा भी कहा जाता है। लक्ष्मण-रेखा के कितना इस पार रहना और कितना उसको लांघना, यह हमें विवेक बताता है। सीमारेखा के प्रयोग रिश्ते निभाने में भी करें। जैसे माता-पिता से सम्मान और सेवा की एक सीमा हमें बनानी चाहिए। और कभी सीमा लांघनी भी पड़े तो संकोच नहीं करना चाहिए, कम से कम इस रिश्ते में। जीवनसाथी के साथ रिश्ता निभाते समय आत्मसम्मान की सीमा कभी ना लांघें।
आपकी पत्नी या पति का अपना आत्मसम्मान है, उसे कभी ठेस ना पहुंचाएं। बच्चों के साथ समय की सीमा होनी चाहिए। उन्हें दिया जाने वाला समय तय करें और उतना समय उन्हें जरूर दें। रिश्तेदारों और मित्रों के साथ सहयोग की सीमा तय करें। और यदि कभी आपको सीमा लांघनी पड़े तो वास्तविकता और विनम्रता के साथ अपनी बात कहें। रिश्तों में सीमा तय करते समय वाणी और व्यवहार बड़े महत्वपूर्ण हैं। और जब रिश्तों की सीमा तय करके उसको निभाते हैं तो उसमें थक मत जाइए।








