14 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल
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सवाल- मैं लखनऊ से हूं। मेरा 21 साल का बेटा 12वीं करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन कर रहा है। वह पढ़ाई में काफी अच्छा है। लेकिन पिछले कुछ समय से मुझे लग रहा है कि उसका ध्यान पढ़ाई से भटक गया है। कुछ दिन पहले मुझे उसके दोस्तों से पता चला कि वह स्टूडेंट पॉलिटिक्स में एक्टिव हो गया है। वह पढ़ाई से ज्यादा उसे प्राथमिकता देता है और अक्सर देर रात तक बाहर घूमता रहता है।
हमारा फैमिली बैकग्राउंड बहुत मजबूत नहीं है। मैं एक छोटी सी नौकरी करके उसे पढ़ा रहा हूं। ऐसे में मुझे उसके भविष्य की चिंता हो रही है। मुझे डर है कि स्टूडेंट पॉलिटिक्स उसके करियर में बाधा न बन जाए। मैं चाहता हूं कि वह अपनी जिम्मेदारी समझे और अपने करियर को प्रिऑरिटी दे। मैं उसे इस बारे में कैसे समझाऊं कि वह मेरी बात सुने और समझे कि यह समय उसके करियर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है? कृपया मुझे सही और उचित सलाह दें।
एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर
जवाब- एक पिता के रूप में आपकी चिंता बिल्कुल जायज है। जिस तरह आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद आपने बेटे को पढ़ने के लिए दिल्ली जैसे शहर में भेजा है, उससे ये पता चलता है कि बेटे से आपकी तमाम उम्मीदें हैं। ऐसे में उसका पढ़ाई से ध्यान भटकने पर बेचैनी होना स्वाभाविक है। लेकिन ऐसे वक्त पर डर या गुस्से से नहीं, बल्कि समझदारी और धैर्य से काम लेना चाहिए।
सबसे पहले तो आप अपने मन से यह धारणा निकाल दीजिए कि स्टूडेंट पॉलिटिक्स पूरी तरह गलत या करियर के लिए बाधा है। कई बार इससे छात्रों को काफी कुछ सीखने को भी मिलता है। लेकिन हां, ये पढ़ाई और करियर की कीमत पर बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिए। इसलिए आप उसे रोकने की बजाय सही मार्गदर्शन दें। उसे समझाएं कि अगर वह राजनीति में भी कुछ करना चाहता है तो पढ़ाई और करियर को प्राथमिकता देकर ही आगे बढ़ सकता है। इसके साथ ही बातों ही बातों में आप अपने बेटे से ये 6 सवाल पूछें।

इन सवालों से यह समझने में मदद मिलेगी कि स्टूडेंट पॉलिटिक्स उसके लिए सिर्फ एक शौक है या वह इसे भविष्य के रूप में देख रहा है। अगर वह इसे फुल टाइम के लिए करना चाह रहा है तो उसे समझाएं कि राजनीति के लिए आगे भी समय है। लेकिन अभी का समय उसके करियर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही कुछ और बातों का ध्यान रखें।

समझदारी से बात करें
पॉलिटिक्स में एक्टिव बच्चे अक्सर अपने विचारों और जुनून के कारण घर वालों से बहस कर लेते हैं। ऐसे में डांटना या रोकना उसकी नाराजगी और बढ़ा देता है। बेहतर यह है डांटने या प्रतिबंध लगाने के बजाय एक शांत माहौल में बेटे से बात करें।
उसे यह एहसास दिलाएं कि आप उसके फैसले को सम्मान करते हैं। लेकिन उसके भविष्य को लेकर चिंतित भी हैं। आप उससे कह सकते हैं कि “बेटा, अगर राजनीति में तुम्हारी रुचि है तो मैं तुम्हें रोकूंगा नहीं। लेकिन ये समझो कि तुम्हें पहले अपने पैरों पर खड़ा होना होगा ताकि आगे तुम्हें किसी पर निर्भर न रहना पड़े।” इससे बेटा डिफेंसिव नहीं होगा और आपकी बात सुनेगा। आप उसे यह भी याद दिला सकते हैं कि आप सीमित कमाई से उसे पढ़ा रहे हैं और यह सपोर्ट स्थायी नहीं है।

जिम्मेदारी का अहसास कराएं
बेटे को यह समझाने की कोशिश करें कि हर सपने को पूरा करने के लिए मजबूत बुनियाद की जरूरत होती है। राजनीति में सफल होने के लिए भी पढ़ाई, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट और आर्थिक स्थिरता बेहद जरूरी है। आप उसे उदाहरण देकर समझा सकते हैं कि जिन बड़े नेताओं को वह पसंद करता है, उन्होंने भी पहले अपने करियर को मजबूत किया और फिर राजनीति में उतरे।
करियर की अहमियत समझाएं
राजनीति आकर्षक लग सकती है, लेकिन बिना करियर और शिक्षा के उसमें टिकना मुश्किल होता है। बेटे को समझाएं कि मजबूत करियर उसकी राजनीतिक पहचान को और विश्वसनीय बनाता है।
उसे उदाहरण देकर बताएं कि पढ़ाई पूरी करने से वह बेहतर सोच, गहरी समझ और निर्णय लेने की क्षमता पा सकेगा। करियर को राजनीति का विकल्प नहीं, बल्कि सहारा बताएं। ऐसा सहारा, जो उसे भीड़ से अलग पहचान देगा। उसे दिखाएं कि राजनीति और शिक्षा एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हो सकते हैं। इससे उसमें भविष्य की सुरक्षा और आगे बढ़ने की प्रेरणा दोनों जागेंगी।
पढ़ाई पर फोकस के लिए प्रेरित करें
बेटे को यह एहसास कराना जरूरी है कि पढ़ाई छोड़ देने से वह राजनीति में भी सीमित रह जाएगा। पढ़ाई पर ध्यान बनाए रखने के लिए उसके साथ एक नियमित टाइम-टेबल बनाएं, जिसमें राजनीति और पढ़ाई दोनों के लिए समय तय हो।
छोटे-छोटे एजुकेशनल टारगेट तय करवाएं और उन्हें पूरा करने पर तारीफ करें। उसे यह बताएं कि पढ़ाई सिर्फ डिग्री पाने के लिए नहीं, बल्कि सोच और समझ को गहरा करने के लिए है। जब वह देखेगा कि पढ़ाई से उसकी पॉलिटिकल डिबेट्स मजबूत हो रहे हैं तो वह खुद-ब-खुद पढ़ाई पर फोकस करने लगेगा।
पढ़े-लिखे सफल नेताओं के उदाहरण दें
बेटे को प्रेरित करने के लिए उसे उन नेताओं की कहानियां बताएं, जिन्होंने पढ़ाई और अनुशासन को राजनीति के साथ जोड़ा। जैसे महात्मा गांधी, डॉ. भीमराव अंबेडकर या आधुनिक समय के शिक्षित नेताओं के उदाहरण उसे यह सिखाएंगे कि शिक्षा राजनीति में स्थिरता लाते हैं। उसे यह भी समझाएं कि जनता पढ़े-लिखे नेताओं को ज्यादा भरोसेमंद मानती है क्योंकि वे तर्क और तथ्यों के आधार पर निर्णय लेते हैं। जब बेटा इन उदाहरणों को देखेगा तो उसे एहसास होगा कि पढ़ाई उसकी राजनीतिक पहचान को और मजबूत बना सकती है।
उसके साथ ज्यादा वक्त बिताएं
यह समय सिर्फ समझाने या पढ़ाई की बात करने के लिए नहीं है। हो सके तो इस समय उसके साथ थोड़ा समय बिताएं। जब वह आपके साथ सहज महसूस करेगा तो अपने मन की बातें भी आसानी से साझा करेगा।
उसके दोस्तों को जानें और रुचि लें
बेटे के राजनीतिक रुझान पर उसकी संगत का गहरा असर पड़ता है। इसलिए यह जानना जरूरी है कि वह किन दोस्तों के साथ समय बिता रहा है। बिना जज किए उसके दोस्तों में रुचि लें, उन्हें घर बुलाएं और उनसे बातचीत करें। इससे बेटे को यह लगेगा कि आप उसकी दुनिया को समझने की कोशिश कर रहे हैं, न कि रोक-टोक कर रहे हैं। साथ ही दोस्तों के स्वभाव और आदतों को जानने से आपको अंदाजा लगेगा कि वह सही दिशा में जा रहा है या नहीं। अगर दोस्त अच्छे हों तो आपका बेटा भी उनसे प्रेरित होगा।
गलत संगत और लड़ाई-झगड़े से बचने की सलाह दें
राजनीति में अक्सर ऐसे लोग भी मिलते हैं जो गलत तरीकों से काम करते हैं या हिंसक गतिविधियों में शामिल होते हैं। बेटे को चेताएं कि ऐसे माहौल से दूर रहना जरूरी है, क्योंकि एक गलत कदम उसके करियर और छवि को हमेशा के लिए नुकसान पहुंचा सकता है।
जरूरत हो तो साइकोलॉजिस्ट की मदद लें
अगर आपको लगे कि बेटे का गुस्सा, निराशा या गलत फैसले बढ़ते जा रहे हैं तो साइकोलॉजिस्ट से मदद लेना समझदारी है। ऐसे हालात में कभी-कभी फैमिली काउंसिलिंग बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है।
अंत में यही कहूंगी कि पॉलिटिक्स में एक्टिव होना गलत नहीं है। लेकिन पढ़ाई और करियर की मजबूत नींव के बिना यह रास्ता अस्थिर हो सकता है। माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे बच्चे को सपनों और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना सिखाएं, ताकि वह एक समझदार, पढ़ा-लिखा और प्रभावशाली नेता बन सके।
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