पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  दिशा, अवधि और अक्ल को अपनी मेहनत से जोड़ लें
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पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: दिशा, अवधि और अक्ल को अपनी मेहनत से जोड़ लें

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4 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता - Dainik Bhaskar

पं. विजयशंकर मेहता

केवल परिश्रम से सफलता नहीं मिलती। लेकिन ये भी सच है कि परिश्रम तो करना ही पड़ेगा। तो जब आप परिश्रम कर रहे हों तो दिशा, समय-अवधि और अक्ल को अपनी मेहनत से जोड़ लीजिए।

कहते हैं कि परिश्रम करते समय मूर्ख दिखें पर बुद्धिमान होना चाहिए। क्योंकि परिश्रम करते समय इन तीन बातों का तालमेल बहुत जरूरी है। जैसे जिंदगी और संगीत के इन्स्ट्रूमेंट एक जैसे होते हैं। संगीत का जो इन्स्ट्रूमेंट होता है, वह तो एक ही होता है, पर उस पर हर बार राग, बोल, धुन बदल जाते हैं।

कलाकार जब उसका इस्तेमाल करता है, वो इन्स्ट्रूमेंट वैसा होने लगता है। वो इन्स्ट्रूमेंट कलाकार से शिकायत तो नहीं करता। बस, जिंदगी ऐसी ही होती है। हम इसमें से जो चाहे वो स्वर, बोल निकाल सकते हैं। क्योंकि मनुष्य के जीवन में सबकुछ संयुक्त है, अखंड है। तालमेल बैठाना पड़ता है। राग, स्वर, धुन बदलते रहेंगे, इन्स्ट्रूमेंट वही रहेगा।

जीवन वही रहेगा, स्थितियां बदलती रहेंगी। इसलिए जब भी परिश्रम का अवसर आए, यह मानकर चलना कि केवल मेहनत से सफलता नहीं मिलेगी। जीवन में बहुत कुछ और भी ऐसा होगा, जो आपने सोचा न होगा।

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