पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  अपनी रक्षा अपने को ही करना, ऐसा दौर आ गया है
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: अपनी रक्षा अपने को ही करना, ऐसा दौर आ गया है

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3 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

विपरीत शरीर के प्रति आकर्षण मनुष्य का स्वभाव है और अगर इसे ठीक से नहीं सम्हाला गया तो कमजोरी भी। स्त्री-देह के प्रति पुरुष का आकर्षण विचारों के स्तर पर अमर्यादित ज्यादा होता है। यह स्वभाव का मामला है। इसलिए महिलाओं को समाज में अत्यधिक सावधानी रखनी पड़ेगी।

हमारी बहन-बेटियां खासतौर पर उस समय बहुत सावधान रहें, जब कोई परि​चित या अपरिचित पुरुष आपकी अत्यधिक निकटता प्राप्त कर रहा हो। आप किसके घर जा रही हैं, कौन आपके घर आ रहा है- ये सामाजिक और पारिवारिक रहन-सहन ही नहीं, बहुत सावधानी का विषय है।

लव-जिहाद जैसे अपराध के पीछे कहीं न कहीं हमारी लापरवाही भी है। पुरुष स्त्री के प्रति अप्रिय विचार रखेगा, लेकिन आदत को अवसर मिल गया तो फिर वह हरकत करेगा। ये अपराध करने वाले लोग अपने को नायक की तरह प्रस्तुत करते हैं। और एक उम्र में नायक का आकर्षण बना ही रहता है। इसलिए सावधान रहें, क्योंकि अपनी रक्षा अपने को ही करना है, ऐसा दौर आ गया है।

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