पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  वाणी का विष उगलने वाले श्रीकृष्ण की बात याद रखें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: वाणी का विष उगलने वाले श्रीकृष्ण की बात याद रखें

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2 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

कुछ ऊपरवाला मेहरबानी कर दे, कुछ हम परिश्रम करें तो ख्याति मिल जाती है। लेकिन इन दिनों लोगों ने एक शॉर्टकट निकाल लिया है। सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा कर दो, दुनिया जान जाएगी। प्रसिद्धि प्राप्त करने के लिए वाणी, विचार और व्यवहार- तीन रास्ते कभी अपनाए जाते थे। इसमें से लोगों ने वाणी वाला रास्ता पकड़ लिया। विष उगल दो, छा जाओगे। फिर आजकल बदनामी भी हो जाए तो भी लोग उसे नाम होना मानते हैं।

महाभारत के एक संवाद की बहुत चर्चा की जाती है। द्रौपदी दुर्योधन के गिरने पर हंसी और कहा कि अंधे के बेटे अंधे होते हैं। महाभारत में इसका प्रमाण नहीं मिलता। इतना जिक्र आता है कि दुर्योधन ने बाद में धृतराष्ट्र को यह संवाद द्रौपदी के नाम से बोला। दुर्योधन जैसे लोग ऐसे ही संवाद बोलते हैं, लेकिन जब द्रोपदी का अपमान किया जा रहा था, तब दुर्योधन व कर्ण ने जो संवाद बोले, वो तो लिखे भी नहीं जा सकते।

वाणी का विष उगलने वालों को याद रखना पड़ेगा कि भगवान कृष्ण वस्त्रावतार लेकर आए थे और उन्होंने कहा था कि जो वाणी से गिरेगा, मैं उसे जीवन से भी गिराऊंगा।

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