पेड़ जवाब नहीं देते, पर तन्हाई बांट लेते हैं:  मिशिगन यूनिवर्सिटी के ट्री एक्सपर्ट ने बताया- हमारे भीतर छुपा होता है ‘पसंदीदा पेड़’
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पेड़ जवाब नहीं देते, पर तन्हाई बांट लेते हैं: मिशिगन यूनिवर्सिटी के ट्री एक्सपर्ट ने बताया- हमारे भीतर छुपा होता है ‘पसंदीदा पेड़’

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डेट्रॉइट की वह दोपहर आज भी आरजे लावेर्न की यादों में घाव की तरह ताजा है। वह महज 8 साल के थे, जब उन्होंने अपनी खिड़की से देखा कि बड़े-बड़े ट्रक उनके मोहल्ले की शांत सड़क पर खड़े हैं। एक-एक कर ‘एल्म’(नीम जैसे छायादार) के पेड़ों को काटा जा रहा था, जिन्होंने पूरे मोहल्ले को ढंक रखा था। जब लावेर्न के घर के सामने वाले पेड़ पर आरी चली, तो उन्हें लगा जैसे उन्होंने कोई पालतू जानवर खो दिया हो। लावेर्न कहते हैं, हम अक्सर पालतु जानवरों के साथ रिश्तों की बात करते हैं, पर पेड़ भी सबसे अच्छा दोस्त हो सकता है? यह परस्पर रिश्ता है। पेड़ हमें छाया देते हैं, हवा साफ करते हैं व बाढ़ से बचाते हैं। वे सिर्फ इसलिए प्यारे नहीं होते कि कार्बन सोख रहे हैं; हमारा जुड़ाव इससे कहीं गहरा व रूहानी होता है। पेड़ों के प्रति इसी समर्पण ने लावेर्न को मास्टर ‘अर्बोरिस्ट’ (ट्री एक्सपर्ट) बना दिया। वे मिशिगन टेक में वानिकी के प्रोफेसर भी हैं। वे छात्रों को इनोवेटिव तरीके से पेड़ों से जुड़ने के लिए प्रेरित करते हैं। छात्रों से कहते हैं,‘बाहर जाओ, पेड़ चुनो और उसे अपना परिचय दो। सुनने में यह अजीब लग सकता है, पर यह इस बात की स्वीकृति है कि आप जीवित प्राणी के पास खड़े हैं।’ वे सलाह देते हैं कि पेड़ के पास 10 मिनट मौन होकर बैठें, उसकी छाल को छुएं, पत्तों के बीच से आती हवा की सरसराहट सुनें और महसूस करें कि वह क्या कह रहा है। प्रकृतिवादी होली वोर्टन कहती हैं,‘हम पेड़ों को अक्सर ‘बेजान’ की तरह देखते हैं। अगर दिमाग खुला रखें, तो पेड़ हमसे बात करते हैं। वे कहती हैं,‘एक बार ओक के पेड़ ने उन्हें कहानी सुनाई कि कैसे उसके सारे परिवार (बाकी पेड़ों) को काट दिया गया और वह अकेला रह गया। शोध में खुलासा- पेड़ों से तीन तरह से जुड़ते हैं रिश्ते फिनलैंड में हुए शोध के अनुसार, लोगों का कोई न कोई ‘पसंदीदा पेड़’ जरूर होता है। शोधकर्ता कैसा वैनियो ने पाया कि ये रिश्ते तीन तरह के होते हैं- इसकी पहली कड़ी ‘यादों’ से जुड़ी है, जिसमें लोग उन पेड़ों को अपना मानते हैं जिन्हें बचपन से साथ बढ़ते देखा। दूसरा रूप ‘देखभाल’ का है; यह वह आत्मीय रिश्ता है जो खुद अपने हाथों से रोपे और सींचे गए पौधे के साथ विकसित होता है। वहीं, तीसरा आयाम ‘प्रशंसा’ पर टिका है, जहा‍ं कोई बहुत पुराना, विशाल या अपनी अनोखी बनावट से अचंभित कर देने वाला ‘करिश्माई पेड़’ इंसान के मन में श्रद्धा और विशेष लगाव पैदा कर देता है।



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