फिजिकल हेल्थ- वेट ट्रेनिंग से डिमेंशिया का रिस्क कम:  साइंस स्टडी में खुलासा, बुढ़ापे तक याददाश्त चाहिए मजबूत तो आज ही शुरू करें
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फिजिकल हेल्थ- वेट ट्रेनिंग से डिमेंशिया का रिस्क कम: साइंस स्टडी में खुलासा, बुढ़ापे तक याददाश्त चाहिए मजबूत तो आज ही शुरू करें

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2 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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डिमेंशिया एक ऐसी बीमारी है, जो याददाश्त, ध्यान और सोचने-समझने की क्षमता को प्रभावित करती है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, साल 2021 तक दुनिया भर में लगभग 5 करोड़ 70 लाख लोग इससे पीड़ित थे।

हालांकि कई स्टडीज में इस बात की पुष्टि हुई है कि लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करके डिमेंशिया के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसमें नियमित एक्सरसाइज की महत्वपूर्ण भूमिका है।

हाल ही में ‘GeroScience’ जर्नल में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज बुजुर्गों के ब्रेन को डिमेंशिया से बचाने में मदद कर सकती है। स्टडी में यह भी पाया गया कि इसका फायदा उन लोगों को भी मिलता है, जिनमें पहले से ही डिमेंशिया के हल्के लक्षण मौजूद हैं।

तो चलिए, आज फिजिकल हेल्थ कॉलम में हम वेट ट्रेनिंग और डिमेंशिया के बीच कनेक्शन के बारे में बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • वेट ट्रेनिंग डिमेंशिया के खतरे को कम करने में कैसे मददगार है?
  • वेट ट्रेनिंग करते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

सबसे पहले आइए, डिमेंशिया से जुड़े आंकड़ों पर एक नजर डाल लेते हैं।

वेट ट्रेनिंग और डिमेंशिया के बीच कनेक्शन

हाल ही में ब्राजील के कैम्पिनास यूनिवर्सिटी (UNICAMP) की रिसर्चर डॉ. इसाडोरा रिबेरो (Isadora Ribeiro) के नेतृत्व में एक स्टडी हुई। इस स्टडी के लिए 55 साल और इससे ज्यादा उम्र के 44 लोगों को लिया गया, जिन्हें पहले से हल्की कॉग्निटिव प्रॉब्लम्स थीं। इन लोगों को दो ग्रुप्स में बांटा गया। एक ग्रुप ने हफ्ते में दो बार वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज की, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाया।

वहीं दूसरे ग्रुप ने कोई एक्सरसाइज नहीं की। छह महीने बाद वेट ट्रेनिंग करने वाले ग्रुप के लोगों की मेमोरी में सुधार हुआ और उनके ब्रेन के न्यूरॉन्स मजबूत हुए। साथ ही उनके ब्रेन के उन हिस्सों में भी सुधार देखा गया, जो अल्जाइमर से जुड़े होते हैं। वहीं जिन लोगों ने एक्सरसाइज नहीं की थी, उनके ब्रेन में कुछ प्रॉब्लम्स दिखे। इससे पता चलता है कि वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी ब्रेन की बीमारी के खतरे का कम करने में मददगार हो सकती है।

वेट ट्रेनिंग ब्रेन के लिए कितना फायदेमंद

डॉ. रिबेरो के मुताबिक, नियमित वेट ट्रेनिंग करने से शरीर में इंफ्लेमेशन कम होती है और इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है, जिससे ब्रेन का कामकाज सही ढंग से चलता है। इसके अलावा इस एक्सरसाइज से ब्रेन-डिराइव्ड न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर (BDNF) जैसे सब्सटेंस बढ़ते हैं, जो ब्रेन की कोशिकाओं को हेल्दी रखने में मदद करते हैं।

वेट ट्रेनिंग से हार्ट और ब्रेन में ब्लड फ्लो भी बेहतर होता है, जिससे ऑक्सीजन और न्यूट्रिशन आसानी से पहुंचता है। इससे ब्रेन के उन हिस्सों का सिकुड़ना भी कम हो सकता है, जो अल्जाइमर में प्रभावित होते हैं। नीचे दिए ग्राफिक से ब्रेन के लिए वेट ट्रेनिंग के फायदे समझिए-

वेट ट्रेनिंग क्या है?

वेट ट्रेनिंग का मतलब वजन उठाकर एक्सरसाइज करना है, जिससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं। साथ ही ब्रेन भी हेल्दी रहता है। इसमें आप या तो बाहरी वजन (जैसे डम्बल, बारबेल, मशीनें) का इस्तेमाल कर सकते हैं या अपने शरीर के वजन से ही एक्सरसाइज कर सकते हैं।

वेट ट्रेनिंग क्यों करनी चाहिए?

  • शरीर की ताकत और स्टैमिना बढ़ती है।
  • ब्रेन हेल्दी और एक्टिव रहता है।
  • मांसपेशियां टोन होती हैं और बॉडी शेप में आती है।
  • हड्डियां व जोड़ों की मजबूती बढ़ती है।
  • मेटाबॉलिज्म तेज होता है और फैट बर्निंग आसान होती है।

वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज के उदाहरण

नीचे कुछ आसान और पॉपुलर वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज दी गई हैं। इसे ध्यान से समझिए-

  • पुश-अप्स: जमीन पर हाथ रखकर शरीर को ऊपर-नीचे करना (छाती, कंधे, ट्राइसेप्स के लिए)।
  • स्क्वैट्स: बैठने-उठने जैसी प्रैक्टिस (पैरों और कूल्हों के लिए)।
  • लंजेस: एक पैर आगे और दूसरा पीछे मोड़ना (पैरों के लिए)।
  • प्लैंक: पेट को सीधा रखकर टिके रहना (एब्डॉमिनल मसल्स के लिए)।
  • पुल-अप्स और चिन-अप्स: बार पकड़कर शरीर को ऊपर खींचना (पीठ और बाइसेप्स के लिए)।
  • डिप्स: बेंच पर हाथ रखकर शरीर को ऊपर-नीचे करना (ट्राइसेप्स और लोअर चेस्ट के लिए)।
  • डम्बल कर्ल: डम्बल लेकर कोहनी से मोड़ना (बाइसेप्स के लिए)।
  • डम्बल प्रेस: लेटकर या बैठकर डम्बल को ऊपर धकेलना (कंधे और छाती के लिए)।
  • डेडलिफ्ट: जमीन से वजन उठाकर सीधा खड़ा होना (पूरे शरीर के लिए)।
  • काफ रेज: पंजों पर खड़े होकर ऊपर-नीचे होना (पिंडली की मसल्स के लिए)।

ये सारी एक्सरसाइज शरीर के साथ-साथ ब्रेन को भी स्वस्थ और एक्टिव रखने में मदद करती हैं।

वेट ट्रेनिंग के दौरान बरतें ये सावधानियां

बुजुर्ग लोग कोई भी नया वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। शुरुआत में किसी ट्रेनर से सही तकनीक सीखें क्योंकि गलत तरीके से वेट ट्रेनिंग करने से चोट लग सकती है। बुजुर्गों को अपनी क्षमता के अनुसार ही वेट ट्रेनिंग करनी चाहिए। इसके अलावा कुछ और बातों का भी ध्यान रखें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

वेट ट्रेनिंग और डिमेंशिया से जुड़े कुछ कॉमन सवाल-जवाब

सवाल- क्या सिर्फ बुजुर्गों को ही वेट ट्रेनिंग से फायदा होता है?

जवाब- न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अनिमेष गुप्ता बताते हैं कि नियमित वेट ट्रेनिंग या एक्सरसाइज हर उम्र के लोगों के लिए फायदेमंद है। यह न केवल डिमेंशिया के खतरे को कम करने में मदद करती है, बल्कि शरीर को फिजिकली फिट और मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में भी मददगार है।

सवाल- वेट ट्रेनिंग कितनी बार और कितनी देर तक करनी चाहिए?

जवाब- वेट ट्रेनिंग की आवृत्ति और समय व्यक्ति की फिटनेस लेवल पर निर्भर करती है। आमतौर पर सप्ताह में कम-से-कम 3 बार वेट ट्रेनिंग करना फायदेमंद माना जाता है। हर सेशन की अवधि 30–60 मिनट रखी जा सकती है, जिसमें वॉर्म-अप और कूल-डाउन भी शामिल हों।

सवाल- क्या डिमेंशिया का कोई इलाज है?

जवाब- डिमेंशिया का कोई स्थायी इलाज नहीं है। हालांकि नियमित एक्सरसाइज, वेट ट्रेनिंग, हेल्दी लाइफस्टाइल और ब्रेन एक्सरसाइज इसके प्रभाव को कम करने और ब्रेन हेल्थ को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

सवाल- वेट ट्रेनिंग के साथ और किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?

जवाब- डॉ. अनिमेष गुप्ता बताते हैं कि डिमेंशिया के खतरे से बचने के लिए वेट ट्रेनिंग के साथ-साथ कुछ और बातों का भी विशेष ख्याल रखना जरूरी है। जैसेकि-

  • रोजाना हेल्दी और बैलेंस्ड डाइट लें।
  • नियमित पर्याप्त नींद लेना सुनिश्चित करें।
  • सोशल एक्टिविटीज से जुड़े रहें।
  • स्मोकिंग और ड्रिंकिंग से बचें।
  • स्ट्रेस को मैनेज करने के लिए मेडिटेशन करें।

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