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कल्पना कीजिए कि आप ब्लैकबेरी खा रहे हैं और दांतों के बीच एक भी सख्त बीज नहीं आ रहा, या आप चेरी का लुत्फ उठा रहे हैं और गुठली थूकने की जरूरत नहीं पड़ रही। यह कल्पना हकीकत बनने जा रही है। अमेरिका की बायोटेक कंपनी ‘पेयरवाइज’ ने जीन-एडिटिंग और एआई की मदद से फलों का हुलिया और स्वाद बदलने की तैयारी कर ली है। पेयरवाइज ऐसी ब्लैकबेरी विकसित कर रही है जिसमें बीज तकनीकी रूप से तो मौजूद होंगे, लेकिन वे इतने छोटे और मुलायम होंगे कि खाते वक्त महसूस ही नहीं होंगे। ठीक वैसे ही जैसे हम बिना बीज वाले अंगूर खाते हैं। कंपनी अब ‘स्टोनलेस चेरी’ यानी बिना गुठली वाली चेरी भी ला रही है। वैज्ञानिक कहते हैं, ‘एक बार बिना बीज वाला फल चख लेते हैं, तो पुराने बीज वाले फल खटकने लगते हैं। इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ी ताकत ‘क्रिस्पर तकनीक’ है। यह एक तरह की ‘जीन-एडिटिंग’ मशीन है जो किसी फल के अपने ही डीएनए में से उस हिस्से को हटा देती है जो बीज या कड़वाहट पैदा करता है। यह पुरानी जेनेटिक मॉडिफाइड तकनीक से अलग है। इसमें किसी बाहरी जीव का डीएनए नहीं डाला जाता, इसलिए ये फल खाने में पूरी तरह सुरक्षित और प्राकृतिक स्वाद के करीब होते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में वैज्ञानिकों का सबसे बड़ा मददगार एआई है। मशीन लर्निंग के जरिए वैज्ञानिक यह पहले ही जान लेते हैं कि अलग-अलग जीन मिलकर फल के स्वाद, खुशबू और सेहत पर क्या असर डालेंगे। कैलिफोर्निया की कंपनी ‘ग्रीन वीनस’ इस तकनीक का इस्तेमाल ऐसे ‘एवोकाडो’ बनाने में कर रही है, जो कटने के बाद काले नहीं पड़ेंगे। वहीं, चीन के वैज्ञानिकों ने टमाटर के जीन में बदलाव कर उसे 30% ज्यादा मीठा बनाने में सफलता हासिल की है। 2012 में ‘ईजी-पील’ संतरों (पतला व आसानी से निकलने वाला छिलका) से बाजार कई गुना बढ़ गया था। इंसान सदियों से फलों को पसंद के हिसाब से ढालता आया है। आज हम जो आड़ू खाते हैं, वह अपने पूर्वजों की तुलना में 16 गुना बड़ा है। तरबूज की 1,200 किस्में भी प्रयोगों का नतीजा हैं। पहले इन बदलावों में सैकड़ों साल लगते थे, तकनीक की मदद से यह समयसीमा घट गई है। वर्षों का काम महीनों में हो रहा, नए प्रयोगों से बढ़ेगी मांग इतनी खूबियों के बावजूद बाजार में जीन एडिटेड फल कम ही हैं। पेन स्टेट यूनिवर्सिटी में जीव विज्ञानी प्रो. मा हॉन्ग कहते हैं,‘बदले बीज से नई पीढ़ी का फल बनने में वर्षों लगते हैं। सेब-आड़ू पेड़ों को लंबा समय चाहिए। पर एआई व क्रिस्पर से ये वक्त घट रहा है। टमाटर व स्ट्रॉबेरी में तकनीक तेजी से काम करती है, क्योंकि प्रक्रिया महीनों में पूरी हो जाती है। हॉन्ग मानते हैं, बाजार में ऐसे फल आएंगे तो लोगों की रुचि बढ़ेगी। यूएसडीए इकोनॉमिक रिसर्च के मुताबिक अमेरिका में 2000 से 2020 के बीच ताजा ब्लूबेरी का आयात 10 गुना बढ़ गया। पेयरवाइज को उम्मीद है कि सीडलेस ब्लैकबेरी व नई चेरी भी ऐसा ही कमाल दिखा सकती है।
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