पौष मास शुक्ल पक्ष शुरू:  इस पक्ष में किए जाएंगे पुत्रदा एकादशी और पौष पूर्णिमा व्रत, जानिए सूर्य पूजा के इस पक्ष में कौन-कौन से शुभ काम करें
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पौष मास शुक्ल पक्ष शुरू: इस पक्ष में किए जाएंगे पुत्रदा एकादशी और पौष पूर्णिमा व्रत, जानिए सूर्य पूजा के इस पक्ष में कौन-कौन से शुभ काम करें

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6 घंटे पहले

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आज (20 दिसंबर) से पौष मास का दूसरा पक्ष शुक्ल शुरू हो गया है। इस महीने में सूर्य पूजा करने की परंपरा है, क्योंकि अभी ठंड के दिन हैं और इन दिनों में सुबह-सुबह की सूर्य की धूप हमारी सेहत के लिए वरदान है। सुबह कुछ देर धूप में बैठने से हमें विटामिन डी मिलता है और दिनभर के काम करने के लिए ऊर्जा मिल जाती है। पौष मास के शुक्ल पक्ष में चतुर्थी और एकादशी व्रत का विशेष महत्व है।

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के मुताबिक, पौष मास हमें अपनी सेहत पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। इन दिनों खाने में ऐसी चीजें शामिल करनी चाहिए, जिनकी तासीर गर्म हो, जैसे तिल-गुड़। इन चीजों की वजह से हमारा शरीर ठंड से जुड़ी परेशानियों का सामना करने के लिए तैयार हो जाता है। पौष मास सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाना चाहिए और उगते सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए।

ऐसे अर्पित करें सूर्य को अर्घ्य

सूर्य को अर्घ्य देने के लिए तांबे के लोटे में जल भरें, जल में कुमकुम, चावल और फूल डालें। इसके बाद उगते सूर्य के दर्शन करते हुए दोनों हाथों को ऊंचा करते हुए लोटे से जल चढ़ाएं। इस दौरान सूर्य मंत्र ऊँ सूर्याय नम: का जप कम से कम 11 बार करना चाहिए। आप चाहें तो सूर्य के 12 नाम मंत्रों का जप भी कर सकते हैं। लोटे से गिरती हुई जल धारा में सूर्य के दर्शन करना चाहिए। ध्यान रखें सूर्य को जल चढ़ाने के लिए ऐसी जगह का चुनाव करें, जहां जमीन पर गिरे हुए जल पर किसी का पैर न लगे।

शुक्ल पक्ष के तीज-त्योहार

  • 23 दिसंबर को विनायकी चतुर्थी है। इस तिथि पर भगवान गणपति के लिए व्रत किया जाता है और अभिषेक किया जाता है।
  • 30 दिसंबर को पुत्रदा एकादशी है। इस तिथि पर भगवान विष्णु और उनके अवतारों की पूजा की जाती है और व्रत किया जाता है। इस दिन घर में स्थापित श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप बाल गोपाल का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। एकादशी पर श्रीमद् भगवद् गीता का पाठ भी करना चाहिए।
  • 1 जनवरी को पौष शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत है। इस दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा की जाती है। ये पूजा प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के आसपास के समय में करनी चाहिए। भगवान का अभिषेक करें, बिल्व पत्र, धतूरा, आकंड़े के फूल आदि चीजें चढ़ानी चाहिए।
  • 3 जनवरी को पौष मास की पूर्णिमा है। इस तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान करने की परंपरा है। स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य अर्पित करना चाहिए। अगर नदी में स्नान करना संभव न हो तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। इस तिथि पर व्रत करने की भी परंपरा है।

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