बिहार में कोरोना वायरस की एंट्री के बीच स्वास्थ्य विभाग की बड़ी बैठक, कहा- ‘नए वेरिएंट से…’
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बिहार में कोरोना वायरस की एंट्री के बीच स्वास्थ्य विभाग की बड़ी बैठक, कहा- ‘नए वेरिएंट से…’

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Bihar Coronavirus News: बिहार की राजधानी पटना के एक निजी अस्पताल में कोरोना के दो मरीज मिलने के बाद सोमवार (26 मई, 2205) को स्वास्थ्य विभाग ने कोविड-19 संक्रमण की वर्तमान स्थिति एवं उससे निपटने की तैयारियों को लेकर एक बड़ी बैठक की. इस महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता विकास आयुक्त सह स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने की. 

‘नए वेरिएंट से घबराने की जरूरत नहीं’

बैठक में कोविड-19 संक्रमण की वर्तमान स्थिति, स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता, जांच एवं उपचार की व्यवस्था और दवाओं एवं ऑक्सीजन सहित आवश्यक संसाधनों की आपूर्ति की समीक्षा की गई. इस मौके पर अपर मुख्य सचिव ने आमजन से अपील की कि कोरोना के नए वेरिएंट से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि सतर्क और जागरूक रहने की जरूरत है.

इंडियन सार्स-कोव-2 जिनोमिक कंसोर्टियम (आईएनएसएसीओजी) के अनुसार, भारत में कोविड-19 के दो नए सब-वेरिएंट- एनबी.1.8.1 और एलएफ.7 की पहचान की गई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इन दोनों को मात्र ‘निगरानी में रखे गए वेरिएंट’ की श्रेणी में रखा है. इसका मतलब है कि ये ज्यादा खतरनाक नहीं हैं.

‘किसी भी संभावित परिस्थिति के लिए रहें तैयार’

प्रत्यय अमृत ने बैठक के दौरान सभी सिविल सर्जनों एवं मेडिकल कॉलेजों के अधीक्षकों को संदिग्ध मामलों की पहचान, सक्रिय निगरानी और समय पर जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. सभी जिलों को किसी भी संभावित परिस्थिति के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया.

आगे उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग सभी जिलों को पर्याप्त मात्रा में जांच किट, मास्क, दवाएं, ऑक्सीजन और आवश्यक उपकरणों की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है. अपर मुख्य सचिव ने स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता, प्रभावी समन्वय एवं जवाबदेही को सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया. साथ ही जन जागरूकता बढ़ाने और नियमित निगरानी की प्रक्रिया को मजबूत करने के भी निर्देश दिए गए.

बैठक में स्वास्थ्य विभाग के सचिव मनोज कुमार सिंह, बीएमएसआईसीएल के प्रबंध निदेशक धर्मेंद्र कुमार, स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त सचिव अनुपमा सिंह के साथ-साथ अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे. साथ ही इस बैठक में राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जन, सरकारी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य एवं अधीक्षक ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भाग लिया.

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