बुक रिव्यू- फीलिंग से हीलिंग तक:  जो भी महसूस करते हैं, उसे दबाएं नहीं, समझें और सही दिशा दें, यही सिखाती है किताब ‘फील टू हील’
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बुक रिव्यू- फीलिंग से हीलिंग तक: जो भी महसूस करते हैं, उसे दबाएं नहीं, समझें और सही दिशा दें, यही सिखाती है किताब ‘फील टू हील’

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43 मिनट पहले

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बुक का नाम: ‘फील टू हील- भावना योग का विज्ञान’

लेखक: मुनिश्री प्रमाणसागर जी महाराज

प्रकाशक: निर्ग्रन्थ फाउंडेशन

मूल्य: 200 रुपए

हम सभी अपने जीवन में खुश रहना चाहते हैं, लेकिन अक्सर हमारी भावनाएं इसमें बाधा बनती हैं। गुस्सा, दुख, ईर्ष्या या डर जैसी नकारात्मक भावनाएं हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि इन भावनाओं काे मैनेज करके कैसे हम अपनी जिंदगी को बेहतर बना सकते हैं।

जैन मुनि प्रमाणसागर जी की किताब ‘फील टू हील’ इसी दिशा में मार्गदर्शन करती है। यह किताब सिर्फ आध्यात्मिक ज्ञान नहीं देती, बल्कि इसे आधुनिक मनोविज्ञान और योग के साथ जोड़कर भावनाओं के विज्ञान को सरल और व्यावहारिक रूप में प्रस्तुत करती है।

यह किताब बताती है कि भावनाएं न दबाएं, न नजरअंदाज करें, बल्कि उन्हें समझकर सकारात्मक ऊर्जा में बदलें। अगर आप भावनाओं के बोझ से थक चुके हैं तो यह किताब आपको नई ऊर्जा देगी। मुनिश्री 108 प्रमाणसागरजी महाराज, दिगंबर जैन मुनि हैं और आचार्य श्री 108 विद्यासागरजी महाराज के शिष्य हैं। वे अपने गहन ज्ञान, सरल व्यक्तित्व और शंका समाधान जैसे कार्यक्रमों के लिए जाने जाते हैं।

किताब का उद्देश्य और महत्व

मुनि प्रमाणसागर जी कहते हैं कि भावनाओं को दबाने या इग्नोर करने की बजाय उन्हें समझने और सही दिशा में लगाने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं। किताब का उद्देश्य ये है कि पाठक अपनी नकारात्मक भावनाओं को पहचानें और उन्हें कंट्रोल करना सीखें। साथ ही आत्म-उपचार के व्यावहारिक तरीके अपनाकर जीवन में मानसिक शांति और संतुलन बनाए रखें।

मुनि जी ने किताब में ध्यान, प्राणायाम और जैन सिद्धांतों के माध्यम से भावनाओं का मैनेज करने के तरीके समझाए गए हैं। ‘फील टू हील’ किताब का मुख्य संदेश है कि ‘भावनाएं जीवन की कुंजी हैं।’ किताब में 8 मुख्य सबक दिए गए हैं, जो भावनाओं को साधकर आत्मबल बढ़ाने का रास्ता दिखाते हैं। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

भावना क्या है- इसे समझें और साधें

जैन दर्शन में भावना योग को ‘ऊर्जा से आत्मबल तक की यात्रा’ कहा गया है। यह साधक को भीतर की नकारात्मकता (जैसे क्रोध, भय, ईर्ष्या या दोषबोध) से मुक्त होकर सकारात्मक भावनाओं की ओर ले जाता है। भावना योग चार प्रमुख आधारों पर टिका है।

  • प्रार्थना से समर्पण: अपनी भावनाओं के प्रति जागरूक होना और यह पहचानना कि कैसा महसूस कर रहे हैं।
  • प्रतिक्रमण से शुद्धि: अपनी भावनाओं में सकारात्मकता लाना और नकारात्मक भावनाओं को छोड़ना।
  • प्रत्याख्यान से संकल्प: नकारात्मक भावनाओं के कारणों की पहचान करके उनसे मुक्ति पाना।
  • सामायिक से समता: आंतरिक शांति और शुद्धि की स्थिति में आना, जहां मन शांत और सकारात्मक हो जाता है।

भावना योग सिखाता है कि हमारी हर फीलिंग्स एक एनर्जी है। अगर उसे सही दिशा में बहने दिया जाए तो वही ऊर्जा आत्मबल और शांति का स्रोत बन जाती है।

किताब बताती है कि भावना जीवन की सबसे बड़ी पहचान है। अगर भाव शुद्ध हों तो साधारण जीवन भी दिव्य बन जाता है। भावनाएं अगर विकृत हों तो सारे संसाधनों के बावजूद जीवन दिशाहीन रहता है। उदाहरण के लिए, क्रोध की भावना से ब्लड प्रेशर बढ़ता है, लेकिन करुणा की भावना से मन शांत होता है। भाव बदलो तो अनुभव बदलेंगे।

भावनाओं में जीवन बदलने की शक्ति

किताब अन्य योगों से भावना योग के अंतर को स्पष्ट करती है। हठयोग शरीर साधता है, राजयोग मन, लेकिन भावना योग भावनाओं को साधकर आत्मा से जोड़ता है। उदाहरण के लिए आसन से शरीर मजबूत होता है, लेकिन भावना योग से भीतर की विकृतियां दूर होती हैं। भावनाएं हमारे जीवन को रंग देती हैं।

किताब बताती है कि नकारात्मक भाव बीमारियां लाते हैं, सकारात्मक भाव शक्ति। उदाहरण के लिए, द्वेष से तनाव बढ़ता है, करुणा से स्वास्थ्य सुधरता है। भावनाओं को साधकर शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है।

भावनाओं से मेंटल हेल्थ का जुड़ाव

किताब बताती है कि भावनाओं का सीधा संबंध हमारी मेंटल हेल्थ से है। यह भावना योग को विज्ञान से जोड़ती है। ब्रेन में मौजूद एमिग्डाला क्रोध और डर जैसी भावनाओं को नियंत्रित करता है, जबकि प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स हमें उन्हें संभालने की शक्ति देता है।

ध्यान करने से अल्फा वेव्स बढ़ती हैं, जिससे तनाव कम होता है और मन शांत रहता है। यानी भावना योग सिर्फ आध्यात्मिक नहीं, वैज्ञानिक रूप से भी प्रमाणित अभ्यास है, जो मानसिक संतुलन और आत्मविश्वास दोनों बढ़ाता है।

किताब का सार

  • यह पुस्तक पाठकों को अपने भीतर झांकने, अपनी भावनाओं की गहराई को समझने और उनसे जुड़ने के लिए प्रेरित करती है।
  • यह ‘भावना योग’ नामक एक प्रक्रिया सिखाती है, जो भावनाओं को अपनाने से आंतरिक शांति और आध्यात्मिक जागृति की ओर ले जाती है।
  • यह किताब जैन दर्शन के कर्म सिद्धांत पर पूरी तरह आधारित है, जो धारणा, बुद्धि और संकल्प शक्ति के विकास पर जोर देता है।
  • यह केवल एक किताब नहीं बल्कि एक आत्मिक परिवर्तन की यात्रा है, जिससे रीडर अपनी आंतरिक शक्ति से जुड़ता है और सच्चे अर्थों में स्वस्थ होना सीखता है।

यह किताब क्यों पढ़नी चाहिए

अगर आप भावनाओं को समझने, मानसिक शांति पाने और अपने भीतर की शक्ति से जुड़कर एक बेहतर स्वास्थ्य की ओर बढ़ना चाहते हैं तो ‘फील टू हील’ एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक पुस्तक साबित हो सकती है। यह आपको भावनाओं का मालिक बनाएगी। इसे नीचे दिए ग्राफिक से समझिए-

किताब से क्या सीख मिलती है?

यह किताब बताती है कि भावनाएं जीवन की नींव हैं। यह प्रेरित करती है कि नकारात्मक भावों को सकारात्मकता में बदलें। मुनिश्री जी के वचनों से मोटिवेशन मिलता है कि साधना निरंतरता से सफल होती है।

किताब के बारे में मेरी राय

‘फील टू हील’ सिर्फ किताब नहीं, एक जीवन-दर्शन है जो भावनाओं को साधकर आत्मबल जगाता है। मुनिश्री प्रमाणसागर जी ने जैन सिद्धांतों को आधुनिक विज्ञान से जोड़कर सरल बनाया है। हर अध्याय एक यात्रा है, जो थके मन को तरोताजा करता है। अगर आप चुनौतियों से हार मान चुके हैं तो यह किताब आपको नई उड़ान देगी। यह सिखाती है कि भाव बदलो, जीवन बदलो। मेरे लिए यह एक प्रेरणा स्रोत है, जो रोज मोटिवेट करती है।

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