फिजिकल हेल्थ- ‘साइलेंट किलर’ है वायु प्रदूषण:  ब्रेन, हार्ट और लंग्स के लिए खतरनाक है जहरीली हवा, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके
महिला

फिजिकल हेल्थ- ‘साइलेंट किलर’ है वायु प्रदूषण: ब्रेन, हार्ट और लंग्स के लिए खतरनाक है जहरीली हवा, डॉक्टर से जानें बचाव के तरीके

Spread the love


4 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

  • कॉपी लिंक

हर साल 2 दिसंबर को ‘नेशनल पॉल्यूशन कंट्रोल डे’ मनाया जाता है। इसका उद्देश्य प्रदूषण के खतरों के प्रति जागरूकता फैलाना और स्वच्छ व स्वस्थ पर्यावरण की जरूरत पर जोर देना है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि तेजी से बढ़ता प्रदूषण हमारी सेहत के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है। इस रियलिटी को आज हम अपने आसपास देख भी रहे हैं।

दिल्ली सहित देश के कई शहरों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) लगातार बढ़ रहा है। इंडस्ट्रियल स्मॉग, बढ़ते वाहन, खेतों की पराली और कंस्ट्रक्शन डस्ट जैसी चीजें हवा में PM2.5, PM10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, ओजोन और सल्फर डाइऑक्साइड जैसे प्रदूषक तत्वों की मात्रा बढ़ाती हैं, जो धीरे-धीरे हमारी सेहत को नुकसान पहुंचाती हैं।

वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, वायु प्रदूषण दुनिया के सबसे बड़े हेल्थ रिस्क में से एक है। इसकी वजह से हर साल दुनिया में करीब 67 लाख लोग समय से पहले मौत का शिकार होते हैं। इनमें से 42 लाख मौतें आउटडोर एयर पॉल्यूशन से जुड़ी होती हैं। इसका सबसे ज्यादा असर लो और मिडिल-इनकम देशों पर पड़ता है।

प्रदूषित हवा का असर केवल मौतों तक सीमित नहीं है। इसकी वजह से हर साल करोड़ों लोग रेस्पिरेटरी, हार्ट और ब्रेन से जुड़ी क्रॉनिक डिजीज का सामना करते हैं। ऐसे में वायु प्रदूषण के खतरों और इससे बचाव के उपायों को समझना बेहद जरूरी है।

तो चलिए, आज फिजिकल हेल्थ कॉलम में हम वायु प्रदूषण के बारे में विस्तार से बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • खराब AQI क्या है?
  • किन लोगों के लिए वायु प्रदूषण ज्यादा खतरनाक है?
  • वायु प्रदूषण से बचने के क्या उपाय हैं?

एक्सपर्ट: डॉ. प्रीतपाल कौर, सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली

सवाल- वायु प्रदूषण को ‘साइलेंट किलर’ क्यों कहा जाता है?

जवाब- हवा में मौजूद कण धीरे-धीरे हमारे लंग्स, हार्ट और ब्रेन पर असर डालते हैं। इसके शुरुआती संकेत अक्सर सामान्य थकान या सर्दी-खांसी जैसे लगते हैं, इसलिए लोग इन्हें इग्नोर कर देते हैं। लेकिन धीरे-धीरे यही प्रदूषक अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक और यहां तक कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं और हमें पता भी नहीं चलता है। इसीलिए वायु प्रदूषण को ‘साइलेंट किलर’ कहा जाता है।

सवाल- एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) क्या है?

जवाब- ये हवा की क्वालिटी को बताने वाला एक स्कोर है, जो यह समझने में मदद करता है कि हमारे आसपास की हवा साफ है या प्रदूषित। AQI में हवा में मौजूद प्रदूषकों का स्तर मापा जाता है। AQI जितना बढ़ता है, हवा उतनी ही ज्यादा खतरनाक मानी जाती है और हेल्थ रिस्क भी उतना ही बढ़ जाता है। नीचे दिए ग्राफिक से इसे समझिए-

सवाल- खराब AQI हमारी सेहत को कैसे प्रभावित करता है?

जवाब- जब AQI खराब होता है तो हवा में मौजूद PM2.5, PM10, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और ओजोन जैसे प्रदूषक हमारे फेफड़ों में गहराई तक पहुंच जाते हैं। ये कण खून के जरिए पूरे शरीर में फैलते हैं और तुरंत से लेकर लंबे समय तक कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम्स पैदा कर सकते हैं। लगातार एक्सपोजर फेफड़ों की क्षमता कम करता है और क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- PM2.5 और PM10 क्या हैं और ये कैसे हमारी सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं?

जवाब- PM (पार्टिकुलेट मैटर) यानी हवा में मौजूद बेहद सूक्ष्म कण और लिक्विड ड्रॉपलेट्स। इन्हें आकार के आधार पर दो हिस्सों में बांटा गया है।

PM10

ये 10 माइक्रॉन या उससे छोटे कण होते हैं, जो धूल, मिट्टी, धुआं और वाहन/फैक्ट्री उत्सर्जन से बनते हैं। ये नाक और गले तक पहुंचकर एलर्जी, खांसी, सांस में जलन और अस्थमा को ट्रिगर कर सकते हैं।

PM2.5

ये 2.5 माइक्रॉन या उससे भी छोटे कण होते हैं। ये एक मानव बाल से लगभग 30 गुना छोटे होते हैं। इतने सूक्ष्म कि फेफड़ों और ब्लड तक आसानी से पहुंच सकते हैं। PM2.5 को ज्यादा खतरनाक माना जाता है क्योंकि इसे शरीर फिल्टर नहीं कर पाता है।

लंबे समय तक एक्सपोजर से हार्ट डिजीज, स्ट्रोक, COPD, कैंसर, ब्रेन इंफ्लेमेशन और गर्भवती महिलाओं में जोखिम बढ़ जाता है। ये कण फेफड़ों में जमा होकर सूजन पैदा करते हैं, ब्लड वेसल्स को नुकसान पहुंचाते हैं। इससे हार्ट को अधिक मेहनत करनी पड़ती है।

सवाल- लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से ब्रेन पर क्या असर पड़ता है?

जवाब- नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन की एक स्टडी के मुताबिक, हवा में मौजूद सूक्ष्म कण (PM2.5) सीधे ब्रेन तक पहुंच सकते हैं, जिससे इंफ्लेमेशन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और ब्लड-ब्रेन बैरियर को नुकसान होता है। इससे अल्जाइमर, पार्किंसन, स्ट्रोक और न्यूरो-डेवलपमेंटल डिसऑर्डर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

सवाल- किन लोगों के लिए वायु प्रदूषण ज्यादा खतरनाक है?

जवाब- वायु प्रदूषण सभी के लिए नुकसानदायक है, लेकिन कुछ लोगों पर इसका असर ज्यादा होता है। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- वायु प्रदूषण से बचने के क्या उपाय हैं?

जवाब- वायु प्रदूषण से पूरी तरह बच पाना तो मुश्किल है, लेकिन कुछ सावधानियां अपनाकर इसके प्रभाव को कम किया जा सकता है। खासकर उन दिनों में जब AQI खराब हो, कुछ उपायों को जरूर फॉलो करें। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

सवाल- क्या सुबह की वॉक या जॉगिंग प्रदूषण वाले दिनों में नुकसान कर सकती है?

जवाब- हां, इस दौरान PM2.5 और अन्य जहरीले कण सांस के जरिए सीधे फेफड़ों और खून में पहुंच जाते हैं। इससे सांस फूलना, खांसी, सीने में जकड़न, एलर्जिक रिएक्शन, हार्ट स्ट्रेस और अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ सकता है।

इसलिए इन दिनों में वॉकिंग/जॉगिंग अवॉइड करें। जरूरत हो तो वॉक के लिए दोपहर या शाम का समय चुनें, जब AQI थोड़ा बेहतर होता है। घर में योगा, स्टेपर, ट्रेडमिल, स्किपिंग जैसी इनडोर एक्सरसाइज करें।

सवाल- क्या खराब एयर क्वालिटी में बच्चों को स्कूल भेजना सुरक्षित है?

जवाब- खराब एयर क्वालिटी वाले दिनों में बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा हो सकता है। बच्चे वयस्कों की तुलना में दोगुनी तेज सांस लेते हैं, इसलिए उनके फेफड़ों में अधिक प्रदूषित कण पहुंचते हैं। इससे खांसी, सांस फूलना, आंखों में जलन, अस्थमा ट्रिगर होने और फेफड़ों की ग्रोथ प्रभावित होने का जोखिम बढ़ जाता है।

इसलिए बच्चों को स्कूल भेजते समय मास्क जरूर पहनाएं। स्कूल में आउटडोर एक्टिविटी न कराएं। सांस लेने में परेशानी दिखे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

सवाल- क्या खानपान से वायु प्रदूषण के प्रभाव को कम किया जा सकता है?

जवाब- हां, सही खानपान शरीर की नेचुरल डिफेंस सिस्टम को मजबूत करता है और प्रदूषण से होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम कर सकता है। एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन-C, ओमेगा-3, पानी और फाइबर फेफड़ों की सफाई और इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करते हैं।

क्या खाएं?

  • संतरा, आंवला, बेरीज, कीवी जैसे विटामिन C युक्त फल
  • हरी सब्जियां
  • ड्राई फ्रूट्स और सीड्स
  • लहसुन, हल्दी, अदरक
  • गुड़ और शहद
  • गरम पानी और हर्बल टी

क्या अवॉइड करें?

  • तली-भुनी चीजें
  • बहुत ज्यादा मीठा
  • कोल्ड ड्रिंक्स
  • प्रोसेस्ड फूड और पैकेज्ड स्नैक्स

…………………….

फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए

फिजिकल हेल्थ- ठंड के मौसम में कम होता विटामिन D: डाइट में करें बदलाव, डॉक्टर की सलाह से लें सप्लीमेंट, बरतें 6 जरूरी सावधानियां

दुनिया में करीब 50% लोग विटामिन D की कमी से जूझ रहे हैं। भारत में यह समस्या और भी गंभीर है। भारत में लगभग 76% से 80% लोग विटामिन D की कमी का शिकार हैं। यानी हर चार में से तीन लोगों के शरीर में यह जरूरी विटामिन कम है। पूरी खबर पढ़िए…

खबरें और भी हैं…



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *