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- Minhaj Merchant’s Column We Should No Longer Play Cricket With Pakistan
6 घंटे पहले
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मिन्हाज मर्चेंट, लेखक, प्रकाशक और सम्पादक
सितंबर में यूएई में एशिया कप होने जा रहा है। पहलगाम हमले के बाद बीसीसीआई ने घोषणा की थी कि यह प्रतियोगिता रद्द की जाएगी। कहा गया था कि पाकिस्तान के साथ खेलने का सवाल ही नहीं उठता। लेकिन तीन माह में ही रुख बदल गया।
बीसीसीआई के उपाध्यक्ष राजीव शुक्ला ढाका में हुई एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) की वार्षिक आमसभा की बैठक में परिषद के अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ वर्चुअल रूप से शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता एसीसी चेयरमैन मोहसिन नकवी ने की, जो पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (पीसीबी) के अध्यक्ष और पाकिस्तान के गृह मंत्री भी हैं।
नकवी ने कहा कि यूएई में एशिया कप की मेजबानी से एशिया भर के प्रशंसकों को एक ऐसे माहौल में एक साथ आने का मौका मिलेगा, जो हमारे क्षेत्र की विविधता को प्रदर्शित करता है। टूर्नामेंट के मुकाबलों को देखने के लिए जब भीड़ एकत्र होगी, तो यह इस बात की शानदार निशानी होगी कि कैसे क्रिकेट लोगों को आपस में जोड़ने की ताकत रखता है।
टूर्नामेंट में भारत और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में रखा गया है, ताकि दोनों देशों की टीमें फाइनल मुकाबले समेत टूर्नामेंट में तीन बार आमने-सामने हो सकें। इससे दिवालिया होने की कगार पर पहुंचे पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का खजाना भर जाएगा। बीसीसीआई दुनिया का सबसे धनी क्रिकेट बोर्ड है, इसलिए उसे तो पैसों की दरकार नहीं।
फिर भी बीसीसीआई ने कहा है कि वह अब टूर्नामेंट या किसी मैच से नहीं हट सकता। एसीसी की बैठक के बाद यह फैसला किया जा चुका है। आधिकारिक स्तर की बातचीत के बाद सबकुछ तय किया गया था। मैच निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होंगे। बीसीसीआई के बदले रुख ने क्रिकेट प्रशंसकों को हैरानी में डाल दिया है। यहां तक कि राजनेताओं ने भी इस पर टिप्पणी की है।
संसद में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर हुई बहस में एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि ‘जब पाकिस्तान के विमान हमारे एयरस्पेस में नहीं आ सकते, उनकी नावें हमारे जल क्षेत्र में नहीं आ सकतीं, आपसी व्यापार बंद हो चुका है, तो आप पाकिस्तान के साथ क्रिकेट मैच कैसे खेलेंगे? जब हम पाकिस्तान का 80 प्रतिशत पानी यह कहते हुए रोक रहे हैं कि खून और पानी एक साथ नहीं बहेगा तो क्या ऐसे में भी आप उनसे क्रिकेट खेलेंगे?’ विरोध करने वाले नेताओं में कई अन्य भी शामिल थे।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और अब पश्चिम बंगाल में राज्यमंत्री मनोज तिवारी ने कहा कि ‘मैं इसके विरोध में हूं। भारत-पाक मैच नहीं होना चाहिए। खासतौर पर पहलगाम हमले के बाद, जिसमें भारतीय नागरिक मारे गए थे। मुझे लगता है कि इस पर फिर से विचार करना चाहिए। ऐसे माहौल में मैच नहीं होना चाहिए। हमारे प्रधानमंत्री कह रहे हैं कि ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है। ऐसे में हम कैसे पाकिस्तान से मैच खेल सकते हैं?’
बर्मिंघम में खेली गई वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स (डब्ल्यूसीएल) एक लिटमस टेस्ट जैसी थी, जिसमें हरभजन सिंह, युवराज सिंह, शिखर धवन, इरफान पठान और यूसुफ पठान के नेतृत्व वाली भारतीय टीम ने ग्रुप स्टेज और सेमीफाइनल में पाकिस्तान के साथ खेलने से इनकार कर दिया था। दक्षिण अफ्रीका की रंगभेद नीति के विरोध में भारत ने 1974 के डेविस कप टेनिस फाइनल से हटकर एक उदाहरण स्थापित किया था। वही नजीर अब वैश्विक रूप ले चुकी है।
यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ने पर रूस को यूरोपियन फुटबॉल कप समेत कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं से बाहर किया जा चुका है। जो कहते हैं कि राजनीति और खेल को मिलाना नहीं चाहिए, वही अब जता रहे हैं कि खून और खेल को मिलाया जा सकता है। बीसीसीआई ने बार-बार खुद को एक धन-लोलुप निकाय की भांति दर्शाया है। लेकिन उसे अब भारतीय टीम को निर्देश देने चाहिए कि वह एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ ना खेले।
- दक्षिण अफ्रीका की रंगभेद नीति के विरोध में भारत ने 1974 के डेविस कप फाइनल से हटकर एक उदाहरण स्थापित किया था। वही नजीर अब वैश्विक रूप ले चुकी है। यूक्रेन के खिलाफ युद्ध छेड़ने पर रूस को भी बहिष्कृत किया गया।
(ये लेखक के अपने विचार हैं)








