पं. ​विजयशंकर मेहता का कॉलम:  भक्ति की भनक न लगने देना, अहंकार आ जाता है
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पं. ​विजयशंकर मेहता का कॉलम: भक्ति की भनक न लगने देना, अहंकार आ जाता है

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8 घंटे पहले

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पं. ​विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. ​विजयशंकर मेहता

यह वो वक्त है, जब टीलों को भी पर्वत की चोटी बताया जाता है। इसको पाखंड भी कहते हैं। अगर कोई पाखंडी सामने हो तो उसका मुकाबला करने के लिए हमें अपने सत्य और वास्तविकता को बहुत बुद्धिमानी से, सावधानी से उजागर करना पड़ता है। जीवन में रहस्य उजागर करना और भनक न लगना, ये दो सावधानियां कभी-कभी रखनी पड़ती है।

हमारे देश ने इस बात का कोई रहस्य नहीं रखा था कि जो भी गलत किया गया, उसका दंड उन्हें दिया जाएगा। यह बात बिलकुल खुले रूप से कही गई थी तो रहस्य था भी नहीं। लेकिन कब करेंगे, कैसे करेंगे, इसकी भनक नहीं लगने दी। भक्ति के संसार में गुरु अपने शिष्यों को सिखाते हैं कि अपनी भक्ति की भनक लगने मत देना, वरना सात्विक अहंकार आ जाता है।

जैसे हमारे भीतर कोई अच्छाई हो तो उसकी सुगंध अपने आप लोगों तक पहुंचेगी, पर आप भनक मत लगने देना। सिर्फ इसलिए कि भनक लगने से आपका अहंकार बढ़ सकता है। महत्वपूर्ण निर्णयों की यदि भनक न लगने दी जाए तो उनको सफलता तक पहुंचाना आसान हो जाता है।

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