2 घंटे पहले
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किताब- द लेट देम थ्योरी
लेखक- मेल रॉबिन्स और सॉयर रॉबिन्स
अनुवाद- यामिनी रामपल्लीवार
प्रकाशक- मंजुल पब्लिकेशन
मूल्य- 499 रुपए
कभी सोचा है कि जिंदगी में शांति का राज क्या है? ज्यादातर लोग सोचते हैं कि सबकुछ कंट्रोल में रखो, तो सब सही रहेगा। लेकिन अमेरिकी लेखिका और मोटिवेशनल स्पीकर मेल रॉबिन्स कहती हैं कि इसका उल्टा करो- कंट्रोल रिलीज करो। ‘द लेट देम थ्योरी’ किताब में वे बताती हैं कि दूसरों की राय, बर्ताव या फैसलों पर कंट्रोल करने की कोशिश छोड़ दो। इसके बजाय अपने रिएक्शन्स और एक्शन्स पर ध्यान दो।
मेल रॉबिन्स ‘द 5 सेकंड रूल’ जैसी बेस्टसेलर किताब लिख चुकी हैं और उनका पॉडकास्ट ‘द मेल रॉबिन्स पॉडकास्ट’ करोड़ों लोगों को मोटिवेट करता है। वह एक सफल वकील रही हैं, लेकिन जिंदगी की मुश्किलों से गुजरकर उन्होंने खुद को बदला। इस किताब में वे अपनी कहानियां शेयर करती हैं- जैसे परिवार में झगड़े, दोस्तों की जजमेंट या वर्कप्लेस की टेंशन।
द लेट देम थ्योरी किताब में क्या है
किताब का मेन आइडिया उसके नाम में ही है, ‘द लेट देम थ्योरी’। मतलब, दूसरों को उनके हाल पर छोड़ दो। ये कोई नेगेटिव बात नहीं, बल्कि अपनी एनर्जी बचाने का स्मार्ट तरीका है। मेल कहती हैं कि हम जिंदगी का 80% टाइम दूसरों को बदलने में या उनकी राय से परेशान होकर बर्बाद कर देते हैं। इसकी बजाय, फोकस ‘लेट मी’ पर करो- यानी खुद पर फोकस करो।
ये किताब उन लोगों के लिए परफेक्ट है जो ओवरथिंकिंग करते हैं, लोगों को खुश रखने की कोशिश में थक जाते हैं या रिश्तों में स्ट्रेस फील करते हैं। किताब में कोई जटिल साइंस नहीं, बस रोजमर्रा की कहानियां और प्रैक्टिकल टिप्स हैं। मेल ने न्यूरोसाइंस, साइकोलॉजी और एक्सपर्ट्स के रेफरेंस दिए हैं, लेकिन भाषा इतनी आसान है कि चाय की चुस्कियों के साथ पढ़ सकते हैं।
किताब क्या सिखाती है?
आज की दुनिया में हम सोशल मीडिया पर लाइक्स, कमेंट्स या फैमिली के ओपिनियन से घिरे रहते हैं। मेल कहती हैं कि ये सब कंट्रोल करने की कोशिश छोड़ो। किताब के 8 मुख्य चैप्टर्स में वे जीवन के अलग-अलग एरिया को कवर करती हैं- जैसे स्ट्रेस मैनेजमेंट, दोस्ती, लव लाइफ और करियर। हर चैप्टर में पहले वे प्रॉब्लम बताती हैं, फिर ‘लेट देम’ अप्लाई करने का तरीका। आखिर में, ‘लेट मी’ से खुद को एम्पावर करो।
उदाहरण के तौर पर, अगर कोई दोस्त आपको इग्नोर कर रहा है, तो सोचो- लेट देम। उनकी प्रॉब्लम है, तुम्हारी नहीं। फिर लेट मी- मैं क्या कर सकता हूं? शायद नए दोस्त बनाऊं या खुद को वैल्यू दूं। ये छोटी शिफ्ट बड़ी राहत देती है। किताब में मेल अपना डाइवोर्स और बच्चों की कहानियां शेयर करती हैं, जो हंसाती भी हैं और सिखाती भी।

किताब क्यों है इतनी खास?
‘द लेट देम थ्योरी’ इसलिए स्पेशल है क्योंकि ये सिर्फ थ्योरी नहीं, बल्कि टूल्स देती है। मेल की स्टोरीज रीयल लगती हैं, जैसे एक महिला जो बॉस की क्रिटिसिज्म से परेशान थी, लेकिन ‘लेट देम’ से उसने अपनी परफॉर्मेंस इम्प्रूव की। किताब में ओपरा विन्फ्रे जैसी सेलिब्रिटीज के कोट्स हैं, जो कहती हैं कि ये 25 साल की सलाह का सार है। ह्यूमर है, जो पढ़ने को मजेदार बनाता है। मेल कहती हैं, ये क्वीन एल्सा की तरह है, लेकिन साइंस के साथ।
कुछ लोग कहते हैं कि कॉन्सेप्ट्स नए नहीं हैं- जैसे बौद्ध धर्म में रिलीज की बात। लेकिन मेल इसे मॉडर्न ट्विस्ट देती हैं, सोशल मीडिया और वर्क लाइफ के उदाहरणों से। ये कोई लेक्चर नहीं, बल्कि कन्वर्सेशन है।
प्रैक्टिकल है किताब
सबसे अच्छी बात ये है कि किताब की हर सलाह एकदम प्रैक्टिकल है। हर चैप्टर के अंत में की टेकअवे और एक्सरसाइज हैं। जैसे, अगर आप कंपैरिजन में फंसते हैं, तो मेल कहती हैं- इंस्टाग्राम स्क्रॉल करते हुए ‘लेट देम’ बोलो और अपना गोल लिखो। आज के टाइम में, जब फैमिली प्रेशर या फ्रेंड्स ड्रामा एनर्जी चूस लेता है, ये किताब रिचार्ज करने के टिप्स देती है।
किताब से मिले 8 सबक, जिंदगी में ऐसे अपनाइए
किताब में 8 मुख्य एरिया हैं, लेकिन यहां मैं उन्हें सरल तरीके से बता रही हूं। हर एक में मेल की सलाह है, जो पहले ‘लेट देम’ से शुरू होती है, फिर ‘लेट मी’ पर जाती है।
स्ट्रेस मैनेज करें
कई बार हम दूसरों की हरकतों से टेंशन लेते हैं, जैसे ट्रैफिक में कोई या बार-बार हॉर्न बजाए। मेल कहती हैं कि ऐसे में ‘लेट देम’ बोलो, ये उनकी प्रॉब्लम है।
क्या करें?
- गहरी सांस लो, अपना फोकस शिफ्ट करो।
- रोज एक जर्नल में लिखो- क्या मैं कंट्रोल कर सकता हूं?

दूसरों के ओपिनियन से डरना छोड़ें
लोग क्या सोचेंगे, ये सोचकर हम रुक जाते हैं। मेल की स्टोरी है- उन्होंने पॉडकास्ट शुरू किया, ट्रोल्स आए, लेकिन ‘लेट देम’ से आगे बढ़ीं।
क्या करें?
- अपनी वैल्यू लिस्ट बनाओ, रोज पढ़ो।
- नेगेटिव कमेंट्स को इग्नोर करो, पॉजिटिव पर ध्यान दो।
नेगेटिव रिएक्शन्स से डील करें
अगर कोई गुस्सा करे, तो रिएक्ट मत करो। मेल कहती हैं, उनकी नेगेटिविटी उनकी है।
क्या करें?
- शांत रहो, स्पेस लो।
- अपनी इमोशन्स को नाम दो- जैसे ‘ये गुस्सा है, पास हो जाएगा।’
क्रॉनिक कंपैरिजन ओवरकम करें
सोशल मीडिया पर दूसरों की लाइफ देखकर जलन? ‘लेट देम’ उनकी जर्नी है।
क्या करें?
- ग्रेटिट्यूड जर्नल रखो- रोज तीन अच्छी बातें लिखो।
- अपने गोल्स पर फोकस, कंपेयर मत करो।

एडल्ट फ्रेंडशिप्स मास्टर करें
दोस्त बदलते हैं, ‘लेट देम’ उनके चॉइस। फिर लेट मी- नए कनेक्शन्स बनाओ।
क्या करें?
- इवेंट्स में जाओ, लोगों से बात करो।
- सच्चे दोस्त चुनो, जो सपोर्ट करें।
दूसरों को चेंज करने की कोशिश छोड़ें
फैमिली में कोई बदलना नहीं चाहता? ‘लेट देम’, अपना रास्ता चुनो।
क्या करें?
- बाउंडरीज सेट करो- ‘नो’ बोलना सीखो।
- अपने ग्रोथ पर इन्वेस्ट करो।
स्ट्रगलिंग लोगों की मदद करें
किसी की हेल्प करो, लेकिन खुद ड्रेन मत हो। ‘लेट देम’ उनके स्ट्रगल।
क्या करें?
- सपोर्ट दो, लेकिन लिमिट्स रखो।
- प्रोफेशनल हेल्प सजेस्ट करो।

डिजर्विंग प्यार चुनें
रिलेशनशिप में अगर अनहेल्दी, ‘लेट देम’ जाएं। लेट मी- सेल्फ-लव।
क्या करें?
- रेड फ्लैग्स पहचानो, हेल्दी चॉइस करो।
- अकेले रहकर खुश होना सीखो।
- दोस्त की तरह लगेगी ये किताब
‘द लेट देम थ्योरी’ पढ़ते हुए लगता है जैसे मेल रॉबिन्स आपके साथ कॉफी पी रही हैं, अपनी गलतियां सुना रही हैं। ये कोई सख्त गाइड नहीं, बल्कि एम्पावरिंग चैट है, जो आपको हंसाती है और फ्रीडम देती है।
किसे पढ़नी चाहिए?
- युवा प्रोफेशनल्स, जो वर्क स्ट्रेस से जूझ रहे हैं।
- पेरेंट्स, जो बच्चों को कंट्रोल करने की कोशिश में थकते हैं।
- स्टूडेंट्स, जो पीयर प्रेशर फेस करते हैं।
- जो शांति और सेल्फ-पावर चाहता है।
क्यों पढ़ें?
क्योंकि ये किताब स्कूल में न सिखाई गई वो बातें बताती है- जैसे बाउंड्रीज सेट करना, इमोशंस मैनेज करना। ये सिर्फ पढ़ने की नहीं, अप्लाई करने की है। मिसाल के तौर पर, अगर रिश्ते में प्रॉब्लम, तो किताब बताएगी कैसे ‘लेट देम’ से फ्री हो। मैंने अप्लाई किया, तो ओवर थिंकिंग कम हुई। अगर आप लाइफ में फंसे हुए महसूस करते हैं, तो ये किताब आपका रोडमैप है।
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