मिन्हाज मर्चेंट का कॉलम:  अर्थव्यवस्था में सोने का और बेहतर उपयोग कैसे करें?
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मिन्हाज मर्चेंट का कॉलम: अर्थव्यवस्था में सोने का और बेहतर उपयोग कैसे करें?

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6 घंटे पहले

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मिन्हाज मर्चेंट, लेखक, प्रकाशक और सम्पादक - Dainik Bhaskar

मिन्हाज मर्चेंट, लेखक, प्रकाशक और सम्पादक

आज भारतीय परिवारों के पास दुनिया के दस सबसे बड़े केंद्रीय बैंकों- अमेरिका, जर्मनी, रूस, फ्रांस, चीन, इटली, स्विट्जरलैंड, जापान, तुर्किये और खुद भारत के स्वर्ण भंडारों से भी अधिक सोना है! भारतीय घरों में लगभग 25,000 टन सोना रखा हुआ है। यह अमेरिकी सरकार के स्वर्ण भंडार (8,133 टन) का तीन गुना और भारतीय रिजर्व बैंक (879 टन) के स्वर्ण भंडार का लगभग 30 गुना है।

आज की कीमतों के हिसाब से भारत के घरेलू सोने की कीमत कितनी होगी? सोने के मूल्य लंबे समय से बढ़ रहे हैं, लेकिन हाल के वर्षों में भू-राजनीतिक उथल-पुथल के कारण इनमें उछाल आया है। लगभग एक लाख रुपए (1,200 डॉलर) प्रति तोला (10 ग्राम) की वर्तमान कीमत के हिसाब से भारतीय घरों में रखे 25,000 टन सोने का मूल्य लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर ठहरता है। यह भारत की 2025 की जीडीपी 4.19 ट्रिलियन डॉलर का लगभग 75 प्रतिशत है।

अनुमान है कि इनमें भी भारतीय महिलाओं के पास ही 24,000 टन से ज्यादा सोना है। यह अमेरिका सहित जर्मनी (3,300 टन), इटली (2,450 टन), फ्रांस (2,400 टन) और रूस (1,900 टन) के केंद्रीय बैंकों के सोने के भंडार से ज्यादा है। ऑक्सफोर्ड गोल्ड ग्रुप की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय महिलाओं के पास दुनिया के कुल सोने का 11 प्रतिशत हिस्सा है।

सोने से भारतीयों के इस असीम लगाव की वजह क्या है? इसे एक सुरक्षित और स्थिर निवेश माना जाता है। पिछले 25 वर्षों में ही सोने की कीमत 4,000 रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर लगभग 1,00,000 रुपए प्रति 10 ग्राम हो गई है- यानी 25 वर्षों में 25 गुना वृद्धि। चक्रवृद्धि आधार पर तो सोने का मूल्य प्रति वर्ष लगभग 14 प्रतिशत बढ़ा है और यह लगभग हर पांच साल में दोगुना हो रहा है।

इसकी तुलना में बीएसई सेंसेक्स 2000 से 2025 के बीच 6,000 से बढ़कर 80,000 से अधिक अंकों तक पहुंचा है- यानी 25 वर्षों में लगभग 14 गुना वृद्धि। यह 12 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) बताता है।

लंबी अवधि में सोना इक्विटी से भी बेहतर प्रदर्शन करता है। स्टॉक के विपरीत, सोने की कीमतें कम अस्थिर होती हैं। दुनिया की सबसे रूढ़िवादी निवेशकों में से एक भारतीय महिलाओं को यह बात अच्छी तरह से पता है।

सोने ने भारतीय परिवारों को शादियों के लिए पैसे जुटाने और दिवालिया होने से बचाने में मदद की है। लेकिन वित्तीय सुरक्षा के लिए रखे गए एक डेड-एसेट के बजाय भारत की अर्थव्यवस्था में सोने का अधिक प्रोडक्टिव उपयोग कैसे किया जा सकता है?

आरबीआई की स्वर्ण निवेश योजना को सीमित सफलता मिली है। सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड का उद्देश्य सोना रखने का विकल्प प्रदान करना है। जैसा कि आरबीआई कहता है, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड एक बेहतर विकल्प प्रदान करता है। इसमें स्टोरेज का जोखिम और लागत समाप्त हो जाती है।

निवेशकों को मैच्योरिटी के समय सोने के बाजार मूल्य और आवधिक ब्याज का आश्वासन दिया जाता है। आभूषण के रूप में सोने के उपयोग के मामले में भी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड समस्याओं से मुक्त है। लेकिन भारतीयों में भौतिक सोने का आकर्षण इतना प्रबल है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पूरी तरह से लोकप्रिय नहीं हो पाया है।

भारत ने 2024-25 में 58.01 अरब डॉलर मूल्य के सोने का आयात किया। तस्करी को कम करने के उद्देश्य से आयात शुल्क में 15 से 6 प्रतिशत की कटौती ने 2023-24 में सोने के आयात को 27 प्रतिशत बढ़ाने में मदद की।

2024-25 में भारत का व्यापारिक और सेवा व्यापार में कुल घाटा 94.26 अरब डॉलर था। इसलिए 2024-25 में भारत के आयात में 58.01 अरब डॉलर का सोना भारत के व्यापार घाटे का एक प्रमुख घटक है। वैसे भारत के आयात बिल में सबसे बड़ा घटक कच्चा तेल है, जिसका 2024-25 में 133 अरब डॉलर का योगदान था।

सोने का आयात कच्चे तेल के आयात का लगभग आधा है और इसे नियंत्रित करना आसान होना चाहिए। लेकिन भारतीय परिवारों की हर साल अधिक से अधिक सोना खरीदने की अतृप्त भूख ने भारत के व्यापार घाटे को बढ़ा दिया है। सोने के प्रति आकर्षण आर्थिक के साथ ही सांस्कृतिक और भावनात्मक भी है।

चूंकि भारतीय महिलाओं के पास 3 ट्रिलियन डॉलर मूल्य का 24,000 टन से अधिक सोना है और पिछले वित्तीय वर्ष में भी उन्होंने 58 अरब डॉलर मूल्य का अनुमानित 600 टन सोना खरीदा है, इसलिए सोने की कीमतों में उछाल बने रहने की संभावना है।

सोने का आयात कच्चे तेल के आयात का लगभग आधा है और इसे नियंत्रित करना आसान होना चाहिए। लेकिन भारतीय परिवारों की हर साल अधिक से अधिक सोना खरीदने की अतृप्त भूख ने भारत के व्यापार घाटे को बढ़ा दिया है। (ये लेखक के अपने विचार हैं।)

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